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दिखने में बिल्कुल सामान्य मोबाइल जैसे लगने वाले सैटेलाइट फोन भारत में आपके लिए बड़ी मुसीबत बन सकते हैं. देश में इन डिवाइसेज को रखना और इस्तेमाल करना सख्त नियमों के दायरे में आता है, और बिना अनुमति अगर ये आपके पास मिल जाएं तो सीधा मामला जेल तक पहुंच सकता है. हाल ही में श्रीनगर एयरपोर्ट पर एक विदेशी नागरिक की गिरफ्तारी के बाद यह मुद्दा फिर चर्चा में है, इसलिए जानना जरूरी है कि आखिर भारत में सैटेलाइट फोन को लेकर कानून इतना सख्त क्यों है.
क्या भारत में सैटेलाइट फोन पूरी तरह बैन हैं?

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भारत में सैटेलाइट फोन पूरी तरह प्रतिबंधित नहीं हैं, लेकिन इन्हें खुली छूट भी नहीं दी गई है. यह एक नियंत्रित संचार प्रणाली है, जिसे केवल विशेष परिस्थितियों और अनुमति के साथ ही इस्तेमाल किया जा सकता है. सामान्य मोबाइल फोन जहां नेटवर्क टावर से जुड़ते हैं, वहीं सैटेलाइट फोन सीधे स्पेस में मौजूद सैटेलाइट से कनेक्ट होते हैं. यही वजह है कि ये दूर-दराज के इलाकों में भी काम करते हैं, जहां नेटवर्क नहीं होता.
सरकार ने क्यों बनाए सख्त नियम?

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सैटेलाइट फोन के सिग्नल को ट्रैक करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए आसान नहीं होता. इसी वजह से सरकार इन पर कड़ी नजर रखती है. बिना अनुमति इनका इस्तेमाल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा माना जाता है. (Image for reference only)
बिना परमिशन इस्तेमाल करने पर क्या सजा

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अगर कोई व्यक्ति बिना दूरसंचार विभाग (DoT) की अनुमति के सैटेलाइट फोन रखता या इस्तेमाल करता है, तो यह भारतीय वायरलेस टेलीग्राफ अधिनियम का उल्लंघन माना जाता है. इस स्थिति में गिरफ्तारी और सजा दोनों हो सकती हैं. नियमों का उल्लंघन करने पर 3 साल तक की कैद या 2 करोड़ तक का जुर्माना लगाया जा सकता है. वहीं नियम तोड़ने वाले व्यक्ति को तुरंत गिरफ्तार किया जा सकता है. (Image for reference only)
किन लोगों को मिलती है इसकी अनुमति?

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भारत में सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल मुख्य रूप से सेना, अर्धसैनिक बल और BSF जैसी एजेंसियां करती हैं. इसके अलावा NDRF जैसी टीमें, जो आपदा के समय काम करती हैं, उन्हें भी इसकी अनुमति मिलती है क्योंकि उनके लिए यह जरूरी उपकरण होता है. (Image for reference only)
ये सैटेलाइट फोन है प्रतिबंधित

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Thuraya और Iridium जैसे विदेशी सैटेलाइट फोन भारत में पूरी तरह प्रतिबंधित हैं. इनका डेटा इतना एन्क्रिप्टेड होता है कि भारतीय एजेंसियां इन्हें आसानी से ट्रैक नहीं कर पातीं, इसलिए इन्हें सुरक्षा के लिहाज से जोखिम माना जाता है. (Image for reference only)
किसे मिल सकती है खास इजाजत?

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कुछ खास मामलों में जैसे वैज्ञानिक रिसर्च, कॉर्पोरेट प्रोजेक्ट या पर्वतारोहण अभियानों के लिए सैटेलाइट फोन की अनुमति मिल सकती है. इसके लिए दूरसंचार विभाग से NOC लेना जरूरी होता है और यह प्रक्रिया काफी लंबी और सख्त होती है. (Image for reference only)