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गंगा एक्सप्रेसवे 594 किलोमीटर लंबा है, जिसे 36402 करोड़ रुपये खर्च करके बनाया गया है। यह एक्सप्रेसवे मेरठ से प्रयागराज को जोड़ेगा। उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण (UPEIDA) ने इसका डिजाइन बनाया और निर्माण किया। एक्सप्रेसवे पर 21 इंटरचेंज, 2 मेन टोल प्लाजा, 2 अन्य मेन टोल प्लाजा और 19 रैम्प टोल प्लाजा प्रस्तावित हैं।
इन जिलों से गुजरेगा एक्सप्रेसवे

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पश्चिमी उत्तर प्रदेश को पूर्वी उत्तर प्रदेश से जोड़ने के लिए यह एक्सप्रेसवे बनाया गया है। प्रदेश के कई जिले, तहसील और गांव नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे, MDR और प्रमुख संपर्क मार्गों एक्सप्रेसवे से जोड़े जाएंगे। मेरठ से शुरू होने वाला गंगा एक्सप्रेसवे मेरठ, हापुड़, अमरोहा, संभल, बदायूं, शाहजहांपुर, हरदोई, उन्नाव, रायबरेली, प्रतापगढ़ और प्रयागराज समेत कई जिलों से गुजरेगा।
दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे से कनेक्शन

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दिल्ली से मेरठ जाने में इस एक्सप्रेसवे के जरिए करीब डेढ़ घंटे का समय लगेगा। नोएडा सेक्टर 15 से निकलने वाले लोगों को सेक्टर-62 होते हुए दिल्ली-मेरठ एक्सप्रेसवे पकड़ेंगे तो 82 किमी की दूरी करीब 1 घंटा 30 मिनट में पूरी करेंगे। इंडिया गेट से आएंगे तो मेरठ एक्सप्रेसवे, NH-9 और NH-34 होते हुए गंगा एक्सप्रेस पर पहुंचेंगे ओर 88 किलोमीटर की दूसरी तय करेंगे।
120 की स्पीड से दौड़ेंगी गाड़ियां

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गंगा एक्सप्रेसवे को पीपीपी (DBFOT) मॉडल के अनुसार डेवलप किया गया है। फिलहाल एक्सप्रेसवे 6 लेन का है और भविष्य में इसे 8 लेन का बनाने का प्रस्ताव है। इस एक्सप्रेसवे पर 120 किमी प्रति घंटे की स्पीड से गाड़ियां दौड़ सकती हैं। चौड़े-चौड़े राइट ऑफ वे और इसके सेफ्टी फीचर्स इसे देश का सबसे मॉडर्न एक्सप्रेसवे बनाते हैं। आस-पास के नजारे भी शानदार होंगे।
शाहजहांपुर के पास बनी एयरस्ट्रिप

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गंगा एक्सप्रेसवे पर शाहजहांपुर के पास बनी 3.2 किलोमीटर लंबी एयरस्ट्रिप इसकी खास बात है। इस एयरस्ट्रिप पर इमरजेंसी में वायुसेना के विमान लैंड कर सकते हैं। इंटेलिजेंट ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ITMS), CCTV कैमरे, इमरजेंसी कॉल बॉक्स, एम्बुलेंस और पेट्रोलिंग इसके फीचर्स हैं। गाड़ियों की स्पीड और सेफ्टी सुनिश्चित करने के लिए मॉडर्न इंस्ट्रूमेंट भी एक्सप्रेसवे पर लगाए गए हैं।
इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स

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गंगा एक्सप्रेसवे के किनारे इंटीग्रेटेड मैन्युफैक्चरिंग एंड लॉजिस्टिक्स क्लस्टर्स (IMLC) डेवलप किए जाएंगे। मैन्युफैक्चरिंग यूनिट्स लगेंगी। वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज बनेंगे। फूड प्रोसेसिंग और लॉजिस्टिक्स हब बनाए जाएंगे। कैपिटल सब्सिडी, SGST रिइम्बर्समेंट, स्टाम्प ड्यूटी छूट, पावर इंसेंटिव और पीले टॉप-अप जैसी सुविधाएं निवेशकों को मिलेंगी। लाखों युवाओं को रोजगार के अवसर मिलेंगे।