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8th Pay Commission latest update : मांगों में न्यूनतम वेतन 69,000 रुपये, फिटमेंट फैक्टर 3.83, वार्षिक वेतन वृद्धि 6%, पुरानी पेंशन योजना की बहाली और न्यूनतम मकान किराया भत्ता को बढ़ाकर 30% करना शामिल है. साथ ही 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के तहत वेतन, पेंशन और सेवा नियमों में व्यापक संशोधन की जोरदार मांग रखी गई है.
69,000 रुपये की मांग उचित

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इकोनॉमिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, एनसी-जेसीएम की मसौदा समिति के सदस्यों में से एक, सी श्रीकुमार ने बताया कि 8वें वेतन आयोग की न्यूनतम मूल वेतन 69,000 रुपये की मांग उचित है क्योंकि परिवार को तीन इकाइयों में बांटने की वर्तमान प्रणाली को समाप्त करके परिवार को पांच इकाइयों में बांटा जाना चाहिए.
8वें वेतन आयोग से मुख्य मांगें

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कर्मचारियों की प्रमुख मांग यह है कि 1 जनवरी, 2004 के बाद भर्ती हुए कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना को फिर से लागू किया जाए. समिति ने पेंशन को अंतिम प्राप्त वेतन के 67 प्रतिशत पर निर्धारित करने का प्रस्ताव रखा है. पारिवारिक पेंशन 50 प्रतिशत होनी चाहिए. प्रत्येक कर्मचारी 30 वर्ष की सेवा अवधि में कम से कम पांच पदोन्नति के लिए पात्र है. पेंशन की समीक्षा और संशोधन हर पांच साल में किया जाना चाहिए.
किस लेवल पर कितने वेतन की मांग

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ज्ञापन के साथ साझा की गई तालिका में विभिन्न स्तरों पर वेतन वृद्धि का उदाहरण दिया गया है. उदाहरण के लिए, सबसे कम वेतन स्तर को 18,000 रुपये से बढ़ाकर 69,000 रुपये तक करने की मांग है. अगले स्तरों पर मूल वेतन मौजूदा वेतन को जोड़ने के बाद 83,200 रुपये और 1.12 लाख रुपये तक बढ़ सकता है. रिपोर्ट में कहा गया है कि मध्य स्तर के कर्मचारियों का मूल वेतन 1.35 लाख रुपये बढ़कर 2.15 लाख रुपये से अधिक हो सकता है.
डीए को मूल वेतन में मिलाने का सुझाव

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कर्मचारी संगठन ने महंगाई भत्ता (डीए) को मूल वेतन में मिलाने की पूर्व प्रथा को फिर से शुरू करने का भी सुझाव दिया है, जब यह 25 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, जिसका उद्देश्य मुद्रास्फीति की वास्तविकताओं को बेहतर ढंग से प्रतिबिंबित करना है. इस ज्ञापन में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि मौजूदा मुआवज़ा ढांचा पुराना हो चुका है और बढ़ती महंगाई और बदलते उपभोग पैटर्न के अनुरूप नहीं है. इसमें क्रमिक बदलावों के बजाय, प्रणाली के पूर्ण पुनर्गठन की वकालत की गई है.