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कच्चे तेल की सप्लाई का संकट गहराने पर देश में पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाता है। गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़ जाते हैं। घर का खर्च बैलेंस करने के बाद अचानक से पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर महंगा होने से लोगों का बजट बिगड़ जाता है। इसके लिए केंद्र सरकार एक स्पेशल फाइनेंशियल सिस्टम बनाने का विचार कर रही है, ताकि संकट के समय तीनों चीजों की कीमतों को कंट्रोल किया जा सके।
स्टेबलाइजेशन फंड

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केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में गहराए तनाव के कारण देश में लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ा। इसलिए स्पेशल फाइनेंशियल सिस्टम बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। वह प्रस्ताव उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के स्तर पर विचाराधीन है। यह फाइनेंशियल सिस्टम कोई और नहीं, साल 2015 में बनाया गया स्थिरता कोष (Stabilization Fund) है।
क्या है स्टेबलाइजेशन फंड

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साल 2015 में केंद्र सरकार ने दाल, प्याज, आलू और टमाटर जैसी रोजमर्रा की चीजों के लिए स्टेबलाइजेशन फंड बनाया था। जब देश में महंगाई बढ़ जाती है और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ जाते हैं तो सरकार इस फंड से उन चीजों को खरीदकर बेचती है। इससे उन चीजों की कीमतें स्थिर रहती हैं। ऐसा ही एक फंड सरकार पेट्रोल-डीजल और गैस के लिए बनाना चाहती है।
कैसे काम करेगा स्टेबलाइजेशन फंड

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स्टेबलाइजेशन फंड को लेकर केंद्र सरकार की हाई लेवल मीटिंग के बाद जानकारी मिली कि सरकार फंड से पेट्रोल, डीजल और LPG खरीदकर एक तय मात्रा का स्टॉक बनाएगी। ऐसा करने के लिए केंद्र सरकार देश की तेल रिफाइनरी कंपनियों से समझौता करेगी। फिर जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अचानक बढ़ेंगी या सप्लाई बाधित होगी तो इस भंडार से पेट्रोल-डीजल और गैस खरीदकर बेची जाएगी, जिससे कीमतें स्थिर रहेंगी।
क्या है स्टेबलाइजेशन फंड का मकसद

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सूत्रों के अनुसार, स्टेबलाइजेशन फंड कोई सब्सिडी नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल सिर्फ कीमतें बढ़ने पर किया जाएगा, ताकि कीमतों को स्थिर रखा जा सके, कंट्रोल किया जा सके। वहीं इस फंड से बनाया गया तेल-गैस का भंडार मौजूदा स्टॉक से अलग होगा। वर्तमान में देश के पास 5.3 मिलियन टन कच्चे तेल का भंडार है, जिसका इस्तेमाल आपात स्थिति में किया जाता है लेकिन नया फंड कीमतों को स्थिर रखने के लिए होगा।