नए नियम के तहत कर्मचारी और कंपनी प्रोविडेंट फंड में 12-12 प्रतिशत यानी 1800 रुपये का अंशदान दे सकते हैं, लेकिन अगर कर्मचारी चाहे तो वह 1800 रुपये से ज्यादा का अंशदान भी दे सकते हैं, लेकिन यह उनकी मर्जी पर निर्भर करेगा, यानी स्वैच्छिक योगदान होगा।
कम-ज्यादा अंशदान वर्तमान-भविष्य तय करेगा

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वहीं योजना के तहत कर्मचारियों को 12 प्रतिशत से ज्यादा अंशदान करने या न करने का ऑप्शन भी दिया गया है। कर्मचारी चाहें तो 12 प्रतिशत से ज्यादा अंशदान करके रिटायरमेंट के बाद के लिए ज्यादा पैसा बचा सकते हैं और चाहें तो कम अंशदान करके वर्तमान संवार सकते हैं।
कर्मचारी अपनी उम्र देखकर अंशदान तय करें

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बता दें कि प्रोविडेंट फंड में 12 प्रतिशत से ज्यादा का अंशदान कर्मचारी की उम्र पर निर्भर करेगा। अगर उम्र 20 से 30 साल के बीच है तो कर्मचारी ज्यादा अंशदान करके लंबी अवधि तक चक्रवृद्धि ब्याज का लाभ उठा सकते हैं। इससे रिटायमेंट के फंड में काफी ज्यादा बढ़ोतरी होने से फायदा होगा।
रिटायरमेंट का टाइम देखकर अंशदान तय करे

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कर्मचारी को अपनी रिटायरमेंट का टाइम देखकर प्रोविडेंट फंड में अंशदान करना चाहिए। अगर कई साल से नौकरी कर रहे हैं और खाते में काफी पैसा जमा हो चुका है तो चाहें तो अब प्रोविडेंट फंड में अंशदान को 1800 रुपये तक सीमित कर सकते हैं। क्योंकि सेवानिवृत्ति के करीब पहुंचे कर्मचारी को ज्यादा कैश की जरूरत होती है, जो किसी भी जरूरत में काम आ सकता है।
रिटायरमेंट पर पैसे की जरूरत देखें

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कर्मचारी को रिटायरमेंट के पैसे की जरूरत के हिसाब से प्रोविडेंट फंड में अंशदान तय करना चाहिए। अगर आपको रिटायरमेंट पर ज्यादा पैसा चाहिए और इसके लिए आप सिर्फ प्रोविडेंट फंड की सेविंग पर निर्भर हैं तो 1800 रुपये से ज्यादा अंशदान करना चाहिए, यानी रिटायरमेंट टारगेट के हिसाब से अंशदान बढ़ाना चाहिए।
कितनी है मंथली सैलरी की जरूरत?

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कर्मचारियों को प्रतिमाह सैलरी की जरूरत के हिसाब से प्रोविडेंट फंड में अंशदान तय करना चाहिए। अगर महीने के बजट को पूरा करने के लिए ज्यादा पैसों की जरूरत है तो प्रोविडेंट फंड में अंशदान 1800 रुपये तक कर सकते हैं। अगर आप ऐसा करेंगे तो नियम के अनुसार इन-हैंड सैलरी बढ़ जाएगी और घर का बजट भी नहीं बिगड़ेगा।
इनकम टैक्स की बचत भी देखनी होगी

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प्रोविडेंट फंड में अंशदान के लिए टैक्स छूट और बचत के लाभ भी देखने होंगे। कर्मचारियों को अंशदान बढ़ाने से पहले लागू टैक्स प्रावधानों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। स्वैच्छिक अंशदान करते समय आयकर अधिनियम के तहत टैक्स संबंधी प्रभावों पर विचार अनिवार्य है। इसलिए जो कर्मचारी 18 प्रतिशत से ज्यादा अंशदान की योजना बना रहे हैं, उन्हें रिटायरमेंट के लाभों के साथ-साथ टैक्स संबंधी नियमों का भी वैल्यूवेशन करना चाहिए।