मई जून की तेज गर्मी सिर्फ लोगों के लिए ही नहीं, बल्कि कारों के लिए भी बड़ी परेशानी बन जाती है. जब तापमान 45 डिग्री के आसपास पहुंचता है, तो धूप में खड़ी कार के अंदर का हिस्सा बहुत तेजी से गर्म होने लगता है. इससे डैशबोर्ड, सीट और प्लास्टिक पार्ट्स को नुकसान पहुंच सकता है. वहीं ज्यादा गर्मी इंजन और इलेक्ट्रिकल सिस्टम पर भी दबाव बढ़ाती है, जिससे शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा बढ़ जाता है.
कूलेंट लेवल को नजरअंदाज करना पड़ सकता है भारी

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गर्मियों में इंजन को ठंडा रखने के लिए कूलेंट बेहद जरूरी होता है. तेज तापमान में इंजन जल्दी गर्म हो सकता है, इसलिए हफ्ते में कम से कम एक बार कूलेंट लेवल जरूर चेक करें. अगर कूलेंट कम लगे, तो सही मात्रा में पानी और कूलेंट मिलाकर भरें. ध्यान रखें कि गर्म इंजन में तुरंत पानी डालने से इंजन ब्लॉक को नुकसान पहुंच सकता है.
टायर प्रेशर पर रखें खास नजर

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गर्मी में सड़कें काफी ज्यादा गर्म हो जाती हैं, जिससे टायरों के अंदर की हवा फैलने लगती है. ऐसे में अगर टायर में पहले से ज्यादा हवा भरी हो, तो तेज रफ्तार के दौरान टायर फटने का खतरा बढ़ सकता है. इसलिए गर्मियों में टायर प्रेशर कंपनी द्वारा बताए गए लेवल से 2 3 PSI कम रखना बेहतर माना जाता है. अगर संभव हो तो सामान्य हवा की जगह नाइट्रोजन गैस भरवाना ज्यादा सुरक्षित हो सकता है.
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कार के अंदर भूलकर भी न छोड़ें ये चीजें

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धूप में खड़ी कार का तापमान कुछ ही मिनटों में 60 डिग्री तक पहुंच सकता है. ऐसे में लाइटर, डियोड्रेंट, सैनिटाइजर, पावर बैंक और स्मार्टफोन जैसी चीजें खतरनाक साबित हो सकती हैं. तेज गर्मी में इनके फटने का खतरा रहता है, जिससे कार में आग लग सकती है. इसके अलावा प्लास्टिक की पानी की बोतल भी कार में छोड़ना सही नहीं माना जाता.
धूप में खड़ी कार को ऐसे करें ठंडा

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अगर कार लंबे समय तक धूप में खड़ी रही हो, तो बैठते ही एसी फुल स्पीड पर नहीं चलाना चाहिए. इससे एसी कंप्रेसर पर अचानक ज्यादा दबाव पड़ सकता है. सबसे पहले कार के दरवाजे या खिड़कियां खोलकर गर्म हवा बाहर निकलने दें. इसके बाद थोड़ी देर कार चलाकर धीरे धीरे एसी ऑन करें. इससे कूलिंग बेहतर होगी और एसी सिस्टम पर कम दबाव पड़ेगा.
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बैटरी और इंजन ऑयल की जांच भी जरूरी

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गर्मी के मौसम में बैटरी की परफॉर्मेंस भी प्रभावित होती है. ज्यादा तापमान की वजह से बैटरी का लिक्विड तेजी से कम हो सकता है. इसलिए बैटरी टर्मिनल्स और पानी के स्तर की जांच करते रहना जरूरी है. साथ ही इंजन ऑयल की क्वालिटी पर भी ध्यान दें, क्योंकि पुराना या पतला ऑयल गर्मी में इंजन को सही तरीके से लुब्रिकेट नहीं कर पाता और इससे इंजन खराब होने का खतरा बढ़ जाता है.