कहीं आपको तो नहीं लग रहा पेट्रोल पंप पर चूना! बढ़ती कीमतों के बीच फ्रॉड से कैसे बचें

पेट्रोल पंप पर कई बार कम तेल भी दिया जाता है. मशीन में चिप, जीरो स्कैम और जंप ट्रिक जैसी चालों से ग्राहकों को चूना लगाया जाता है. जानिए कैसे पकड़ सकते हैं ये फ्रॉड.

Delhi Pollution Control, No PUCC No Fuel Delhi, Manjinder Singh Sirsa
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दिल्ली में बढ़ते प्रदूषण पर लगाम कसने के लिए सरकार ने 'नो PUCC, नो फ्यूल' नियम को और कड़ा करने का फैसला किया है. file photo

 

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच पेट्रोल पंप पर धोखाधड़ी की शिकायतें भी लगातार सामने आती रहती हैं. कई लोगों को शक रहता है कि उन्हें पूरे पैसे देने के बाद भी कम तेल मिलता है. ऐसे में सतर्क रहना बेहद जरूरी माना जाता है.

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मशीन में चिप लगाकर की जाती है गड़बड़ी

मशीन में चिप लगाकर की जाती है गड़बड़ी2 / 8

रिपोर्ट्स के मुताबिक कुछ मामलों में पेट्रोल पंप की मशीन में खास चिप लगाई जाती है. यह चिप रिमोट से कंट्रोल होती है. मीटर पर रीडिंग सही दिखाई देती है, लेकिन गाड़ी में कम पेट्रोल या डीजल जाता है. इस तरह की गड़बड़ी में ग्राहक को लगता है कि मशीन सही चल रही है, जबकि असल में तेल की मात्रा कम होती है. यानी पैसे पूरे देने पड़ते हैं, लेकिन बदले में पूरा फ्यूल नहीं मिलता.

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 क्या होता है ‘जीरो स्कैम’?

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पेट्रोल पंप पर होने वाले सबसे आम फ्रॉड में से एक “जीरो स्कैम” माना जाता है. इसमें कर्मचारी मशीन को जीरो किए बिना ही तेल भरना शुरू कर देते हैं. अगर मशीन पहले से जीरो पर नहीं होती, तो पिछली रीडिंग भी आपके बिल में शामिल हो सकती है. इससे ग्राहक ज्यादा पैसे चुका देता है, जबकि वाहन में उतना तेल नहीं डाला जाता.

जंप ट्रिक से ऐसे लगाया जाता है चूना

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फ्रॉड का एक और तरीका जंप ट्रिक कहलाता है. इसमें मीटर की रीडिंग धीरे-धीरे बढ़ने के बजाय अचानक 10, 20 या 30 पर पहुंच जाती है. इस ट्रिक में ग्राहक को लगता है कि मशीन सामान्य तरीके से चल रही है, लेकिन असल में कम तेल भरा जाता है. रिपोर्ट्स के अनुसार 10 लीटर फ्यूल पर करीब 100 रुपये तक का नुकसान हो सकता है.

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तेल भरवाते समय गाड़ी से उतरें

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फ्रॉड से बचने के लिए पेट्रोल भरवाते समय गाड़ी से उतरकर मशीन की रीडिंग पर नजर रखना बेहतर माना जाता है. इससे किसी भी गड़बड़ी को जल्दी पकड़ा जा सकता है.

बातों में उलझाने की कोशिश पर रहें अलर्ट

बातों में उलझाने की कोशिश पर रहें अलर्ट6 / 8

कई बार कर्मचारी ग्राहकों को बातचीत में उलझाने की कोशिश करते हैं. ऐसे समय में मशीन और मीटर दोनों पर ध्यान बनाए रखना जरूरी होता है.

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 ऐसे पकड़ सकते हैं मिलावट

 ऐसे पकड़ सकते हैं मिलावट7 / 8

अगर पेट्रोल या डीजल में मिलावट का शक हो, तो फिल्टर पेपर टेस्ट की मांग की जा सकती है. मिलावटी तेल होने पर पेपर पर अलग तरह के धब्बे दिखाई दे सकते हैं.

शिकायत कहां करें?

शिकायत कहां करें?8 / 8

अगर आपको माप या तेल की गुणवत्ता में गड़बड़ी लगती है, तो संबंधित तेल कंपनी की हेल्पलाइन, मोबाइल ऐप या ऑफिशियल वेबसाइट पर शिकायत दर्ज कराई जा सकती है.

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लेखक के बारे में

Mikita Acharya

Mikita Acharya

मिकिता आचार्य News24 में ऑटो एंड टेक राइटर हैं. पत्रकारिता में उन्हें 6 साल से ज्यादा का अनुभव है. मूल रूप से मध्यप्रदेश के राजगढ़ जिले की रहने वाली मिकिता ने इंदौर के देवी अहिल्या विश्वविद्यालय के स्कूल और जर्नलिज्म एंड मास कम्यनिकेशन (SJMC, DAVV) से मास्टर्स इन जर्नलिज्म किया है. वहीं श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी, इंदौर से बीएससी की डिग्री ली है. अपने करियर की शुरुआत मिकिता ने 2019 में ईटीवी भारत, हैदराबाद से की, जहां उन्होंने कई ऑटो, टेक के अलावा न्यूज के लिए कॉटेंट लिखा. इसके बाद दैनिक भास्कर सब-एडिटर के तौर पर उन्होंने न्यूज के साथ इन्वेस्टिगेटिव जर्नलिज्म के लिए भी काम किया. साइंस बैकग्राउंड होने की वजह से ऑटोमोबाइल और टेक्नोलॉजी से जुड़ी खबरें लिखने में मिकिता की गहरी रूचि है. News24 में इस पद पर रहते हुए वे ऑटो और टेक्नोलॉजी से जुड़ी प्रोडक्ट लॉन्च, इंडस्ट्री ट्रेंड्स और रिव्यूज पर रोजाना लेख लिख रही हैं. मिकिता ने ऑटो और टेक से जुड़े कई बड़े इवेंट में ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की है. वह ऑटो और टेक इंडस्ट्री से जुड़े एक्सपर्ट्स के संपर्क में रहती हैं. कितने साल का अनुभव: 6+ योग्यता : SJMC, DAVV से जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन में मास्टर्स श्री वैष्णव इंस्टीट्यूट से इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी में बीएससी पिछला अनुभव: दैनिक भास्कर, ETV भारत
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