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दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के लोगों का सालों पुराना सपना आज पूरा हो गया। आज दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन हो गया और वह देशवासियों को समर्पित हो गया। आइए इस एक्सप्रेसवे, इसकी खासियतों, रूट और फायदों के बारे में विस्तार से बात करते हैं...
210 किलोमीटर लंबा 6 लेन वाला एक्सप्रेस

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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे को उत्तर भारत का दिल्ली-सहारनपुर-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर भी कहते हैं। इस एक्सप्रेसवे का निर्माण नेशनल अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) के द्वारा किया गया है। यह 210 किलोमीटर लंबा एक्सप्रेसवे 6 लेन का है, जिसे भविष्य में 12 लेन का बनाया जा सकता है।
दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे के फायदो

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दिल्ली देहरादून एक्सप्रेसवे का सबसे बड़ा फायदा पश्चिमी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, दिल्ली, हरियाणा आदि के लोगों को होगा। क्योंकि इससे लोगों का समय और पैसा दोनों बचेगा। उत्तराखंड में चार धाम की यात्रा पर जाने वालों को सहूलियत दोगी, यानी इससे पर्यटन के साथ-साथ व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
एक्सप्रेस का सबसे ज्यादा हिस्सा उत्तर प्रदेश में

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बता दें कि एक्सप्रेसवे दिल्ली में अक्षरधाम मंदिर के पास से शुरू होगा और उत्तराखंड में देहरादून के पास इसका समापन होगा। दिल्ली के अक्षरधाम से शुरू होकर एक्सप्रेसवे का रूट बागपत, बड़ौत, शामली, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, राजाजी नेशनल पार्क और उत्तराखंड के देहरादून तक रहेगा।
राजाजी नेशनल पार्क के पास कॉरिडोर बना

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बता दें कि दिल्ली देहरादून एक्सप्रेस करीब 12000 करोड़ रुपये में बना है। वहीं इस एक्सप्रेसवे पर एशिया का सबसे लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर है, क्योंकि इसका 12 किलोमीटर लंबा हिस्सा राजाजी नेशनल पार्क के पास बनाया गया है, जिसमें 340 मीटर लंबी सुरंग शामिल है।
कनेक्टिविटी के लिए 2 लिंक रोड बने

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दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे के पूरे रूट पर पड़ने वाले शहरों की कनेक्टिविटी के लिए 2 लिंक रोड भी बनाए गए हैं। एक 50.7 किलोमीटर यानी 31.5 मील लंबा लेन वाला सहारनपुर-रुड़की -हरिद्वार एक्सप्रेसवे बना है। दूसरा 121 किलोमीटर यानी 75 मील लंबा 6 लेन वाला अंबाला-शामली एक्सप्रेसवे बना है।