पुराने लोगों की लाइफस्टाइल और खानपान कितना अच्छा था. लोग एक उम्र के बाद बूढ़े होते थे और सालों तक जीते थे. मगर अब इंसान वक्त से पहले बूढ़ा हो रहा है और बहुत कम उम्र में ही बीमारियों से घिर जाता है. 40 साल की उम्र में ही चेहरे पर गहरी झुर्रियां, ढीली स्किन, सफेद बाल या लगातार थकान जैसे लक्षण दिखने लगें और अगर ध्यान ना किया जाए तो परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है. ऐसे में दिमाग में सवाल आना जरूरी है कि आखिर आज की जनरेशन वक्त से पहले क्यों बूढ़ी हो रही है.
प्रीमेच्योर एजिंग क्या है?

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जब शरीर और स्किन में उम्र बढ़ने के लक्षण समय से पहले दिखाई देने लगते हैं तो इसे प्रीमेच्योर एजिंग कहा जाता है. इसमें स्किन की लोच कम होने लगती है और शरीर काफी हद तक इफेक्ट होता है.
सिस्टमैटिक एजिंग का लेवल बढ़ना

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रिसर्च में बताया गया है कि 1965 से 1974 के बीच पैदा हुए लोगों में सिस्टमैटिक एजिंग का लेवल उससे पहले के लोगों से 23 प्रतिशत बढ़ा हुआ था. वहीं 1990 के दशक में पैदा हुए लोगों का खतरनाक लेवल मिला.
कैंसर और बुढ़ापे का रिलेशन

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स्टडी में यह साफ हुआ है कि बायोलॉजिकल एज और कैंसर का गहरा रिश्ता है. जब हमारे शरीर के सेल्स वक्त से पहले बूढ़ी हो जाती हैं तो उनमें डीएनए डैमेज होने लगते हैं. इससे कैंसर बनने का खतरा दोगुना बढ़ जाता है.