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कैंसर सिर्फ बड़े उम्र के लोगों को हो, ऐसा जरूरी नहीं है. कई मामलों में देखा गया है कि कम उम्र के बच्चे भी कैंसर का शिकार हो जाते हैं, जिस कारण बड़ी संख्या में बच्चों की इस बीमारी से मौत हो जाती है. आइए जानते हैं बच्चों में किस कैंसर का सबसे ज्यादा खतरा रहता है?
बच्चों में कैंसर क्यों बन रहा गंभीर खतरा?

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रिपोर्टों के अनुसार बच्चों में कैंसर तेजी से चिंता का विषय बन रहा है, भारत में भी हर साल हजारों बच्चों की जान इस बीमारी से जाती है, इसलिए समय पर पहचान बेहद जरूरी है. रिपोर्ट बताते हैं कि, भारत में 5 से 19 साल के बच्चों और युवाओं की मौत के 10 बड़े कारणों में कैंसर भी शामिल है.
दुनियाभर में क्या है स्थिति?

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वैश्विक आंकड़े बताते हैं कि हर साल लाखों बच्चों से जुड़े कैंसरों के नए मामले सामने आते हैं और बड़ी संख्या में बच्चों की मृत्यु होती है. इसका कारण ठीक से इलाज न मिल पाने या देरी है, इसलिए इस बीमारी को जरा सा भी हल्के में लेना खतरनाक हो सकता है.
बच्चों में कैंसर क्यों होता है?

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विशेषज्ञों के अनुसार बच्चों में कैंसर का मुख्य कारण जीन में बदलाव माना जाता है. कुछ बदलाव जन्म से होते हैं, जबकि कुछ गर्भावस्था के दौरान असर डाल सकते हैं.
कौन-कौन से कैंसर बच्चों में ज्यादा देखे जाते हैं?

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बच्चों में सबसे ज्यादा ब्लड कैंसर देखा जाता है. इसके अलावा ब्रेन ट्यूमर, लिम्फोमा और शरीर में गांठ बनने वाले कुछ अन्य कैंसर भी बच्चों में पाए जाते हैं.
किन संकेतों को नजरअंदाज न करें?

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अगर बच्चे को बार-बार बुखार आए, कमजोरी रहे, पेट दर्द हो, सिरदर्द बना रहे या गर्दन में गांठ महसूस हो, तो तुरंत जांच करानी चाहिए. क्योंकि कई बार माता-पिता आम समस्या समझकर इन्हें नजरअंदाज कर देते हैं, जो धीरे-धीरे आखिरी स्टेज पर पहुंच जाती है.
शरीर पर दिखने वाले खास लक्षण क्या हैं?

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शरीर पर नीले धब्बे, मसूड़ों में सूजन, आंखों की रोशनी कम होना, वजन घटना या बच्चा बहुत सुस्त दिखे, तो यह चेतावनी संकेत हो सकते हैं.
बच्चों में कैंसर का इलाज कैसे होता है?

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कैंसर के प्रकार के अनुसार कीमोथेरेपी, सर्जरी, रेडियोथेरेपी या इनका मिश्रण किया जाता है. सही समय पर इलाज मिलने से बच्चे की ठीक होने की संभावना काफी बढ़ जाती है, लेकिन देरी उसकी जिंदगी को मौत के करीब ले जा सकती है.
क्या बच्चा फिर सामान्य जीवन जी सकता है?

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अगर समय पर इलाज पूरा हो जाए, तो कई बच्चे स्कूल जा सकते हैं, खेल सकते हैं और सामान्य जीवन जी सकते हैं. लेकिन जरूरी है समय पर पहचान और इलाज.
अस्वीकरण – इस खबर को सामान्य जानकारी के तौर पर लिखा गया है. अधिक जानकारी के लिए विशेषज्ञ की सलाह लें या चिकित्सक से परामर्श करें. न्यूज 24 किसी तरह का दावा नहीं करता है. (Images: Pexels/AI)