बच्चों में UTI की वजह बन सकती हैं टॉयलेट जाने से जुड़ी ये 5 गलतियां, पेशाब रोकना भी बन सकता है कारण

UTI In Children: बच्चों में बड़ों की ही तरह मूत्राशय का इंफेक्शन हो सकता है. ऐसे में यहां जानिए बच्चों की टॉयलेट हैबिट्स किस तरह यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन की वजह बन सकती है.

Toilet Habits That Can Increase The Risk Of UTIs
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Toilet Habits That Can Increase The Risk Of UTIs

UTI Causes In Children: बच्चों में बैक्टीरियल इंफेक्शन में सबसे सामान्य है यूरिनरी ट्रैक्ट इंफेक्शन यानी UTI. मू्त्राशय का इंफेक्शन किसी भी उम्र में हो सकता है. खासकर छोटे बच्चे जिन्हें टॉयलेट ठीक तरह से यूज करना नहीं आता है या टॉयलेट की सही-गलत हैबिट्स के बारे में नहीं पता होता है उन्हें यूटीआई हो सकता है. यूटीआई बच्चा के मूत्राशय, मूत्रनली और किडनी को भी प्रभावित कर सकता है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि बच्चों की कौन सी गलतियां यूटीआई की वजह बन सकती हैं.

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पेशाब रोककर रखना

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बहुत से बच्चे स्कूल या ट्यूशन में देर तक पेशाब रोककर बैठे रहते हैं. पेशाब रोककर रखने से बैक्टीरिया को पनपने का समय मिल जाता है, इससे बाद ब्लैडर पूरी तरह से खाली नहीं हो पाता है और बार-बार इंफेक्शंस हो सकते हैं. ऐसे में बच्चों को बताना जरूरी है कि वे हर 2 से 3 घंटे में पेशाब करने जाएं.

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एकबार में ठीक से पेशाब ना करना

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बच्चे अक्सर ही खेल के बीच पूरी तरह पेशाब नहीं करते और हर थोड़ी देर में टॉयलेट भागने लगते हैं. इससे बैक्टीरिया पनप सकते हैं और यूटीआई हो सकता है.

टॉयलेट में गलत पोश्चर

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अगर बच्चा टॉयलेट सीट पर सही तरह से नहीं बैठता है तो इससे ब्लैडर रिलैक्स नहीं हो पाता और खाली नहीं होता. इसीलिए स्टूल पैर के नीचे रखकर बच्चे को टॉयलेट पर बैठना सिखाएं. इससे ब्लैडर पर जोर भी नहीं पड़ता है.

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ठीक से त्वचा साफ ना करना

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अक्सर ही बच्चे फ्रेश होने के बाद टिशू से सामने से पीछे की तरफ नहीं बल्कि पीछे से सामने की तरफ त्वचा साफ करने लगते हैं. इससे मल में मौजूद बैक्टीरिया यूरिनरी ट्रैक्ट तक जा सकते हैं और इंफेक्शन हो सकता है. बच्चों को सिखाएं कि फ्रेश होने के बाद त्वचा को आगे से पीछे की तरफ साफ किया जाता है.

हाइड्रेशन का ध्यान ना रखना

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पानी की कमी से भी मूत्राशय का इंफेक्शन हो सकता है. बच्चे अगर पानी पर्याप्त मात्रा में नहीं पीते हैं और कॉफी या चाय पीते हैं शरीर में पानी की कमी होने लगती है. इससे यूरिनरी ट्रैक्ट बैक्टीरिया को पानी की कमी से शरीर से बाहर नहीं निकाल पाता है.

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बच्चों में यूटीआई के लक्षण कैसे दिखते हैं

बच्चों में यूटीआई के लक्षण कैसे दिखते हैं 7 / 7

बच्चों में यूरिन इंफेक्शन होने पर पेशाब करते हुए जलन की दिक्कत होने लगती है, पेशाब बार-बार आने लगता है, बुखार आ जाता है, पेट में दर्द होता है, उल्टी आ सकती है, बिस्तर गीला करने की दिक्कत हो सकती है और बच्चे इरिटेटेड रहने लगते हैं. यह भी पढ़ें - घुटने में दर्द होता है तो जरूर करें ये 3 एक्सरसाइज, हड्डियों के डॉक्टर ने कहा 5 से 10 मिनट ही काफी होंगे अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है.

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लेखक के बारे में

Seema Thakur

Seema Thakur

सीमा ठाकुर पत्रकारिता से पिछले 7 सालों से जुड़ी हैं. न्यूज24 में सीमा बतौर चीफ सब एडिटर काम कर रही हैं. सीमा हेल्थ और लाइफस्टाइल बीट पर लिखती हैं और कॉन्टेन्ट क्रिएशन के साथ ही टीम लीड की भूमिका भी निभा रही हैं. न्यूज24 में सीमा ने अपनी बीट से हटकर इलेक्शंस की स्टोरीज पर भी काम किया है. हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़ी स्टडीज, लेटेस्ट न्यूज और एक्सपर्ट्स/डॉक्टर्स से बातचीत पर आधारित लेख लिखने में सीमा की मजबूत पकड़ है. सीमा हेल्थ की खबरों और लेटेस्ट अपडेट के लिए AIIMS, ICMR, WHO,  स्वास्थ्य मंत्रालय जैसे संस्थानों के विशेषज्ञों और डॉक्टरों के संपर्क में रहती हैं. अनुभव सीमा ने पत्रकारिता की शुरुआत दिल्ली प्रेस ग्रुप से की थी जहां वे सरिता, मुक्ता और गृहशोभा मैग्जीन में वुमेन ओरिएंटेड, सोशल, लाइफस्टाइल, हेल्थ और बॉलीवुड के अलावा पॉलिटकल आर्टिकल्स लिखती थीं. सीमा को प्रूफरीडिंग और एडिटिंग का भी खासा अनुभव है. प्रिंट में काम करने के दौरान सीमा की हिंदी भाषा में अच्छी पकड़ है. दिल्ली प्रेस के बाद सीमा डायमंड पब्लिशिंग हाउस से जुड़ी थीं जहां उन्होंने मैग्जीन और वेबसाइट दोनों के लिए काम किया. डायमंड पब्लिशिंग हाउस के बाद सीमा ने NDTV के साथ डिजिटल मीडिया में अपना करियर शुरू किया. NDTV में सीमा ने राइटर के साथ ही वीडियो प्रोड्यूसर, एंकर और पॉडकास्टर के तौर पर भी काम किया. लाइफस्टाइल वीडियोज और बॉलीवुड गोल्ड सीरीज को प्रोड्यूस और एंकर करने के साथ ही वे बॉलीवुड पॉडकास्ट किया करती थीं. वीडियो प्रोडक्शन में सीमा का इंटरेस्ट और पकड़ यहीं से आई है. शिक्षा सीमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दीन दयाल उपाध्याय कॉलेज से बी.ए किया है. इसके बाद जामिया मिलिया इस्लामिया से हिंदी पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा किया. जामिया की पीजी डिप्लोमा इन जर्नलिज्म डिपार्टमेंट की मैग्जीन में सीमा स्टूडेंट एडिटर और अपने बैच की कॉन्टेंट हेड रह चुकी हैं.
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