भले ही ऊपर से बनियान सही दिख रही हो लेकिन समय रहते बदल लेना चाहिए. सामान्य धुलाई के बाद भी कई सूक्ष्म कीटाणु कपड़े के रेशों में रह सकते हैं. हेल्थलाइन के मुताबिक लगभग हर साल इनरवियर बदलने पर विचार किया जा सकता है. खासकर तब जब बार-बार इंफेक्शन जैसी समस्या रहती हो. क्लीवलैंड क्लीनिक भी जोर देता है कि रोजाना फ्रेश इनरवियर अच्छी हाइजीन का हिस्सा है. Onmanorama के मुताबिक, रोजाना प्रयोग होने वाली बनियान/इनरवियर को 6-12 माह में बदल लेना चाहिए. जोकि इस्तेमाल, वॉशिंग और क्वालिटी पर निर्भर करती है. समय के साथ सूती कपड़े के रेशे कमजोर हो जाते हैं जो त्वचा पर फंगल इंफेक्शन, खुजली और रैशेज को बढ़ावा दे सकती है.
इन 4 संकेतों को न करें नजरअंदाज
अगर आपकी बनियान में छेद नहीं हुए हैं, फिर भी ये बदलाव दिख रहे हैं, तो समझ लें कि नई शॉपिंग का वक्त आ गया है:
- जिद्दी पीलापन : बगल के पास पसीने और डियोडरेंट के कारण पड़ने वाले पीले दाग अगर धोने के बाद भी न जाएं, तो उसे तुरंत बदल दें. यह बैक्टीरिया का घर बन सकते हैं.
- इलास्टिक का ढीला होना: अगर बनियान का गला फैल गया है या नीचे से वह लटकने लगी है, तो वह आपके कपड़ों के नीचे सही फिटिंग नहीं देगी और आपको असहज महसूस कराएगी.
- कपड़े का पतला होना: बार-बार धोने से फैब्रिक अपनी मोटाई खो देता है. अगर कपड़ा छूने में बहुत ज्यादा पतला और कमजोर लगने लगे, तो वह पसीना सोखना बंद कर चुका है.
- दुर्गंध का न जाना: कई बार पुरानी बनियान को धोने के बाद भी उसमें से एक अजीब सी सीलन भरी गंध आती रहती है. इसका मतलब है कि फैब्रिक के रेशों में बैक्टीरिया गहराई तक जम चुके हैं.
घटने लगती है नमी सोखने की क्षमता
डॉक्टरों का कहना है कि समय के साथ सूती कपड़े के रेशे कमजोर हो जाते हैं और उनकी नमी सोखने की क्षमता घटने लगती है. इससे त्वचा पर नमी ज्यादा देर तक बनी रहती है, जो फंगल इंफेक्शन, खुजली और रैशेज जैसी समस्याओं को बढ़ावा दे सकती है. भले ही बनियान ऊपर से ठीक दिखे, लेकिन अंदरूनी स्तर पर वह हाइजीन के लिहाज से सुरक्षित नहीं रह जाती. अगर इन्हें कम पहना जाता है तो अधिकतम 18 से 24 महीने तक उपयोग किया जा सकता है, लेकिन यह कपड़े की गुणवत्ता, धुलाई के तरीके और उपयोग की आवृत्ति पर निर्भर करता है. छेद या फटने का इंतजार नहीं करना चाहिए.
माइल्ड डिटर्जेंट से धोना भी जरूरी है
पुरानी बनियान या इनरवियर को लंबे समय तक पहनना सेहत और हाइजीन दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. बेहतर हाइजीन के लिए 100 प्रतिशत कॉटन की बनियान पहनना उचित माना जाता है. यह त्वचा को सांस लेने देती है और पसीना अच्छी तरह सोखती है. रोजाना साफ इनरवियर पहनना और माइल्ड डिटर्जेंट से धोना भी जरूरी है.
भले ही ऊपर से बनियान सही दिख रही हो लेकिन समय रहते बदल लेना चाहिए. सामान्य धुलाई के बाद भी कई सूक्ष्म कीटाणु कपड़े के रेशों में रह सकते हैं. हेल्थलाइन के मुताबिक लगभग हर साल इनरवियर बदलने पर विचार किया जा सकता है. खासकर तब जब बार-बार इंफेक्शन जैसी समस्या रहती हो. क्लीवलैंड क्लीनिक भी जोर देता है कि रोजाना फ्रेश इनरवियर अच्छी हाइजीन का हिस्सा है. Onmanorama के मुताबिक, रोजाना प्रयोग होने वाली बनियान/इनरवियर को 6-12 माह में बदल लेना चाहिए. जोकि इस्तेमाल, वॉशिंग और क्वालिटी पर निर्भर करती है. समय के साथ सूती कपड़े के रेशे कमजोर हो जाते हैं जो त्वचा पर फंगल इंफेक्शन, खुजली और रैशेज को बढ़ावा दे सकती है.
इन 4 संकेतों को न करें नजरअंदाज
अगर आपकी बनियान में छेद नहीं हुए हैं, फिर भी ये बदलाव दिख रहे हैं, तो समझ लें कि नई शॉपिंग का वक्त आ गया है:
- जिद्दी पीलापन : बगल के पास पसीने और डियोडरेंट के कारण पड़ने वाले पीले दाग अगर धोने के बाद भी न जाएं, तो उसे तुरंत बदल दें. यह बैक्टीरिया का घर बन सकते हैं.
- इलास्टिक का ढीला होना: अगर बनियान का गला फैल गया है या नीचे से वह लटकने लगी है, तो वह आपके कपड़ों के नीचे सही फिटिंग नहीं देगी और आपको असहज महसूस कराएगी.
- कपड़े का पतला होना: बार-बार धोने से फैब्रिक अपनी मोटाई खो देता है. अगर कपड़ा छूने में बहुत ज्यादा पतला और कमजोर लगने लगे, तो वह पसीना सोखना बंद कर चुका है.
- दुर्गंध का न जाना: कई बार पुरानी बनियान को धोने के बाद भी उसमें से एक अजीब सी सीलन भरी गंध आती रहती है. इसका मतलब है कि फैब्रिक के रेशों में बैक्टीरिया गहराई तक जम चुके हैं.
घटने लगती है नमी सोखने की क्षमता
डॉक्टरों का कहना है कि समय के साथ सूती कपड़े के रेशे कमजोर हो जाते हैं और उनकी नमी सोखने की क्षमता घटने लगती है. इससे त्वचा पर नमी ज्यादा देर तक बनी रहती है, जो फंगल इंफेक्शन, खुजली और रैशेज जैसी समस्याओं को बढ़ावा दे सकती है. भले ही बनियान ऊपर से ठीक दिखे, लेकिन अंदरूनी स्तर पर वह हाइजीन के लिहाज से सुरक्षित नहीं रह जाती. अगर इन्हें कम पहना जाता है तो अधिकतम 18 से 24 महीने तक उपयोग किया जा सकता है, लेकिन यह कपड़े की गुणवत्ता, धुलाई के तरीके और उपयोग की आवृत्ति पर निर्भर करता है. छेद या फटने का इंतजार नहीं करना चाहिए.
माइल्ड डिटर्जेंट से धोना भी जरूरी है
पुरानी बनियान या इनरवियर को लंबे समय तक पहनना सेहत और हाइजीन दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. बेहतर हाइजीन के लिए 100 प्रतिशत कॉटन की बनियान पहनना उचित माना जाता है. यह त्वचा को सांस लेने देती है और पसीना अच्छी तरह सोखती है. रोजाना साफ इनरवियर पहनना और माइल्ड डिटर्जेंट से धोना भी जरूरी है.