Premature Aging: उम्र से पहले बूढ़ा होने के पीछे क्या हैं कारण? ऐसे रखें खुद को जवान

Biological Aging: आजकल के लोग ज्यादा जल्दी बूढ़े पड़ रहे हैं. एक रिसर्च में बताया गया है कि खराब लाइफस्टाइल की वजह से एजिंग प्रोसेस धीमा हो रहा है और कई तरह की परेशानियां पैदा हो रही है.  

Biological Age
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समय से पहले बुढ़ापा होना- Image Credit- News24

पुराने लोगों की लाइफस्टाइल और खानपान कितना अच्छा था. लोग एक उम्र के बाद बूढ़े होते थे और सालों तक जीते थे. मगर अब इंसान वक्त से पहले बूढ़ा हो रहा है और बहुत कम उम्र में ही बीमारियों से घिर जाता है. 40 साल की उम्र में ही चेहरे पर गहरी झुर्रियां, ढीली स्किन, सफेद बाल या लगातार थकान जैसे लक्षण दिखने लगें और अगर ध्यान ना किया जाए तो परेशानी ज्यादा बढ़ जाती है. ऐसे में दिमाग में सवाल आना जरूरी है कि आखिर आज की जनरेशन वक्त से पहले क्यों बूढ़ी हो रही है.  

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प्रीमेच्योर एजिंग है एक वजह

प्रीमेच्योर एजिंग है एक वजह 2 / 6

वाशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन की इस स्टडी में पाया गया है कि आज की जनरेशन में बायोलॉजिकल एजिंग का लेवल पहले के मुकाबले कहीं ज्यादा है. यह सिर्फ बढ़ती उम्र की वजह से नहीं, बल्कि हमारी लाइफस्टाइल से भी जुड़ी हुई होती है. इसे भी पढ़ें- हिमाचल की वो 5 खूबसूरत जगह जहां दिल्ली से 5000 के बजट में घूम सकते हैं आप, वीकेंड में बना लें प्लान

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प्रीमेच्योर एजिंग क्या है?

प्रीमेच्योर एजिंग क्या है?3 / 6

जब शरीर और स्किन में उम्र बढ़ने के लक्षण समय से पहले दिखाई देने लगते हैं तो इसे प्रीमेच्योर एजिंग कहा जाता है. इसमें स्किन की लोच कम होने लगती है और शरीर काफी हद तक इफेक्ट होता है.

सिस्टमैटिक एजिंग का लेवल बढ़ना

सिस्टमैटिक एजिंग का लेवल बढ़ना 4 / 6

रिसर्च में बताया गया है कि 1965 से 1974 के बीच पैदा हुए लोगों में सिस्टमैटिक एजिंग का लेवल उससे पहले के लोगों से 23 प्रतिशत बढ़ा हुआ था. वहीं 1990 के दशक में पैदा हुए लोगों का खतरनाक लेवल मिला.

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कैंसर और बुढ़ापे का रिलेशन

कैंसर और बुढ़ापे का रिलेशन 5 / 6

स्टडी में यह साफ हुआ है कि बायोलॉजिकल एज और कैंसर का गहरा रिश्ता है. जब हमारे शरीर के सेल्स वक्त से पहले बूढ़ी हो जाती हैं तो उनमें डीएनए डैमेज होने लगते हैं. इससे कैंसर बनने का खतरा दोगुना बढ़ जाता है.

कैसे एजिंग को कम किया जा सकता है?

कैसे एजिंग को कम किया जा सकता है? 6 / 6

आपको घबराने की जरूरत नहीं है, क्योंकि बायोलॉजिकल क्लॉक को कम किया जा सकता है. बस आपको अपनी जिंदगी में छोटे-मोटे बदलाव करने होंगे. हेल्दी डाइट, पूरी नींद और स्मोकिंग से दूरी बनाने के बारे में सोचना होगा. इसे भी पढ़ें- पानी की बोतल को कैसे ठंडा रखें? सोनम वांगचुक ने भूख हड़ताल के बीच सिखाया साइंस

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लेखक के बारे में

Shadma Muskan

Shadma Muskan

शादमा मुस्कान न्यूज 24 डिजिटल में सीनियर सब एडिटर हैं और हेल्थ व लाइफस्टाइल बीट कवर करती हैं. शादमा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के डॉ. भीमराव अंबेडकर कॉलेज से BJMC और दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस से पीजी डिप्लोमा किया है. उन्होंने गुरु जम्भेश्वर विश्वविद्यालय, हिसार से MJMC की पढ़ाई भी की है. शादमा को पत्रकारिता के क्षेत्र में 5 साल से ज्यादा का अनुभव है. शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका और हरिभूमि में इंटर्नशिप से की. इसके बाद, उन्होंने जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट हरज़िंदगी के साथ 4 साल से अधिक समय तक काम किया, जहां उन्होंने हेल्थ और लाइफस्टाइल से जुड़े विषयों पर लेखन किया. इस दौरान उन्होंने ब्यूटी, फैशन, फूड, होम रेमेडीज, गार्डनिंग, होम डेकोर और पेरेंटिंग जैसे विषयों पर भी काम किया. इस अनुभव के दौरान शादमा ने अलग-अलग क्षेत्रों के कई विशेषज्ञों के साथ काम किया है. एक्सपर्ट ओपीनियन के आधार पर वह रीडर्स तक सटीक और आसान शब्दों में चीजों को पहुंचाने का काम कर रही हैं. कुल अनुभव - 5 साल पिछला अनुभव- शादमा ने अपने करियर की शुरुआत राजस्थान पत्रिका से की. इसके बाद तहजीब टीवी, हरिभूमि और जागरण न्यू मीडिया की वेबसाइट के साथ चार साल तक हेल्थ और लाइफस्टाइल पर लिखा. किस क्षेत्र में महारत शादमा मुस्कान को लाइफस्टाइल, ट्रैवल, फूड और हेल्थ से जुड़े विषयों के बारे में काफी अच्छी जानकारी है. इसके अलावा शादमा को फूड रिव्यू, किचन गाइड, फैशन टिप्स, शॉपिंग गाइड, ब्यूटी, रिलेशनशिप और इंटीरियर पर वह विशेषज्ञों से बातचीत के आधार पर लिखती हैं.
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