E20 पेट्रोल को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है. ऑटोमोटिव रिसर्च एसोसिएशन ऑफ इंडिया (ARAI) की एक रिपोर्ट के मुताबिक, E20 फ्यूल का इस्तेमाल E10 के लिए बनी कुछ कारों के रबर वाले पार्ट्स पर असर डाल सकता है. यह रिपोर्ट तेल विपणन कंपनियों और वाहन निर्माताओं के साथ साझा की गई थी और इसमें दिए गए सुझावों को लागू करने की सिफारिश भी की गई थी. हालांकि, यह रिपोर्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं की गई है.
किन पार्ट्स पर पड़ सकता है असर?

2 / 7
रिपोर्ट में बताया गया कि E10-कम्पैटिबल वाहनों में E20 फ्यूल इस्तेमाल करने पर फ्यूल सिस्टम के रबर वाले हिस्सों, जैसे होज, गैस्केट, सील और O-रिंग में खराबी के संकेत मिले. अध्ययन के आधार पर सुझाव दिया गया कि ऐसे वाहनों में इन रबर पार्ट्स को बदलने की जरूरत पड़ सकती है.
गडकरी ने कहा- एक भी कार का नाम बताइए

4 / 7
E20 पेट्रोल को लेकर चल रही बहस के बीच केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि एथनॉल मिश्रित पेट्रोल से किसी भी कार में खराबी आने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है. विकसित भारत सम्मेलन में उन्होंने कहा कि अगर E20 पेट्रोल से किसी वाहन में समस्या आई है, तो उसका सिर्फ एक उदाहरण सामने लाकर दिखाया जाए. उनके मुताबिक, E20 को लेकर कई तरह की गलत अफवाहें फैलाई जा रही हैं. ये भी पढ़ें- E20 Petrol पर नितिन गडकरी की खुली चुनौती! बोले- एक भी ऐसी कार बताइए जिसे इससे हुआ हो नुकसान
सरकार E20 को क्यों दे रही है बढ़ावा?

5 / 7
नितिन गडकरी का कहना है कि भारत को पेट्रोल और डीजल पर अपनी निर्भरता कम करनी होगी. उन्होंने बताया कि देश हर साल कच्चे तेल के आयात पर करीब 22 लाख करोड़ रुपये खर्च करता है. ऐसे में एथनॉल जैसे वैकल्पिक ईंधन का इस्तेमाल बढ़ाने से विदेशी मुद्रा की बचत होगी और प्रदूषण भी कम किया जा सकेगा.
आखिर E20 पेट्रोल है क्या?

6 / 7
E20 पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथनॉल और 80 प्रतिशत पेट्रोल का मिश्रण होता है. इससे पहले देश में E10 फ्यूल का इस्तेमाल किया जाता था, जिसमें एथनॉल की मात्रा 10 प्रतिशत थी. अब सरकार ने देशभर में E20 को लागू कर दिया है ताकि जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम की जा सके.
विवाद की वजह क्या है?

7 / 7
E20 को लेकर विवाद इसलिए हो रहा है क्योंकि 2023 से पहले बनी अधिकांश गाड़ियां E10 फ्यूल के हिसाब से तैयार की गई थीं. आशंका जताई जा रही है कि E20 में ज्यादा एथनॉल होने के कारण इन वाहनों के रबर वाले पार्ट्स पर असर पड़ सकता है. ARAI की रिपोर्ट में भी इस संभावना का जिक्र किया गया है, हालांकि इसे अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है. वहीं, कुछ वाहन मालिकों का कहना है कि E20 पेट्रोल इस्तेमाल करने के बाद उनकी गाड़ी की माइलेज 2 से 6 प्रतिशत तक कम हो गई है. दूसरी ओर सरकार का कहना है कि अब तक किसी भी वाहन में E20 की वजह से बड़ी तकनीकी खराबी का कोई ठोस प्रमाण नहीं मिला है.