लद्दाख के खूबसूरत पहाड़ों और प्राचीन झीलों को निहारने की चाहत रखने वाले सैलानियों के लिए एक जरूरी और सचेत करने वाली खबर है. लद्दाख के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों को जोड़ने वाले 'नुब्रा-पैंगोंग रूट' पर इन दिनों ट्रैफिक का भारी दबाव देखा जा रहा है. सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ हालिया वीडियो में वाहनों की लंबी कतारें बेहद संकरी सड़कों पर रेंगती हुई दिखाई दे रही हैं, जिसने प्रशासन के साथ-साथ मुसाफिरों की भी चिंता बढ़ा दी है. पहाड़ों पर लगा यह लंबा जाम न केवल आपके सफर का मजा किरकिरा कर रहा है, बल्कि अत्यधिक ऊंचाई और कम ऑक्सीजन वाले इस इलाके में यह स्थिति आपकी महंगी कार या मोटरसाइकिल को भी गंभीर नुकसान पहुंचा रही है.
संकरे रास्तों पर बढ़ता ट्रैफिक

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नुब्रा से पैंगोंग के बीच का यह पूरा स्ट्रेच अपने लुभावने लैंडस्केप और बेहद चुनौतीपूर्ण रास्तों के लिए पूरी दुनिया में मशहूर है. पीक टूरिस्ट सीजन की वजह से इस संकरे मार्ग पर गाड़ियों की बाढ़ आ गई है. इस रूट के कई हिस्से इतने तंग हैं कि वहां दो गाड़ियों का एक साथ गुजरना या ओवरटेक करना लगभग नामुमकिन हो जाता है. नतीजा यह है कि पहाड़ों पर कई किलोमीटर लंबा जाम लग रहा है. यह स्थिति न केवल ड्राइवरों और राइडर्स को शारीरिक और मानसिक रूप से थका रही है, बल्कि कम दबाव वाले इस ऊंचे क्षेत्र में गाड़ियों के मैकेनिकल पार्ट्स पर भी ज्यादा दबाव डाल रही है. हम बताएंगे कि आपकी कार और मोटरसाइकिल पर इस जाम का क्या असर होगा?
इंजन ओवरहीटिंग की समस्या

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अधिक ऊंचाई पर हवा का घनत्व कम होता है, जिससे इंजनों को ठंडा होने के लिए पर्याप्त ताजी हवा नहीं मिल पाती. जब कारें और बाइक ऐसे माहौल में घंटों रेंगती हैं, तो इंजन का तापमान तेजी से बढ़ता है. खासकर जो गाड़ियां पहाड़ों की इन कठिन परिस्थितियों के लिए ऑप्टिमाइज्ड नहीं हैं, उनमें इंजन ओवरहीट होने या 'कूलेंट बॉइलिंग' की समस्या सबसे ज्यादा देखी जा रही है.
क्लच प्लेट का तेजी से घिसना

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नुब्रा-पैंगोंग के चढ़ाई वाले रास्तों पर बार-बार रुकने और चलने की वजह से मैनुअल कारों और मोटरसाइकिलों के क्लच का ज्यादा इस्तेमाल होता है. इस वजह से क्लच असेंबली पर बहुत लोड पड़ता है, जिससे क्लच प्लेट समय से पहले घिस जाती है या जल जाती है.
ऑटोमैटिक कारों के गियरबॉक्स में खराबी

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जो लोग ऑटोमैटिक कार लेकर लद्दाख गए हैं, विशेष रूप से वे वाहन जिनमें ड्राई-क्लच डीसीटी गियरबॉक्स लगा है, उन्हें इस भारी जाम में ट्रांसमिशन हीटिंग की गंभीर समस्या का सामना करना पड़ रहा है. लगातार रुक-रुक कर चलने से गियरबॉक्स का तापमान चेतावनी के स्तर तक पहुंच जाता है.
ब्रेकिंग सिस्टम पर ज्यादा दबाव

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ढलान वाले रास्तों पर जाम में गाड़ी को नियंत्रित रखने के लिए ब्रेक का लगातार इस्तेमाल करना पड़ता है. बाइकों में इससे ब्रेक पैड बहुत तेजी से घिसते हैं, जबकि कारों में लंबे समय तक ब्रेक दबाकर रखने से ब्रेकिंग एफिशिएंसी अस्थायी रूप से कम हो जाती है, जिसे 'ब्रेक फेड' भी कहा जाता है. यह पहाड़ों पर सुरक्षा के लिहाज से बेहद खतरनाक है.
गाड़ी के माइलेज पर मार

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लद्दाख जैसे दूरदराज के इलाकों में ईंधन की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती होती है, क्योंकि वहां पेट्रोल पंप सीमित संख्या में हैं और उनके बीच की दूरी बहुत ज्यादा है. जब गाड़ियां जाम में घंटों स्टार्ट खड़ी रहती हैं, तो ईंधन की खपत सामान्य से दोगुनी-तीगुनी हो जाती है. ऐसे में गाड़ी का माइलेज बुरी तरह गिर जाता है, जिससे बीच रास्ते में ही ईंधन खत्म होने का खतरा काफी बढ़ जाता है.
इन 3 बातों का रखें ख्याल

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अगर आप इस सीजन में नुब्रा या पैंगोंग की तरफ जाने का प्लान बना रहे हैं, तो इन टिप्स को जरूर अपनाएं. भारी ट्रैफिक से बचने का सबसे अचूक तरीका यह है कि आप सुबह तड़के ही अपनी यात्रा शुरू कर दें. जल्दी निकलने से आपको खाली सड़कें मिलेंगी. यात्रा पर निकलने से पहले अपनी गाड़ी के इंजन ऑयल, कूलेंट लेवल, क्लच और खासकर ब्रेक पैड्स की पूरी जांच किसी अच्छे मैकेनिक से जरूर करवा लें. इसके अलावा दुर्गम रास्तों पर जाम की स्थिति को देखते हुए हमेशा अपनी गाड़ी में बैकअप के तौर पर जेरीकैन में एक्स्ट्रा पेट्रोल या डीजल साथ लेकर चलें.