केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय में वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक करके ईबोला की रोकथाम, निगरानी और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम का जायजा लिया। केंद्रीय मंत्री नड्डा के निर्देश पर स्वास्थ्य सचिव ने विभिन्न मंत्रालयों और संबंधित एजेंसियों के अधिकारियों के साथ बैठक की। सभी एयरपोर्ट, बंदरगाह और बॉर्डर एंट्री पॉइंट पर स्क्रीनिंग और निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह अलर्ट मोड में रखने के निर्देश दिए गए।
ट्रैकिंग, टेस्टिंग और सर्विलांस एक्टिव रहेगा

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इंडियन काउंसिल ऑफ मेडिकल रिसर्च और नेशनल सेंटर फॉर डिजील कंट्रोल को ट्रैकिंग, टेस्टिंग और सर्विलांस सिस्टम हर समय एक्टिव रखने को कहा गया है। केंद्र सरकार ने साफ किया कि फिलहाल देश में ईबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन एहतियात के तौर पर बीमारी से निपटने की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। देश में इसके प्रसार को रोकने का हरसंभव प्रयास होगा।
WHO की ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी की घोषणा

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अफ्रीका के कुछ देशों में इबोला वायरस फैला है और यह लगातार जानलेवा बन रहा है। इसके मद्देनजर WHO यानी विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ग्लोबल हेल्थ इमरजेंसी लागू कर दी है। WHO की नोटिफिकेशन मिलने के बाद नागर विमानन महानिदेशालय (DGCA) ने भी सभी एयरपोर्ट के लिए SOP जारी करके गाइडलाइन्स लागू करके कोरोना जैसे प्रोटोकॉल फॉलो करने का निर्देश दिया है।
20 से ज्यादा एयरलाइंस के लिए आदेश

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SOP के अनुसार, युगांडा और कांगो के साथ प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संपर्क रखने वाली एयरलाइंस को निर्देश दिया गया है कि वे भारत में यात्रियों को उतारने से पहले स्व-घोषणा पत्र भरवाकर केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय तक पहुंचाएं। एअर इंडिया, इंडिगो, अकासा एयर, एमिरेट्स, एयर फ्रांस, एतिहाद एयरवेज और इजिप्टएयर कांगो से कनेक्ट हैं। वहीं युगांडा से कनेक्ट 17 एयरलाइंस की सूची में एअर इंडिया, इंडिगो और KLM शामिल हैं।
मास्क और पीपीई किट साथ लेकर चलें

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एयरलाइंस फ्लाइट में अनाउंस करेंगी कि अगर किसी यात्री को सफर के दौरान बुखार, कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द, सिरदर्द, गले में खराश, उल्टी, दस्त, चकत्ते, रक्तस्राव जैसे लक्षण दिखें तो वे तुरंत क्रू मेंबर्स को बताएं। ऐसी स्थिति में यात्री को विमान के पिछले हिस्से में भेजा जाएगा। पीड़ित यात्री के आगे और बगल वाली सीटें खाली कराई जाएंगी। एयरलाइंस को तीन फोल्ड वाले मास्क, एक बार इस्तेमाल किए जाने वाले दस्ताने, पीपीई किट, सैनिटाइजर भी फर्स्ट एड किट में रखना होगा।
युगांडा में इबोला से पहले भी मरे 11000 लोग

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बता दें कि अफ्रीकी देश युंगांडा में इबोला वायरस पहले भी फैल चुका है। साल 2000 में इबोला जानलेवा वायरस पहली बार फैला था। वहीं साल 2014-2016 में पश्चिम अफ्रीका में इबोला कहर बनकर टूटा था। उन 2 साल में इबोला की चपेट में आने से 11000 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। इबोला वायरस के बारे में सबसे पहले 1976 में पता चला था। उस समय इबोला नदी के पास दक्षिण सूडान और कांगो में एक साथ इसका प्रकोप फैला था, इसलिए इसका नाम इबोला रख दिया गया था।