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Bihar Madhubani: बिहार इन दिनों अपने नए मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को लेकर सुर्खियों में है, लेकिन सोशल मीडिया पर इन दिनों बिहार की ही एक महिला वकील की जमकर चर्चा हो रही है. जी हां, हम बात कर रहे हैं बिहार के मधुबनी की एक महिला वकील अनीता झा की, जिन्होंने 13 साल से अपनी कार को ही चैंबर बना रखा है.
क्या है कार को ऑफिस बनाने की वजह?

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सोशल मीडिया पर अनीता झा की कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं, जिनमें वो कार की पिछली सीट पर फाइलों के बंडल के साथ अपने काम-काज में व्यस्त हैं. ये हर किसी के लिए चौंकाने वाली बात है कि आखिर उन्होंने दूसरे वकीलों की तरह चैंबर क्यों नहीं लिया?
कार पार्किंग में ही चलाती हैं ऑफिस

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अनीता झा को जानने वाले बताते हैं कि वो कार पार्किंग में ही अपना काम करती हैं और क्लाइंट्स से मिलती हैं. 13 साल से लगातार उनकी यही दिनचर्या है. अनीता के लिए टाटा टियागो कार ही उनका ऑफिस है. अनीता जिला न्यायालय की पार्किंग में हर वर्किंग डे यही रूटीन फॉलो करती हैं.
कब से कब तक करती हैं काम?

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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक अनीता झा ने वर्किंग डेज पर सुबह 10 से 11 बजे से लेकर शाम 5 बजे तक कार पार्किंग में ही अपना सारा काम करती हैं. लेकिन कार को चैंबर बनाने की वजह क्या है? क्यों अनीता को नहीं मिला उनका चैंबर? आइए जानते हैं.
क्यों नहीं है कोई चैंबर?

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इंडियन एक्सप्रेस को दिए एक इंटरव्यू में अनीता झा ने अपना दर्द साझा शेयर करते हुए बताया था कि 28 वर्षों की वकालत के दौरान इतनी बड़ी अदालत में उन्हें या किसी अन्य महिला वकील को चैंबर नहीं मिला. अनीता ने ये भी बताया कि 2013 में अदालत परिसर निर्माण के दौरान महिला वकीलों ने एक अलग कक्ष बनाने की मांग की थी.
महिला वकीलों के लिए बना था चैंबर

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अनीता ने आगे बताया कि महिला वकीलों के लिए एक साझा स्थान बनाया गया था, जिसका उद्घाटन 13 साल पहले ही किया गया था. हालांकि कुछ दिनों के बाद चैंबर बोर्ड हटा दिया गया और उसके स्थान पर पुरुष वरिष्ठों के नाम लगा दिए गए.
कब से शुरू की कार में प्रेक्टिस?

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अनीता इस सवाल पर बताती है कि 2013 में फरवरी-मार्च के दौरान महाकुंभ में गंगास्नान के बीच उन्हें ये आइडिया आया. पहले उन्होंने मधुबनी छोड़ने पर विचार किया, लेकिन फिर खुद को समझाया कि भागना सही समाधान नहीं होगा. अगर सफल होना है तो उन्हें मधुबनी में ही रहकर कुछ अलग करना होगा.
कार में प्रैक्टिस ने ली विरोध की शक्ल

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अनीता ने जब अपनी कार में प्रैक्टिस शुरू की तो उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा. हालांकि बाद में उनका यही कदम विपरीत लिंग द्वारा किए जा रहे उत्पीड़न के खिलाफ एक विरोध बनकर उभरा. 13 साल बाद भी वो अपनी कार से ही ऑफिस का काम कर रही हैं.