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हर साल लाखों लोग तपती गर्मी से बचने के लिए शिमला और मनाली जैसे हिल स्टेशनों का रुख करते हैं लेकिन इस बार नजारा बिल्कुल बदला हुआ है. पहाड़ों में इस साल गर्मी ने वक्त से पहले दस्तक दे दी है और ऊंचाई पर बसे शहरों का तापमान रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है जिससे सैलानियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है.
क्यों झुलस रहे हैं ठंडे इलाके?

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मौसम विभाग के मुताबिक इस साल हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू कश्मीर के पहाड़ी इलाकों में सामान्य से कहीं ज्यादा गर्मी पड़ने का अनुमान जताया गया है. मार्च की शुरुआत में ही हिमाचल में तापमान सामान्य से 12 डिग्री ज्यादा दर्ज किया गया था जिसने पिछले कई सालों के रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं और लोगों को बेहाल कर दिया है.
शिमला और नैनीताल का क्या है हाल?

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शिमला में पारा 27 डिग्री के पार जा चुका है वहीं नैनीताल और मसूरी में भी तापमान 30 डिग्री के आसपास बना हुआ है जो अप्रैल के औसत से बहुत ज्यादा है. मनाली जैसे ठंडे इलाके में भी दोपहर के वक्त पसीने छूट रहे हैं और मौसम विभाग ने राज्य के कई जिलों में हीटवेव को लेकर येलो अलर्ट भी जारी किया है.
क्या बर्फ की कमी है असली वजह?

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हिमालयी क्षेत्रों में लगातार चौथे साल बर्फबारी में भारी कमी देखी गई है जो इस बढ़ती तपिश का सबसे बड़ा और डरावना कारण माना जा रहा है. पहाड़ों पर बर्फ टिकने की क्षमता करीब 27 प्रतिशत तक कम हो गई है जिसका सीधा असर नदियों के जलस्तर और वहां के ठंडे माहौल पर पड़ रहा है.
पर्यटकों के लिए क्या है नई मुसीबत?

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अगर आप भी इस गर्मी में पहाड़ों की सैर का प्लान बना रहे हैं तो सावधान हो जाइए क्योंकि वहां अब पहले जैसी ठंडक नहीं मिल रही है. बढ़ती गर्मी के कारण पहाड़ी जंगलों में आग लगने और पानी की कमी जैसी समस्याएं भी पैदा हो रही हैं जो आपके सफर का मजा किरकिरा कर सकती हैं.
कैसे करें अपनी ट्रिप की तैयारी?

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पहाड़ों की यात्रा पर निकलने से पहले मौसम विभाग के अपडेट जरूर चेक करें और अपने साथ दोपहर की धूप से बचने के लिए जरूरी इंतजाम रखें. डिस्क्लेमर: यह जानकारी मौसम के वर्तमान आंकड़ों पर आधारित है और पहाड़ों की यात्रा के दौरान स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करना बेहद जरूरी है.