Blue Aadhaar Card: आधार कार्ड को लेकर बड़ा फैसला, 30 सितंबर तक फ्री मिलेगी बच्चों की ID से जुड़ी ये सर्विस
भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने आधार कार्ड को लेकर बड़ा फैसला लिया है। आधार कार्ड को फ्री अपडेट कराने की तारीख बढ़ाई गई है और निर्देश दिया है कि आधार कार्ड को वैध बनाए रखने के लिए 30 सितंबर तक बायोमेट्रिक अपडेट करा लें।

UIDAI ने 5 से 17 साल तक के बच्चों के नीले आधार कार्ड को लेकर अपडेट दिया है, जिसके अनुसार मां-बाप अब 30 सितंबर 2026 तक बच्चों के आधार कार्ड का बायोमेट्रिक फ्री में अपडेट करा सकेंगे। इसके बाद अपडेट कराने के लिए फीस देनी पड़ेगी।
क्या है अनिवार्य बायोमेट्रिक अपडेट?
2 / 6दरअसल, बच्चों के बड़े होने के साथ-साथ उनकी उंगलियों के निशान, आंखों की पुतलियां और चेहरे की बनावट में बदलाव आता है। इसलिए उनके आधार कार्ड का बायोमेट्रिक अपडेट कराना जरूरी है, ताकि आधार कार्ड रिकॉर्ड सटीक रहे और आधार कार्ड भी वैलिड बना रहे।
क्यों जरूरी है बायोमेट्रिक अपडेट?
3 / 6बच्चों के आधार कार्ड का बायोमेट्रिक अपडेट कराने से कई फायदे होंगे। जैसे स्कूल, कॉलेजों और एजुकेशनल इंस्टीट्यूट में दाखिला आसानी से मिल जाएगा। प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए आवेदन करना संभव होगा। सरकारी योजनाओं का लाभ उठा सकेंगे। स्कॉलरशिप के लिए आवेदन कर सकेंगे। इंटर्नशिप और फेलोशिप कार्यक्रम के लिए अप्लाई कर सकेंगे।
कैसे अपडेट करें बायोमेट्रिक अपडेट?
4 / 6बच्चों के आधार कार्ड का बायोमेट्रिक अपडेट कराने के लिए बच्चों को लेकर आधार सेवा केंद्र या आधार नामांकन केंद्र पर जाएं। वहां एक फॉर्म भरकर बच्चे के उंगलियों के निशान दें। आंखों की पुतली स्कैन कराएं और फोटो क्लिक कराएं। प्रक्रिया पूरी होने के बाद 7 से 15 दिन में नया आधार कार्ड आपके घर के पते पर पहुंच जाएगा।
माता-पिता का बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन
5 / 6UIDAI के नियमों के अनुसार, अब 5 साल से कम उम्र के बच्चों का आधार कार्ड उसके माता-पिता के आधार कार्ड के आधार पर ही बनाया जाएगा। वहीं अब बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन भी अनिवार्य है, यानी अब बच्चे का आधार कार्ड बनवाते समय माता-पिता में से किसी एक का बायोमेट्रिक ऑथेटिकेशन और KYC के साथ OTP वेरिफिकेशन जरूरी होगा।
बच्चे से संबंध का प्रमाण भी देना होगा
6 / 6UIDAI के नियमों के अनुसार, माता-पिता को बच्चे के जन्म की तारीख और परिवार के साथ उसके संबंध का प्रूफ देना होगा। क्योंकि छोटे बच्चों के फिंगरप्रिंट या आईरिस स्कैन नहीं लिए जा सकते, इसलिए उनके माता-पिता में से किसी एक की उंगलियों के निशान लेकर या आंखों के आइरिस को स्कैन करके बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन को पूरा किया जाएगा।



















