देश में कैश की मांग बढ़ती जा रही है। UPI पेमेंट और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के लिए भी कैश की ज्यादा जरूरत पड़ने लगी है। इसलिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने प्लास्टिक या पॉलीमर के नोट छापने और इन्हें चलन में लाने की योजना पर फिर से काम करना शुरू कर दिया है और जल्दी ही एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू हो सकता है। रिजर्व बैंक की पटना और मुंबई में हुई बोर्ड मीटिंग में प्लास्टिक के नोट वाले प्रोजेक्ट पर विस्तार से चर्चा की गई है।
क्यों लागू करने हैं प्लास्टिक के नोट?

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सूत्रों के अनुसार, प्लास्टिक के नोटों को छापने में कम लागत लगती है और यह नोट टिकाऊ भी हैं। इसलिए RBI भारत में भी प्लास्टिक के नोट जारी करना चाहता है। क्योंकि भारत नई टेक्नोलॉजी अपना रहा है तो नई करेंसी अपनाकर भारत खुद को 2047 के विकसित भारत के रूप में पेश करना चाहता है। प्लास्टिक के नोटों को ATM से आसानी से निकालने के लिए मशीन को अपग्रेड करने की योजना भी इस प्रोजेक्ट में है।
पुराने नोट क्यों बदला चाहता है RBI?

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RBI के अनुसार, कागज के नोट ज्यादा साल नहीं चल पाते। वे गंदे हो जाते हैं और फट भी जाते हैं। गंदे और फटे हुए होने की वजह से वे चलन से बाहर हो जाते है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब 23.8 अरब के नोट नष्ट करने पड़े, जबकि साल 2023-24 में 21.24 अरब के नोट नष्ट किए गए थे। सबसे ज्यादा नोट 500 और 100 रुपये के थे। इतनी करेंसी को पहले छापना, फिर नष्ट कर देने से सरकारी खर्च पर बढ़ता है। क्योंकि वित्त वर्ष 2024-25 में नोट छापने में 6372.8 करोड़ रुपये खर्च हुए थे। प्लास्टिक के नोट छपने से यह लागत कम होगी।
2012 में फेल हो चुका एक ट्रायल

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बता दें कि प्लास्टिक के नोट जारी करने का एक ट्रायल फेल हो चुका है। साल 2012 में रिजर्व बैंक ने 1 अरब के प्लास्टिक के 10 रुपये के नोट जारी करने का फैसला किया था, लेकिन ATM मशीनों और बैंकों में टेक्निकल प्रॉब्लम के कारण इस ट्रायल को रोक दिया गया था। लेकिन अब ATM मशीनों को नए टूल्स के साथ अपग्रेड करने के बाद ही प्लास्टिक नए नोट जारी किए जाएंगे। मशीनों में प्लास्टिक नोट से जुड़े टूल्स शामिल करने के लिए उन देशों के साथ डील की जा सकती हैं, जो पहले से ही प्लास्टिक के नोट इस्तेमाल कर रहे हैं।
दुनिया के 60 देशों में प्लास्टिक नोट

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बता दें कि दुनियाभर के 60 देशों में पॉलिमर या प्लास्टिक के नोट चलन में हैं। ऑस्ट्रेलिया में 1988 में पहली बार प्लास्टिक का 10 डॉलर का नोट जारी हुआ था। उसके बाद इस करेंसी को सिंगापुर, इंडोनेशिया, थाईलैंड, मलेशिया, रोमानिया और कनाडा ने अपनाया। यूरोप में रोमानिया ने 1998 में सबसे पहले प्लास्टिक नोट चलाया, जबकि कनाडा ने 2011 में इस करेंसी को अपने देश में चलाया। हालांकि अमेरिकी डॉलर अभी भी कपास और लिनन के मिक्सचर से बनाया जाता है, लेकिन भारत प्लास्टिक के नोट जारी करके अमेरिका को भी पीछे छोड़ सकता है।
नोटबंदी के बाद जारी हुए थे नए नोट

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बता दें कि भारत में मोदी सरकार ने नोटबंदी की थी। 10, 20, 50, 100, 500 के पुराने नोट बंद करके नए नोट जारी किए थे, जो साइज में छोटे हैं, लेकिन नए डिजाइन के साथ हैं। सरकार ने 2000 का गुलाबी रंग का नोट भी जारी किया था, लेकिन प्रचलित न होने के कारण उन्हें बंद कर दिया गया था। अब केंद्र सरकार रिजर्व बैंक के साथ मिलकर कागज की पुरानी करेंसी को खत्म करके प्लास्टिक के नोट जारी करना चाहती है।