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Polio Symptoms: पोलियोमाइलाइटिस को आम भाषा में पोलियो कहा जाता है. यह पोलियोवायरस (Poliovirus) की चपेट में आने से होने वाली बीमारी है जो मुख्यतौर पर बच्चों को अपना शिकार बनाती है. पोलियो से सबसे ज्यादा 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चे प्रभावित होते हैं. पोलियावायरस रीढ़ की हड्डी या दिमाग की तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचाता है जिससे शरीर के किसी हिस्से को लकवा मार सकता है. ऐसे में यहां जानिए पोलियो के लक्षण (Polio Ke Lakshan) कैसे दिखते हैं और पोलियो से बचने के लिए क्या किया जा सकता है.
पोलियो के शुरुआती लक्षण

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पोलियोवायरस के संक्रमण में आने के 72 से 100 दिनों के भीतर इसके लक्षण नजर नहीं आते हैं. जब लक्षण दिखने शुरू होते हैं तो 4 में से एक मरीज को गले में खराश, बुखार, थकान, जी मितलाना, पेट दर्द और सिर दर्द जैसे लक्षण दिखते हैं.
पैरों में महसूस होती है झनझनाहट

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पोलियो के एडवांस्ड लक्षणों में पैरों में में झनझनाहट महसूस होना शामिल है. इसके अलावा दिमाग और रीढ़ की हड्डी के पास की मेंब्रेन में इंफेक्शन हो सकता है.
गंभीर लकवा होना

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100 में से 2 या 10 लोगों को लकवा मार सकता है. इसमें हाथ या पैर या फिर दोनों में लकवा हो सकता है और ये अंग काम करना बंद कर देते हैं. लकवे के शिकार हुए लोगों में 5 से 10 प्रतिशत लोगों में मृत्यु का खतरा भी रहता है क्योंकि पोलियोवायरस सांस लेने वाली मसल्स को भी प्रभावित कर सकता है.
लकवा ही पोलियो कहा जाता है

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पोलियोवारस का शिकार होने पर जब शरीर में लकवा लग जाता है तो उसे ही पोलियो कहते हैं.
कैसे फैलता है पोलियोवायरस

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पोलियोवायरस तेजी से फैलने वाला वायरस है जो संक्रमित व्यक्ति के मल या खांसी और छींक से निकले द्रव के संपर्क में आने से व्यक्ति को अपनी चपेट में ले सकता है.
पोलियो से कैसे बचा जा सकता है

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पोलियो से बचने का एकमात्र तरीका है बचपन में ही इनएक्टिविटेड पोलियोवायरस वैक्सीन (IPV) लगवाना और ओरल पोलियोवारस वैक्सीन (OPV) लेना जो बच्चे को पिलाई जाती है.
माता-पिता जान लें ये बातें

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यूनिसेफ और विश्व स्वास्थ्य संगठन की माता-पिता को यह सलाह है कि वे बच्चे को उम्र के हिसाब से सभी टीके लगवाएं और पोलियो की सभी डोज समय पर दें जिससे बच्चे को पोलियो होने का खतरा ना रहे.