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केंद्र सरकार ने आधार ऐप को लेकर दिए मोबाइल कंपनियों को दिया प्रस्ताव वापस ले लिया है। UIDAI की इच्छा थी कि भारत में बिकने वाले सभी स्मार्टफोन में आधार ऐप को अनिवार्य करना चाहिए। इसके लिए UIDAI ने केंद्रीय मंत्रालय से बात की और मंत्रालय ने मोबाइल मैन्युफैक्चरर से बात की, जिसके बाद प्रस्ताव वापस ले लिया गया।
UIDAI की IT मिनिस्ट्री से सिफारिश

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बता दें कि साल 2026 की शुरुआत में भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) ने IT मंत्रालय से सिफारिश की कि वे स्मार्टफोन निर्माता कंपनियों जैसे एपल, गूगल और सैमसंग से बात करें। वे अपने स्मार्टफोन की मैंडेट ऐप्स की लिस्ट में आधार ऐप को भी एड कर दें, ताकि हर भारतीय तक ऐप की पहुंच संभव हो सके।
सरकार ने वापस क्यों लिया प्रस्ताव?

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IT मंत्रालय ने प्रस्ताव का रिव्यू करने के बाद उससे पीछे हटने का फैसला किया। हालांकि UIDAI ने फैसले से पीछे हटने की वजह नहीं बताई, लेकिन रिपोर्ट के अनुसार, केंद्रीय मंत्रालय की ओर से इस पर कोई रिएक्शन नहीं दिया गया। मंत्रालय ने यह फैसला इलेक्ट्रोनिक्स और स्मार्टफोन मैन्युफैक्चर कंपनियों से बातचीत के बाद लिया है।
कंपनियों ने क्यों किया प्रस्ताव का विरोध

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बता दें कि केंद्र सरकार ने 2 साल में 6 बार स्मार्टफोन में सरकारी ऐप्स को प्री-इंस्टॉल करने का प्रस्ताव कंपनियों को दिया और हर बार कंपनियों ने प्रस्ताव का इसका विरोध किया। कंपनिया यूजर प्राइवेसी, डिवाइस सिक्योरिटी और कंपैटिबिलिटी को लेकर सवाल खड़े करती हैं। उत्पादन लागत बढ़ने का हवाला भी देती हैं।
आधार कार्ड क्या है?

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बता दें कि आधार कार्ड फिंगरप्रिंट और आईरिस स्कैन से जुड़ा 12 अंकों का डिजिटल ID नंबर है। जिसे 1.34 अरब से ज्यादा लोग इस्तेमाल करते हैं। इससे बैंकिंग, टेलीकॉम वेरिफिकेशन और एयरपोर्ट एंट्री जैसी सेवाओं का लाभ उठाया जा सकता है।