दरअसल, EPFO पोर्टल अपग्रेड हुआ है, जिसके चलते पोर्टल में कई बदलाव हो गए हैं। इन बदलावों में पोर्टल से 2 सुविधाओं को हटाया जाना भी शामिल है। दोनों सुविधाएं यूनिवर्सल अकाउंट नंबर (UAN) से जुड़ी हैं। नए नियमों के अनुसार अब UAN जनरेशन और एक्टिवेशन पोर्टल से नहीं बल्कि उमंग ऐप के जरिए ही किया जा सकेगा।
7 दिन में अपग्रेड हुआ ऑफिशियल पोर्टल

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करीब 7 दिन के अपग्रेडेशन के बाद EPFO का ऑफिशियल पोर्टल री-स्टार्ट हुआ और नए अपग्रेड पोर्टल से 2 चीजें हट गईं। पहली सर्विस UAN एक्टिवेशन है और दूसरी सर्विस नया UAN जनरेट करने की है। यह दोनों सेवाएं अब सरकार के UMANG ऐप पर ट्रांसफर कर दी गई हैं। वहीं जनरेशन और एक्टिवेशन के लिए अब आधार फेस ऑथेंटिकेशन (FAT) अनिवार्य होगा।
UAN को कैसे एक्टिव कर सकते हैं?

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खाताधारक अब EPFO पोर्टल के माध्यम से UAN को एक्टिव नहीं कर सकते हैं। बल्कि आधार बेस्ड अथेंटिफिकेशन का यूज करके उमंग ऐप से यह काम करना होगा। इसके लिए UMANG ऐप डाउनलोड करें और लॉगइन करके उसमें EPFO सर्विस ओपन करें। फेस के माध्यम से UAN सर्विस सेक्शन में UAN एक्टिवेशन को सेलेक्ट करें। आधार कार्ड से फेस का अथेंटिफिकेशन पूरा करें और स्क्रीन पर दिए गए निर्देशों का पालन करें।
उमंग ऐप से डायरेक्ट UAN जनरेशन

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खाताधारक अब EPFO पोर्टल के माध्यम से UAN को जनरेट भी नहीं कर सकेंगे। बल्कि इसके लिए भी अब उमंग ऐप का ही इस्तेमाल करना होगा। इसके लिए UMANG ऐप खोलें और EPFO सर्विस ओपन करें। UNA आवंटन और एक्टिवेशन पर क्लिक करके आधार बेस्ड फेस अथेंटिफिकेशन प्रोसेस पूरा करें। इसके बाद UAN जनरेट करने के लिए दिए गए निर्देशों का पालन करें। ऐसे में अब UAN से जुड़े दोनों काम अब मोबाइल पर हो सकेंगे।
UAN भूल गए तो कैसे रिकवर करें?

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UAN नंबर भूल गए हैं तो उसे रिकवर करने का तरीका भी काफी आसान है। EPFO पोर्टल पर लॉगइन करें। होमपेज पर दाईं ओर Know Your UAN पर क्लिक करें। रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और कैप्चा कोड डालकर OTP जनरेट करें। नाम, बर्थ डेट और आधार नंबर या पैन नंबर दर्ज करके Show My UAN पर क्लिक करेंगे तो UAN नंबर स्क्रीन पर शो हो जाएगा।
प्रोविडेंट फंड में अंशदान के नियम बदले

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कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने प्रोविडेंट फंड में अंशदान के नियम भी बदल दिए हैं। हालांकि अंशदान 12 प्रतिशत ही रहेगा, लेकिन 1800 रुपये से ज्यादा का योगदान अगर कर्मचारी करना चाहता है तो वह कर सकता है और यह स्वैच्छिक होगा, अनिवार्य नहीं। इसका मतलब यह है कि अगर खाताधारक ज्यादा सेविंग करना चाहता है तो वह ज्यादा अंशदान कर सकता है। अगर उसे अभी ज्यादा पैसों की जरूरत है तो वह अंशदान की लिमिट 12 प्रतिशत ही रख सकता है।