Add News24 as a Preferred Source Add news 24 as a Preferred Source

---विज्ञापन---

Opinion

बंगाल में बड़ा नहीं, बारीक खेल: वोट नहीं, मार्जिन की महीन कारीगरी तय करेगी जीत

पश्चिम बंगाल के चुनाव इस बार बड़े जनादेश से नहीं, बल्कि छोटे अंतर और करीबी मुकाबलों पर टिका दिख रहा है. वोटों का सूक्ष्म गणित और जीत-हार का मार्जिन तय करेगा कि सत्ता किसके हाथ में जाती है.

Author
Written By: Kumar Gaurav Updated: Apr 7, 2026 17:11

पश्चिम बंगाल की सियासत सतह पर भले ही तृणमूल कांग्रेस के पक्ष में मजबूत दिखती हो, लेकिन आंकड़ों की गहराई में जाएं तो मुकाबला कहीं ज्यादा कड़ा और दिलचस्प नजर आता है. यह चुनाव बड़े जनादेश से ज्यादा छोटे-छोटे अंतर के गणित पर टिका दिख रहा है, जहां भारतीय जनता पार्टी अपनी संभावनाएं तलाश रही है.

दरअसल, चुनावी गणित का पहला बड़ा पहलू सीटों पर जीत का अंतर है. तृणमूल कांग्रेस के पास 114 ऐसी सीटें हैं, जहां जीत का अंतर 10 प्रतिशत से अधिक रहा है, जबकि भारतीय जनता पार्टी के पास ऐसी सिर्फ 35 सीटें हैं. इसका सीधा मतलब है कि तृणमूल कांग्रेस कई सीटों पर बड़े अंतर से जीत दर्ज करती है, लेकिन इस अतिरिक्त बढ़त का सीटों की संख्या में समानुपाती फायदा नहीं मिलता. वहीं भारतीय जनता पार्टी का प्रदर्शन कई सीटों पर करीबी मुकाबले के रूप में सामने आता है.

---विज्ञापन---

इसी से जुड़ा दूसरा पहलू ‘व्यर्थ वोट’ का है. वर्ष 2024 के आधार पर तृणमूल कांग्रेस के 55.8 लाख वोट ऐसे रहे, जो जरूरत से अधिक अंतर में चले गए, जबकि भारतीय जनता पार्टी के लिए यह आंकड़ा 11.9 लाख रहा. वर्ष 2021 में भी यही प्रवृत्ति दिखी, जब तृणमूल कांग्रेस के 65 लाख और भारतीय जनता पार्टी के 5.5 लाख वोट अतिरिक्त मार्जिन में दर्ज हुए. इससे यह संकेत मिलता है कि कम वोट होने के बावजूद उनका प्रभावी उपयोग सीटों में तब्दील होने की क्षमता को बढ़ा सकता है.

तीसरा महत्वपूर्ण पहलू करीबी मुकाबलों वाली सीटें हैं. राज्य में लगभग 58 ऐसी विधानसभा सीटें हैं, जहां जीत-हार का अंतर बेहद कम रहने की संभावना है. इन सीटों पर यदि कुल मिलाकर लगभग 1.92 लाख वोटों का झुकाव बदलता है, तो चुनाव परिणाम में बड़ा उलटफेर संभव है. यानी राज्य की सत्ता का समीकरण कुछ लाख वोटों के इर्द-गिर्द सिमट सकता है.

---विज्ञापन---

इसके साथ ही मतदाता सूची में हुए व्यापक बदलाव ने भी अनिश्चितता बढ़ाई है. विशेष गहन संशोधन प्रक्रिया के तहत करीब 91 लाख नाम हटाए गए हैं. इस बदलाव को लेकर तृणमूल कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी के अपने-अपने दावे हैं. जहां तृणमूल कांग्रेस इसे प्रक्रिया में खामी के रूप में देख रही है, वहीं भारतीय जनता पार्टी इसे सुधार की दिशा में कदम बता रही है.

राजनीतिक माहौल में ममता बनर्जी सरकार के खिलाफ असंतोष के मुद्दे भी चर्चा में हैं. भ्रष्टाचार, भर्ती घोटाले, कटमनी और कानून-व्यवस्था जैसे सवाल विपक्ष द्वारा लगातार उठाए जा रहे हैं, जबकि तृणमूल कांग्रेस इन आरोपों को खारिज करती रही है.

कुल मिलाकर, पश्चिम बंगाल का चुनाव इस बार पारंपरिक लहर या बड़े जनादेश का नहीं, बल्कि सूक्ष्म चुनावी गणित का प्रतीक बनता दिख रहा है. एक ओर तृणमूल कांग्रेस की बड़ी बढ़त वाले गढ़ हैं, तो दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी की करीबी मुकाबलों पर केंद्रित रणनीति. ऐसे में अंतिम परिणाम इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-सी पार्टी अपने वोट को सही जगह और सही अंतर में बदलने में सफल रहती है.

First published on: Apr 07, 2026 05:08 PM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.