8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच उत्साह का माहौल है। चर्चा है कि आयोग की सिफारिशें लागू होने के बाद कर्मचारियों को 18 से 24 महीने का मोटा एरियर (Arrears) मिल सकता है। लेकिन इस मोटी रकम के साथ एक बड़ा डर भी सता रहा है—क्या दो साल का एरियर एक साथ मिलने से टैक्स का बोझ बढ़ जाएगा? आयकर अधिनियम की धारा 89(1) और फॉर्म 10E इसके लिए कैसे मददगार हैं? आइए, टैक्स एक्सपर्ट्स के हवाले से समझते हैं पूरा गणित।
24 महीने का एरियर मिलना क्यों है मुमकिन? समझिए इसके पीछे का गणित

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कर्मचारियों को करीब 2 साल का एरियर मिलने का अनुमान किसी सरकारी घोषणा पर नहीं, बल्कि पुराने अनुभवों पर आधारित है। 8वें वेतन आयोग का गठन नवंबर 2025 में हुआ था, और इसकी सिफारिशें 1 जनवरी, 2026 से प्रभावी (Effective) मानी जा रही हैं। जिस तरह 7वें वेतन आयोग की सिफारिशें लागू होने में करीब 1.5 से 2 साल का समय लगा था, वैसे ही कयास हैं कि 8वें वेतन आयोग का अंतिम नोटिफिकेशन आते-आते साल 2027 आ सकता है। ऐसे में कर्मचारियों को 1 जनवरी 2026 से लेकर वास्तविक भुगतान की तारीख तक का (लगभग 20-24 महीने) बकाया एरियर मिलेगा।
टैक्स का झटका रोकने के लिए वरदान है सेक्शन 89(1)

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अगर आपको एक ही वित्तीय वर्ष में दो साल का बकाया पैसा मिलता है, तो आपकी कुल आय बढ़ जाएगी और आप उच्च टैक्स स्लैब (Higher Tax Slab) में आ सकते हैं। इसी से बचाने के लिए टैक्स कानून में खास व्यवस्था है। इनकम टैक्स एक्ट, 1961 का सेक्शन 89(1) यह सुनिश्चित करता है कि कर्मचारियों पर केवल इसलिए अतिरिक्त टैक्स न लगे क्योंकि उन्हें पुराना पैसा आज मिल रहा है। टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इसके तहत एरियर की रकम को उन पिछले सालों की आय में वर्चुअली (Year-wise Spreading) जोड़कर देखा जाता है जिससे वह संबंधित है। इसके बाद पिछले साल के टैक्स और इस साल के टैक्स के अंतर के आधार पर छूट (Relief) की गणना की जाती है।
भूलना मत फॉर्म 10E, इसके बिना नहीं मिलेगी टैक्स में छूट

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सेक्शन 89(1) के तहत मिलने वाली टैक्स राहत कोई ऑटोमैटिक प्रक्रिया नहीं है, इसके लिए आपको खुद कदम उठाना होगा। टैक्स एक्सपर्ट सीए चांदनी आनंदन (क्लियरटैक्स) के अनुसार, यदि आप धारा 89(1) के तहत टैक्स राहत का दावा कर रहे हैं, तो आपको इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने से पहले ऑनलाइन फॉर्म 10E भरना अनिवार्य है। अगर आप यह फॉर्म नहीं भरते हैं, तो आयकर विभाग आपकी टैक्स छूट को अमान्य कर सकता है और आपको नोटिस मिल सकता है। इसलिए एरियर मिलते ही अपने एम्प्लॉयर (विभाग) से ईयर-वाइज ब्रेकअप स्टेटमेंट जरूर लें।
ओल्ड या न्यू टैक्स रिजीम: एरियर मिलने पर कौन सी व्यवस्था होगी बेहतर?

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मोटा एरियर हाथ में आने के बाद कर्मचारियों के मन में यह उलझन होगी कि वे पुरानी टैक्स व्यवस्था चुनें या नई। अगर आपके पास धारा 80C (PPF, LIC), 80D (मेडिक्लेम), एचआरए (HRA) या होम लोन ब्याज जैसी बड़ी कटौतियां (Deductions) हैं, तो ओल्ड रिजीम एरियर के टैक्स प्रभाव को काफी हद तक कम (Softener) कर सकती है। अगर आपके पास कोई निवेश या टैक्स छूट के दावे नहीं हैं, तो नई व्यवस्था की कम टैक्स दरें आपके लिए फायदेमंद हो सकती हैं। एक्सपर्ट्स की सलाह है कि राहत की गणना दोनों व्यवस्थाओं में करके ही अंतिम फैसला लें।
एरियर का ऐलान होते ही केंद्रीय कर्मचारी तुरंत करें ये 4 काम

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जैसे ही सरकार द्वारा 8वें वेतन आयोग के फिटमेंट फैक्टर (जो 1.92 से 3.83 के बीच अनुमानित है) और एरियर का आधिकारिक ऐलान हो, टैक्स बचाने के लिए तुरंत ये कदम उठाएं। अपने विभाग या नियोक्ता से वित्तीय वर्ष के अनुसार एरियर का ब्योरा मांगें। एरियर आने से आप ऊंचे टैक्स ब्रैकेट में जा सकते हैं, इसलिए 80C, 80D या एनपीएस (NPS) में वैध निवेश को अधिकतम सीमा तक पूरा करें। सुनिश्चित करें कि आपके फॉर्म 16 में एरियर और सेक्शन 89(1) की राहत सही ढंग से दर्ज की गई है।