Virat Kohli Impostor Syndrome: विराट कोहली ने कई इंटरव्यू में बताया है कि कभी-कभी उन्हें भी खुद पर शक होता था. दुनिया के सबसे सफल खिलाड़ियों में गिने जाने के बावजूद अगर कोई इंसान अपनी सफलता को लेकर खुद से सवाल करे या विश्वास ना करे तो परेशानी थोड़ी ज्यादा बढ़ जाती है. हालांकि, आज के वक्त ऐसा होना बहुत ही नॉर्मल हो गया है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक, जीवन में कभी न कभी करीब 70% लोग इस मानसिक स्थिति को महसूस करते हैं. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि आखिर यह बीमारी कौन-सी है और इसके शुरुआती संकेत क्या हैं.
तारीफ स्वीकार न कर पाना

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जब कोई आपकी तारीफ करे और आपको लगे कि सामने वाला सिर्फ औपचारिकता निभा रहा है तो यह भी एक लक्षण है. यह दिमाग के बीमार होने का संकेत है.
हमेशा परफेक्ट बनने का दबाव करना

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इंपोस्टर सिंड्रोम वाले लोग अक्सर खुद से अवास्तविक उम्मीदें रखते हैं. उन्हें लगता है कि गलती करना मतलब असफल होना है और पूरे दिन जरूरत से ज्यादा सोचते हैं.
दूसरों से लगातार तुलना करना

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सोशल मीडिया के दौर में यह समस्या तेजी से बढ़ी है. दूसरों की सफलता देखकर खुद को कमतर समझना मानसिक तनाव बढ़ सकता है. इसलिए अगर आपको कोई ऐसा लक्षण नजर आए तो इसे बिल्कुल भी नजरअंदाज ना करें.
किन लोगों में ज्यादा देखा जाता है ये सिंड्रोम?

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हाई अचीवर्स और टॉप परफॉर्मेंस वाले लोगों को ऐसा होने की संभावना रहती है. हालांकि, इंपोस्टर सिंड्रोम सिर्फ सोच तक सीमित नहीं रहता, बल्कि लंबे समय तक यह समस्या बनी रहे और लोग परेशान रहते हैं.
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