UAE को फेल होता हुआ क्यों नहीं देख सकता भारत, अरब देशों पर संकट से हमारा क्या नुकसान?

भारत और अरब देशों (खासकर UAE) के रिश्ते अब सिर्फ तेल और मजदूर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि यह एक गहरी रणनीतिक साझेदारी बन चुकी है। UAE का अस्थिर होना या अरब देशों पर संकट आना भारत के लिए एक डोमिनो इफेक्ट की तरह होगा, जिसके नुकसान बहुआयामी हैं:

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भारत के लिए UAE और अरब देश सिर्फ व्यापारिक साझेदार नहीं, बल्कि विस्तारित पड़ोसी (Extended Neighborhood) हैं। उनकी स्थिरता में ही भारत की आर्थिक और सामरिक सुरक्षा निहित है। यही कारण है कि भारत हमेशा इस क्षेत्र में शांति (Peace) और संवाद (Dialogue) की वकालत करता है।

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ऊर्जा सुरक्षा

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भारत अपनी तेल जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा अरब देशों से आयात करता है। अगर इस क्षेत्र में अस्थिरता आती है, तो सप्लाई चेन बाधित होगी। कच्चे तेल की कीमतें आसमान छूने लगेंगी, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा होगा और सीधे तौर पर महंगाई (Inflation) बढ़ेगी।

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90 लाख भारतीयों का भविष्य

90 लाख भारतीयों का भविष्य 3 / 7

खाड़ी देशों (GCC) में लगभग 90 लाख भारतीय रहते और काम करते हैं। अकेले UAE में करीब 35 लाख भारतीय हैं। किसी भी युद्ध या आर्थिक संकट की स्थिति में इन भारतीयों की सुरक्षा और उनकी नौकरियों पर खतरा मंडराएगा। उन्हें वापस भारत लाना (Repatriation) एक बहुत बड़ी मानवीय और आर्थिक चुनौती होगी।

रेमिटेंस का बड़ा स्रोत

रेमिटेंस का बड़ा स्रोत 4 / 7

भारत दुनिया में सबसे ज्यादा रेमिटेंस (विदेशों से घर भेजा जाने वाला पैसा) पाने वाला देश है, और इसका एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आता है। अरब देशों में संकट का मतलब है भारत आने वाले विदेशी मुद्रा भंडार में भारी गिरावट, जो हमारी अर्थव्यवस्था की मजबूती के लिए जरूरी है।

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निवेश और व्यापार

निवेश और व्यापार 5 / 7

UAE भारत का तीसरा सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदार है। UAE ने भारत के इंफ्रास्ट्रक्चर, फूड पार्क और रिन्यूएबल एनर्जी में अरबों डॉलर के निवेश का वादा किया है। इसके अलावा, भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारा (IMEC) भी UAE के बिना संभव नहीं है। यदि वह फेल होता है, तो भारत का यूरोप तक पहुंचने का बड़ा सपना टूट सकता है।

रणनीतिक और सुरक्षा संबंध

रणनीतिक और सुरक्षा संबंध 6 / 7

आज UAE और सऊदी अरब जैसे देश आतंकवाद के खिलाफ और कश्मीर जैसे मुद्दों पर भारत के रुख का समर्थन करते हैं। अगर इन देशों में कट्टरपंथ बढ़ता है या वहां की सरकारें कमजोर होती हैं, तो पाकिस्तान जैसे देशों को भारत के खिलाफ फिर से लॉबिंग करने का मौका मिल जाएगा। साथ ही, समुद्री सुरक्षा (Sea Lanes of Communication) के लिए भी इन देशों का स्थिर रहना जरूरी है।

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कूटनीतिक हल की कोशिशें: भारत का रुख

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भारत ने हमेशा की तरह दोनों पक्षों से शांति बनाए रखने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। प्रधान मंत्री मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर वैश्विक नेताओं के संपर्क में हैं ताकि तनाव को कम किया जा सके और वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटके से बचाया जा सके।

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लेखक के बारे में

Vandana Bharti

Vandana Bharti

वन्‍दना भारती News 24 में बतौर ड‍िप्‍टी न्‍यूज एडिटर कार्यरत हैं और मौजूदा समय में बिजनेस डेस्‍क संभाल रही हैं. वन्दना News 24 के लिए स्टॉक मार्केट, पर्सनल फाइनेंस, कमोडिटी मार्केट, सरकारी योजनाओं पर खबरें लिखती हैं. वन्‍दना ने अपने करियर की शुरुआत दैन‍िक जागरण अखबार से की. इसके बाद देशबंधु अखबार में उन्होंने ब‍िजनेस रिपोर्टिंग में अपनी विशेषज्ञता विकसित की. साल 2010 में उन्होंने ह‍िन्‍दुस्‍तान अखबार में अपनी सेवाएं दीं, जहां उन्होंने ब‍िजनेस पेज के लिए 6 साल तक काम किया. वन्‍दना, आजतक डिजिटल, India.com और News18.com जैसे न्यूज प्लेटफॉर्म्स में बिजनेस डेस्क से जुड़ी रही हैं. वन्दना ने दिल्ली विश्वविद्यालय से बीकॉम किया है. कॉमर्स बैकग्राउंड होने के कारण उनकी बिजनेस की खबरों में अच्छी पकड़ है और इन खबरों को वह आसान भाषा में यूजर्स तक पहुंचाती हैं. कितने साल का अनुभव: 18 साल योग्यता: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से बी.कॉम और नई द‍िल्‍ली के YMCA संस्‍थान से पत्रकार‍िता में पीजीडीएमए की डिग्री प्राप्त की है.
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