भारत और अमेरिका की प्रशासनिक व्यवस्था में बड़ा अंतर है. भारत में IAS-IPS जैसी स्थायी नौकरशाही व्यवस्था है, जबकि अमेरिका में राष्ट्रपति बदलने के साथ हजारों शीर्ष अधिकारियों की नियुक्तियां भी बदल जाती हैं. जानिए दोनों देशों की ब्यूरोक्रेसी कैसे काम करती है और किस मॉडल की क्या खासियत हैं
भारत में IAS, अमेरिका में नहीं

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भारत में संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा पास करने के बाद अधिकारी IAS, IPS और बाकी प्रतिष्ठित सेवाओं में नियुक्त होते हैं. ये अधिकारी सरकार बदलने के बावजूद अपने पद पर बने रहते हैं. वहीं अमेरिका में भारत जैसी कोई IAS सेवा नहीं है. वहां प्रशासनिक ढांचा अलग तरीके से ऑपरेट होता है.
क्या है भारत की परमानेंट ब्यूरोक्रेसी?

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भारत ने ब्रिटिश शासन से मिले वेस्टमिंस्टर मॉडल को अपनाया है. यहां ब्यूरोक्रेट्स को संवैधानिक सुरक्षा मिलती है और उनपर राजनीतिक बदलावों से असर नहीं पड़ता. यही वजह है कि सरकारें बदलने पर भी प्रशासनिक व्यवस्था लगातार काम करती रहती है.
अमेरिका का ‘Spoils System’ क्या है?

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अमेरिका में राष्ट्रपति के सत्ता में आने के बाद हजारों शीर्ष पदों पर नई नियुक्तियां की जाती हैं. इसे 'Spoils System' या राजनीतिक नियुक्ति व्यवस्था कहा जाता है. इसमें राष्ट्रपति अपनी नीतियों और विचारधारा के मुताबिक लोगों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां देता है.
राष्ट्रपति बदलते ही बदल जाते हैं अधिकारी

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रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका में लगभग 4,000 शीर्ष प्रशासनिक पद ऐसे होते हैं जिन पर राष्ट्रपति अपनी पसंद के लोगों को नियुक्त कर सकता है. नई सरकार आने पर इन पदों पर बैठे अधिकारी भी बदल सकते हैं. ये व्यवस्था भारत से बिल्कुल अलग है.
फिर अमेरिका में स्थिरता कैसे बनी रहती है?

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हालांकि टॉप लेवल पर राजनीतिक नियुक्तियां होती हैं, लेकिन उनके नीचे लाखों स्थायी सरकारी कर्मचारी कार्यरत रहते हैं. ये कर्मचारी 'फेडरल सिविल सर्विस' का हिस्सा होते हैं और काबिलियत के आधार पर नियुक्त किए जाते हैं. सरकार बदलने से उनकी नौकरी पर असर नहीं पड़ता.
अमेरिका में नियुक्तियां कैसे होती हैं?

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अमेरिका में ज्यादातर सरकारी कर्मचारियों की भर्ती अलग-अलग एजेंसियों और विभागों के जरिए होती है. यहां UPSC जैसी एक केंद्रीय परीक्षा नहीं होती. अलग-अलग पदों के लिए अलग भर्ती प्रक्रियाएं अपनाई जाती हैं और काबिलियत को प्राथमिकता दी जाती है.
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