बाइक-स्कूटर को क्यों नहीं देना पड़ता टोल? कई लोग आज भी नहीं जानते इसकी असली वजह

क्या आपने कभी सोचा है कि टोल प्लाजा पर सिर्फ कार और ट्रक ही क्यों रुकते हैं, जबकि बाइक वाले सीधे निकल जाते हैं? इसके पीछे कोई सेटिंग नहीं, बल्कि एक खास कानून है. वजह जानकर आप भी हैरान रह जाएंगे कि आखिर सरकार ने दोपहिया वाहनों को टोल से क्यों छूट दी है.

bike toll tax rule
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bike toll tax rule

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कानून में साफ छूट का प्रावधान

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भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग शुल्क नियम, 2008 के अनुसार दोपहिया और तिपहिया वाहनों को टोल देने से छूट मिली हुई है. यानी बाइक और स्कूटर चालकों को नेशनल हाईवे पर टोल देना जरूरी नहीं होता.

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सड़क पर कम असर डालते हैं दोपहिया वाहन

सड़क पर कम असर डालते हैं दोपहिया वाहन3 / 7

टोल टैक्स का मकसद सड़कों के निर्माण और रखरखाव की लागत निकालना होता है. दोपहिया वाहन हल्के होते हैं और सड़क को भारी वाहनों जितना नुकसान नहीं पहुंचाते. इसी वजह से इनसे टोल वसूलना जरूरी नहीं माना गया.

आम लोगों की जेब पर न पड़े बोझ

आम लोगों की जेब पर न पड़े बोझ4 / 7

भारत में बड़ी संख्या में लोग रोजमर्रा के सफर के लिए बाइक या स्कूटर का इस्तेमाल करते हैं. अगर इन पर भी टोल लगाया जाए, तो मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव बढ़ सकता है.

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टोल प्लाजा पर बढ़ सकती है भीड़

टोल प्लाजा पर बढ़ सकती है भीड़5 / 7

अगर हर बाइक चालक को टोल पर रुकना पड़े, तो वहां लंबी कतारें लग सकती हैं. इससे ट्रैफिक और धीमा हो जाएगा और टोल प्लाजा पर जाम जैसी स्थिति बन सकती है.

पहले से ही दिया जाता है रोड टैक्स

पहले से ही दिया जाता है रोड टैक्स6 / 7

जब आप बाइक या स्कूटर खरीदते हैं, तब रजिस्ट्रेशन के दौरान एकमुश्त रोड टैक्स दिया जाता है. यह टैक्स सड़कों के इस्तेमाल की लागत को काफी हद तक कवर कर लेता है, इसलिए अलग से टोल लेने की जरूरत नहीं पड़ती.

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वसूली का खर्च ज्यादा पड़ता है

वसूली का खर्च ज्यादा पड़ता है7 / 7

प्रशासन के लिए हर दोपहिया वाहन से टोल वसूलना आसान नहीं है. इतनी बड़ी संख्या में कम राशि इकट्ठा करने के लिए ज्यादा संसाधन और समय लगेगा, जो व्यावहारिक नहीं है. इसलिए सरकार ने इन्हें टोल से बाहर रखा है. बता दें, ज्यादातर सरकारी नेशनल हाईवे और एक्सप्रेसवे पर बाइक से टोल नहीं लिया जाता, लेकिन कुछ मामलों में नियम अलग हैं जैंसे- कुछ सड़कों को निजी कंपनियां चलाती हैं (जैसे बेंगलुरु की NICE रोड), जहां बाइक से भी टोल वसूला जाता है क्योंकि ये NHAI के तहत नहीं आतीं. वहीं कुछ हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे (जैसे मुंबई-पुणे या दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे) पर सुरक्षा वजहों से बाइक चलाने की अनुमति ही नहीं होती.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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