Cylinder Price Update: गैस सिलेंडर के रेट घटेंगे, पेट्रोल-डीजल से भी मिलेगी राहत? जानें क्या है सरकार का प्लान
देशभर में पेट्रोल, डीजल और रसोई गैस (LPG) की कीमतों को लेकर टेंशन का माहौल है। बीते 2 महीने से मिडिल ईस्ट वार और होर्मुज स्ट्रेट ब्लॉकेड के कारण को देश तेल-गैस का संकट झेलना पड़ रहा है, जिस वजह से महंगाई ने देशवासियों की टेंशन बढ़ा रखी है। भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचने के लिए केद्र सरकार एक विशेष योजना पर काम कर रही है।

कच्चे तेल की सप्लाई का संकट गहराने पर देश में पेट्रोल-डीजल महंगा हो जाता है। गैस सिलेंडर के दाम भी बढ़ जाते हैं। घर का खर्च बैलेंस करने के बाद अचानक से पेट्रोल-डीजल और गैस सिलेंडर महंगा होने से लोगों का बजट बिगड़ जाता है। इसके लिए केंद्र सरकार एक स्पेशल फाइनेंशियल सिस्टम बनाने का विचार कर रही है, ताकि संकट के समय तीनों चीजों की कीमतों को कंट्रोल किया जा सके।
स्टेबलाइजेशन फंड
2 / 5केंद्र सरकार के सूत्रों के अनुसार, पश्चिम एशिया में गहराए तनाव के कारण देश में लोगों पर महंगाई का बोझ बढ़ा। इसलिए स्पेशल फाइनेंशियल सिस्टम बनाने का प्रस्ताव दिया गया है। वह प्रस्ताव उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय और पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के स्तर पर विचाराधीन है। यह फाइनेंशियल सिस्टम कोई और नहीं, साल 2015 में बनाया गया स्थिरता कोष (Stabilization Fund) है।
क्या है स्टेबलाइजेशन फंड
3 / 5साल 2015 में केंद्र सरकार ने दाल, प्याज, आलू और टमाटर जैसी रोजमर्रा की चीजों के लिए स्टेबलाइजेशन फंड बनाया था। जब देश में महंगाई बढ़ जाती है और रोजमर्रा की चीजों के दाम बढ़ जाते हैं तो सरकार इस फंड से उन चीजों को खरीदकर बेचती है। इससे उन चीजों की कीमतें स्थिर रहती हैं। ऐसा ही एक फंड सरकार पेट्रोल-डीजल और गैस के लिए बनाना चाहती है।
कैसे काम करेगा स्टेबलाइजेशन फंड
4 / 5स्टेबलाइजेशन फंड को लेकर केंद्र सरकार की हाई लेवल मीटिंग के बाद जानकारी मिली कि सरकार फंड से पेट्रोल, डीजल और LPG खरीदकर एक तय मात्रा का स्टॉक बनाएगी। ऐसा करने के लिए केंद्र सरकार देश की तेल रिफाइनरी कंपनियों से समझौता करेगी। फिर जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतें अचानक बढ़ेंगी या सप्लाई बाधित होगी तो इस भंडार से पेट्रोल-डीजल और गैस खरीदकर बेची जाएगी, जिससे कीमतें स्थिर रहेंगी।
क्या है स्टेबलाइजेशन फंड का मकसद
5 / 5सूत्रों के अनुसार, स्टेबलाइजेशन फंड कोई सब्सिडी नहीं है, बल्कि इसका इस्तेमाल सिर्फ कीमतें बढ़ने पर किया जाएगा, ताकि कीमतों को स्थिर रखा जा सके, कंट्रोल किया जा सके। वहीं इस फंड से बनाया गया तेल-गैस का भंडार मौजूदा स्टॉक से अलग होगा। वर्तमान में देश के पास 5.3 मिलियन टन कच्चे तेल का भंडार है, जिसका इस्तेमाल आपात स्थिति में किया जाता है लेकिन नया फंड कीमतों को स्थिर रखने के लिए होगा।