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Opinion

क्यों अनुपम उदाहरण बन गया Maharashtra CM का शपथ ग्रहण समारोह? मन को छू गई ये पहल

Devendra Fadnavis Oath Ceremony: महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के शपथ ग्रहण समारोह में एक नई परंपरा की शुरुआत की गई। दोनों उप-मुख्यमंत्रियों ने भी इस परंपरा का पालन किया। उम्मीद की जा रही है कि पूरा देश इस परंपरा का पालन करेगा और इसका महत्व समझेगा।

Maharashtra CM Oath Ceremony New Tradition: महाराष्ट्र को गुरुवार को अपना नया मुख्यमंत्री मिल गया। देवेंद्र फडणवीस एक बार फिर से महाराष्ट्र के CM बने हैं, जबकि एकनाथ शिंदे और अजित पावर को उप-मुख्यमंत्री की कुर्सी मिली। मुंबई के आजाद मैदान में हुए इस शपथ ग्रहण समारोह में ऐसा बहुत कुछ देखने को मिला, जो हमेशा याद रहेगा। इस समारोह में जहां समय और संगठन की शक्ति का अहसास हुआ। वहीं, एक नई परंपरा की नींव भी रखी गई। महाराष्ट्र को संभालने वाले तीनों मंत्रियों ने शपथ के दौरान माता और पिता दोनों का नाम लिया। अमूमन ऐसा देखने को नहीं मिलता। गौरतलब है कि 8 महीने पहले ही महाराष्ट्र सरकार ने ये नियम बनाया था कि सभी सरकारी दस्तावेजों में अमुक शख्स के नाम के बाद मां का नाम, फिर पिता का नाम और फिर सरनेम लिखा जाना अनिवार्य है। ऐसे में गुरुवार को जब शपथ ग्रहण समारोह के दौरान मुख्यमंत्री और उप-मुख्यमंत्रियों ने इसी तरह से शपथ ली तो वाकई ये बात मन को छू गई।

 

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माता-पिता दोनों के योगदान को कमतर नहीं आंक सकते

संतान की उत्पत्ति में पिता के साथ-साथ मां का भी योगदान होता है। पिता यदि बच्चे की ढाल बनकर खड़ा रहता है तो मां उसे एक माली की तरह सींचती है। उसके पहली बार जमीन पर कदम रखने से लेकर दौड़ने तक, सबकुछ मां ही तो करती है, लेकिन अपने योगदान के अनुरूप मां को पहचान नहीं मिल पाती। बेटे के साथ पिता के नाम की परंपरा सदियों से चली आ रही है।

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कई मौकों पर कई लोगों ने इस परंपरा से विपरीत चलने की कोशिश की, यानी पिता की जगह मां का नाम लगाया, लेकिन यह भी तो 2 व्यक्तियों के योगदान को बराबर न आंकना ही हुआ ना? पौधा लगाने वाला और उसे पेड़ बनाने वाला, दोनों ही बराबर सम्मान के हकदार हैं। किसी के योगदान को कमतर करके नहीं आंका जा सकता। इसलिए जब बात पहचान की आती है तो दोनों का नाम साथ लिया ही जाना चाहिए। यही संदेश देने की कोशिश महाराष्ट्र से की गई है।

 

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तीनों नेताओं ने अपने नाम संग माता-पिता का नाम लिया

मुख्यमंत्री पद की शपथ ग्रहण करते समय देवेंद्र फडणवीस का- ‘मी देवेंद्र सरिताताई गंगाधरराव फडणवीस’, एकनाथ शिंदे का- ‘मी एकनाथ गंगूबाई संभाजी शिंदे’ और अजित पवार का- ‘मी अजित आशाताई आनंदराव पवार’ कहना एक नई और शुभ परंपरा की शुरुआत है। फडणवीस, शिंदे और पवार ने शपथ में माता-पिता दोनों का नाम शामिल करके वर्षों पुरानी एक पक्षीय परंपरा को तोड़ा, जिसे बहुत पहले टूट जाना चाहिए था। महाराष्ट्र प्रगतिशील राज्य और मुंबई देश की आर्थिक राजधानी है।

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ऐसे में यहां विकास ‘वंदे भारत’ की रफ्तार से दौड़ता है। जिस मुंबई से महाराष्ट्र का शासन चलता है, उसने अपनी आधुनिकता में सबको पछाड़ दिया है। फडणवीस, शिंदे और पवार की शपथ महाराष्ट्र की इसी पहचान से मेल खाती है। राजनीति से अलग हटकर ‘आधुनिक और प्रगतिशील’ सोच दर्शाने वाले प्रयास के लिए तीनों नेताओं की तारीफ की जानी चाहिए और उम्मीद की जानी चाहिए कि योगदान को बराबर सम्मान के महाराष्ट्र से निकले इस संदेश पर पूरा देश अमल करेगा।

 

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First published on: Dec 06, 2024 12:41 PM

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About the Author

Abhishek Mehrotra

अभिषेक मेहरोत्रा उन चुनिंदा पत्रकारों में शुमार हैं, जो हमेशा कुछ नया करने और खुद को समय से आगे रखने में प्रयासरत रहते हैं. प्रिंट मीडिया से अपने करियर की शुरुआत करने वाले अभिषेक ने डिजिटल जर्नलिज्म में अपनी एक अलग पहचान स्थापित की है. बतौर ग्रुप एडिटर डिजिटल News24 से जुड़ने से पहले अभिषेक मेहरोत्रा बिज़नेस वर्ल्ड में डिजिटल एडिटर की जिम्मेदारी निभा रहे थे. उन्होंने Zee मीडिया में डिजिटल एडिटर के रूप में उल्लेखनीय कार्य किया है. उनकी लीडरशिप में ज़ी न्यूज़ की वेबसाइट न केवल लोगों की पसंदीदा वेबसाइट बनी, बल्कि उसने नंबर 1 न्यूज़ वेबसाइट का मुकाम भी हासिल किया. अभिषेक मेहरोत्रा के कार्यकाल में जी न्यूज़ की वेबसाइट ने 100 मिलियन यूजर्स का आंकड़ा पार कर लिया था, जो अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि है. अभिषेक मेहरोत्रा ने अपना करियर आगरा के स्वराज्य टाइम्स से जर्नलिज्म की पढाई के दौरान शुरू किया। उसके बाद अमर उजाला, दैनिक जागरण और नवभारत टाइम्स के जरिए अपनी पत्रकारिता की पारी को आगे बढ़ाया। वे उन चुनिंदा पत्रकारों में है जो आज के युग के मीडिया यानी वेब जर्नलिज्म के अच्छे जानकार माने जाते हैं। नवभारतटाइम्स ऑनलाइन के साथ वेब पत्रकारिता शुरू करने वाले अभिषेक का जागरण डॉट कॉम को एक बड़ी ऊंचाई तक पहुंचाने में अहम योगदान रहा है। अभिषेक ने काफी पहले ही वेब वर्ल्ड की बारीकियों को समझ लिया था, क्योंकि वह जानते थे कि पत्रकारिता का भविष्य डिजिटल मीडिया में ही निहित है. आज वह अपनी उस समझ, ज्ञान, अनुभव और खबरों को बेहतर ढंग से समझने के कौशल के बल पर पत्रकारिता के स्तंभ को और मजबूती प्रदान कर रहे हैं. उन्होंने 5 सालों तक मीडिया स्ट्रीम से जुड़ी वेबसाइट समाचार4मीडिया डॉट कॉम में संपादकीय प्रभारी का दायित्व भी निभाया है. मीडिया जगत और वहां के बिजनेस मॉडल पर उनकी पैनी नजर के चलते वे मीडिया विश्लेषक के तौर पर भी जाने जाते हैं। खबरों की दुनिया के तमात दबाव और चुनौतियों के बावजूद उन्होंने अपने अंदर के व्यंगकार को जीवित रखा है. उनके लेख अमर उजाला, आउटलुक हिंदी, चौथी दुनिया में बतौर व्यंग्यकार निरंतर प्रकाशित होते है. राज्यसभा डॉट कॉम और दैनिक जागरण के लिए वे विदेशी और समसमायिक मुद्दों पर लिखने वाले स्थापित कॉलमिनिस्ट हैं।

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