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New grid penalty rules: केंद्रीय विद्युत नियामक आयोग (CERC) ग्रिड अनुशासन बनाए रखने या यूं कहे कि सरकार ग्रिड सुरक्षित रखने के नए नियम लाई है. सरकार चाहती है कि बिजली कंपनियां एकदम सही बिजली सप्लाई करें ताकि ग्रिड फेल होने का खतरा न रहे. इसका मतलब है कि उन्हें भी सामान्य प्लांट की तरह ग्रिड अनुशासन और समय पर बिजली देने की जिम्मेदारी उठानी होगी.
ग्रिड सुरक्षित रखने के नए नियम

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एबीपी लाइव की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में बिजली बनाने वाली कंपनियों को पहले से बताना जरूरी होगा कि वे कितनी बिजली ग्रिड में भेजेंगी. अगर कंपनी कम या ज्यादा बिजली ग्रिड में भेजती है, तो सरकार उस पर भारी जुर्माना लगाएगी. सरकार चाहती है कि कंपनियां एकदम सही बिजली सप्लाई करें ताकि ग्रिड फेल होने का खतरा न रहे इसलिए ग्रिड अनुशासन पर नियम कड़े बनाए गए हैं.
कर्नाटक हाई कोर्ट पहुंची बिजली कंपनियां

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सरकार के ग्रिड पर जुर्माने के नए नियमों के खिलाफ बिजली कंपनियों ने कर्नाटक हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है. बिजली कंपनियों का कहना है कि कोयले और गैस से चलने वाले बिजली प्लांट को कंट्रोल किया जा सकता है, लेकिन सोलर और विंड एनर्जी पूरी तरह से मौसम पर निर्भर करती है. ऐसे में कंपनियां एकदम सटीक अंदाजा नहीं लगा पातीं कि कितनी बिजली भेजनी है. ऐसे में अब उन्हें बिना किसी गलती के जुर्माना भरना पड़ेगा.
आधुनिक तकनीक इस्तेमाल करें

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नेशनल सोलर एनर्जी फेडरेशन ऑफ इंडिया के अनुसार, इन जुर्माने से विंड पावर के मामले में 48% तक और सोलर पावर के मामले में 11.1% तक की कमाई का नुकसान हो सकता है, जबकि पुराने सिस्टम में यह नुकसान 1-3% के बीच होता था. इधर, सरकार चाहती है कि कंपनियां नई और आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करें, जिससे मौसम और उत्पादन का सही अंदाजा लगाया जा सके
क्या महंगी हो सकती है बिजली?

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अब जाहिर सी बात है कि कंपनियों को जुर्माना भरना पड़ेगा, उन्हें नुकसान होगा, तो उसकी भरपाई करने के लिए कंपनियां बिजली की दरें बढ़ा सकती हैं, जिसका बोझ आम जनता को उठाना पड़ेगा. एक डर इस बात का भी है कि भारी जुर्माने के डर से नई कंपनियां सोलर और विंड प्रोजेक्ट में पैसे लगाने से कतराएंगी.
अदालत ने नए जुर्माने वाले नियम पर लगाई रोक

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कंपनियों की याचिका पर कर्नाटक हाई कोर्ट ने नए जुर्माने वाले नियम पर 10 जून, 2026 तक रोक लगा दी है. सरकार का दीर्घकालिक लक्ष्य है कि साल 2031 तक सोलर और विंड पावर प्रोजेक्ट्स को भी कोयले और गैस से संचालित सामान्य बिजली प्लांट की ही तरह माना जाए.