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आंध्र प्रदेश के कर्नूल जिले में भारत की पहली बड़े पैमाने की निजी सोने की खान मई में शुरू होने वाली है. जोन्नागिरी गोल्ड प्रोजेक्ट के नाम से मशहूर यह खदान देश को सोने के मामले में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है.
कितना सोना मिलने की उम्मीद है?

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एक रिपोर्ट के अनुसार इस खदान के 598 हेक्टेयर क्षेत्र में करीब 13.1 टन प्रमाणित भंडार है जबकि कुल 42.5 टन सोना होने का अनुमान है. जब यह खदान पूरी क्षमता से चलेगी तो यहाँ से हर साल लगभग 1,000 किलो शुद्ध सोना निकाला जा सकेगा.
कौन चला रहा है यह प्रोजेक्ट?

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जियोमैसूर सर्विसेज इंडिया द्वारा संचालित इस ऐतिहासिक प्रोजेक्ट में अब तक 400 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश किया जा चुका है. इसे त्रिवेणी अर्थमूवर्स और डेक्कन गोल्ड जैसी बड़ी कंपनियों का साथ मिला है जो भारत में खनन के भविष्य को बदल देंगी.
क्या है इसकी खास तकनीक?

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इस माइनिंग प्रोजेक्ट में आधुनिक मशीनों और नियंत्रित विस्फोटों का इस्तेमाल किया जा रहा है जिससे पर्यावरण को नुकसान न पहुंचे. महज 13 महीनों के रिकॉर्ड समय में यहाँ प्रोसेसिंग प्लांट तैयार कर लिया गया है जो जल्द ही पूरी तरह एक्टिव हो जाएगा.
क्यों है यह देश के लिए जरूरी?

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भारत हर साल विदेशों से 800 टन से ज्यादा सोना आयात करता है जिससे देश का काफी पैसा बाहर चला जाता है. घरेलू उत्पादन बढ़ने से न केवल आयात पर निर्भरता कम होगी बल्कि अर्थव्यवस्था में विदेशी मुद्रा की भी भारी बचत होगी.
क्या है भविष्य का बड़ा प्लान?

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सरकारी संयंत्रों के कम उत्पादन और केजीएफ जैसी बड़ी खानों के बंद होने के बाद यह निजी प्रोजेक्ट एक नई उम्मीद लेकर आया है. इस सफलता के बाद देश के अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भी निजी निवेश का रास्ता साफ होने की पूरी उम्मीद है.