Kidney Disease Early Detection: किडनी की बीमारी पनपने लगती है तो शुरुआती लक्षण स्पष्ट नहीं होते हैं ऐसे में बहुत से लोग वक्त रहते किडनी खराब होने के चेतावनी संकेत नहीं पहचान पाते और जबतक डॉक्टर से जांच करवाई जाती है तबतक किडनी की बीमारी कई हद तक बढ़ चुकी होती है. ऐसे में किडनी से जुड़ी छोटी-मोटी दिक्कतों को भी इग्नोर नहीं करना चाहिए. यहां ऐसे ही कुछ टेस्ट (Kidney Test) बताए जा रहे हैं जो किडनी की बीमारी को कंफर्म कर सकते हैं.
क्रिएटनिन ब्लड टेस्ट और eGFR

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क्रिएटिनिन एक वेस्ट प्रोडक्ट है जिसे किडनी शरीर बाहर निकालती है. इसकी शरीर में कितनी मात्रा है इसके आधार पर डॉक्टर किडनी के काम को जांचते हैं. इसके साथ ही eGFR (Estimated Glomerular Filtration Rate) किया जाता है जिससे पता चलता है कि किडनी खून को कितनी अच्छी तरह फिल्टर कर रहा है.
सिस्टैनिन-सी टेस्ट

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सिस्टैनिन-सी एक प्रोटीन है जो शरीर की कोशिकाओं द्वारा बनाया जाता है. अगर किडनी ठीक तरह काम नहीं करती है तो सिस्टैनिन-सी लेवल्स बढ़ जाते हैं.
यूरिन डिपस्टिक टेस्ट

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यह यूरिन टेस्ट है जिसमें पेशाब में प्रोटीन खून और अन्य तत्वों की जांच की जाती है. अगर खून में प्रोटीन पाया जाता है तो यह किडनी की दिक्कतों का लक्षण हो सकता है.
यूरिन प्रोटीन-टू क्रिएटिनिन रेशियो

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यूरिन प्रोटीन-टू क्रिएटिनिन रेशियो याानी UPCR टेस्ट तब किया जाता है जब डिपस्टिक टेस्ट में कोई गड़बड़ी होती है तो इस टेस्ट को किया जाता है. ये टेस्ट पेशाब में प्रोटीन की लीकेज को बताता है.
अल्ट्रासाउंड

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अल्ट्रासाउंड करवाने पर किडनी के स्ट्रक्चर, किडनी में आने वाली कोई किसी रुकावट और किसी तरह के इंफेक्शन का पता चलता है.