भारत में बैन है बिना अनुमति इस फोन का इस्तेमाल, नियम तोड़ने पर सीधे होगी जेल!

साधारण दिखने वाला एक फोन बिना अनुमति के इस्तेमाल करने पर भारत में आपको सीधे जेल तक पहुंचा सकता है. बिना परमिशन अगर यह डिवाइस आपके पास मिला, तो कानून के तहत कड़ी कार्रवाई तय है. जानते हैं ये कौन-सा फोन है और इसके क्या नियम हैं.

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क्या भारत में सैटेलाइट फोन पूरी तरह बैन हैं?

क्या भारत में सैटेलाइट फोन पूरी तरह बैन हैं?2 / 7

भारत में सैटेलाइट फोन पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं हैं, लेकिन इन्हें खुली छूट भी नहीं दी गई है. यह एक नियंत्रित संचार प्रणाली है, जिसे केवल विशेष परिस्थितियों और अनुमति के साथ ही इस्तेमाल किया जा सकता है. सामान्य मोबाइल फोन जहां नेटवर्क टावर से जुड़ते हैं, वहीं सैटेलाइट फोन सीधे स्पेस में मौजूद सैटेलाइट से कनेक्ट होते हैं. यही वजह है कि ये दूर-दराज के इलाकों में भी काम करते हैं, जहां नेटवर्क नहीं होता. 

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सरकार ने क्यों बनाए सख्त नियम?

सरकार ने क्यों बनाए सख्त नियम?3 / 7

सैटेलाइट फोन के सिग्नल को ट्रैक करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए आसान नहीं होता. इसी वजह से सरकार इन पर कड़ी नजर रखती है. बिना अनुमति इनका इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है. (Image for reference only)

बिना परमिशन इस्तेमाल करने पर क्या सजा

बिना परमिशन इस्तेमाल करने पर क्या सजा4 / 7

अगर कोई व्यक्ति बिना दूरसंचार विभाग (DoT) की अनुमति के सैटेलाइट फोन रखता या इस्तेमाल करता है, तो यह भारतीय वायरलेस टेलीग्राफ अधिनियम का उल्लंघन माना जाता है. इस स्थिति में गिरफ्तारी और सजा दोनों हो सकती हैं. नियमों का उल्लंघन करने पर 3 साल तक की कैद या 2 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं नियम तोड़ने वाले व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता है. (Image for reference only)

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किन लोगों को मिलती है इसकी अनुमति?

किन लोगों को मिलती है इसकी अनुमति?5 / 7

भारत में सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से सेना, अर्धसैनिक बल और BSF जैसी एजेंसियां करती हैं. इसके अलावा NDRF जैसी टीमें, जो आपदा के समय काम करती हैं, उन्हें भी इसकी अनुमति मिलती है क्योंकि उनके लिए यह जरूरी उपकरण होता है. (Image for reference only)

ये सैटेलाइट फोन है प्रतिबंधित

ये सैटेलाइट फोन है प्रतिबंधित6 / 7

Thuraya और Iridium जैसे विदेशी सैटेलाइट फोन भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित हैं. इनका डेटा इतना एन्क्रिप्टेड होता है कि भारतीय एजेंसियां इन्हें आसानी से ट्रैक नहीं कर पातीं, इसलिए इन्हें सुरक्षा के लिहाज से जोखिम माना जाता है. (Image for reference only)

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किसे मिल सकती है खास इजाजत?

किसे मिल सकती है खास इजाजत?7 / 7

कुछ खास मामलों में जैसे वैज्ञानिक रिसर्च, कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट या पर्वतारोहण अभियानों के लिए सैटेलाइट फोन की अनुमति मिल सकती है. इसके लिए दूरसंचार विभाग से NOC लेना जरूरी होता है और यह प्रक्रिया काफी लंबी और सख्त होती है. (Image for reference only)

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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