पुरानी बनियान में छेद नहीं, ये 4 संकेत दिखें तो तुरंत बदलें, बढ़ सकता है इंफेक्शन का खतरा

अक्सर लोग बनियान को तब तक इस्तेमाल करते रहते हैं जब तक वह फट न जाए या बहुत ज्यादा खराब न दिखने लगे, लेकिन विशेषज्ञों के अनुसार हाइजीन और स्किन हेल्थ के लिहाज से यह सही आदत नहीं है. इनरवियर सीधे त्वचा के संपर्क में रहता है और उसमें बैक्टीरिया पनपने का खतरा बढ़ जाता है.

google AI innerwear

photo credit: Google Gemini AI

भले ही ऊपर से बनियान सही दिख रही हो लेकिन समय रहते बदल लेना चाहिए. सामान्य धुलाई के बाद भी कई सूक्ष्म कीटाणु कपड़े के रेशों में रह सकते हैं. हेल्थलाइन के मुताबिक लगभग हर साल इनरवियर बदलने पर विचार किया जा सकता है. खासकर तब जब बार-बार इंफेक्शन जैसी समस्या रहती हो. क्लीवलैंड क्लीनिक भी जोर देता है कि रोजाना फ्रेश इनरवियर अच्छी हाइजीन का हिस्सा है. Onmanorama के मुताबिक, रोजाना प्रयोग होने वाली बनियान/इनरवियर को 6-12 माह में बदल लेना चाहिए. जोकि इस्तेमाल, वॉशिंग और क्वालिटी पर निर्भर करती है. समय के साथ सूती कपड़े के रेशे कमजोर हो जाते हैं जो त्वचा पर फंगल इंफेक्शन, खुजली और रैशेज को बढ़ावा दे सकती है.

विज्ञापन

इन 4 संकेतों को न करें नजरअंदाज

अगर आपकी बनियान में छेद नहीं हुए हैं, फिर भी ये बदलाव दिख रहे हैं, तो समझ लें कि नई शॉपिंग का वक्त आ गया है:

विज्ञापन
  • जिद्दी पीलापन : बगल के पास पसीने और डियोडरेंट के कारण पड़ने वाले पीले दाग अगर धोने के बाद भी न जाएं, तो उसे तुरंत बदल दें. यह बैक्टीरिया का घर बन सकते हैं.
  • इलास्टिक का ढीला होना: अगर बनियान का गला फैल गया है या नीचे से वह लटकने लगी है, तो वह आपके कपड़ों के नीचे सही फिटिंग नहीं देगी और आपको असहज महसूस कराएगी.
  • कपड़े का पतला होना: बार-बार धोने से फैब्रिक अपनी मोटाई खो देता है. अगर कपड़ा छूने में बहुत ज्यादा पतला और कमजोर लगने लगे, तो वह पसीना सोखना बंद कर चुका है.
  • दुर्गंध का न जाना: कई बार पुरानी बनियान को धोने के बाद भी उसमें से एक अजीब सी सीलन भरी गंध आती रहती है. इसका मतलब है कि फैब्रिक के रेशों में बैक्टीरिया गहराई तक जम चुके हैं.

घटने लगती है नमी सोखने की क्षमता

डॉक्टरों का कहना है कि समय के साथ सूती कपड़े के रेशे कमजोर हो जाते हैं और उनकी नमी सोखने की क्षमता घटने लगती है. इससे त्वचा पर नमी ज्यादा देर तक बनी रहती है, जो फंगल इंफेक्शन, खुजली और रैशेज जैसी समस्याओं को बढ़ावा दे सकती है. भले ही बनियान ऊपर से ठीक दिखे, लेकिन अंदरूनी स्तर पर वह हाइजीन के लिहाज से सुरक्षित नहीं रह जाती. अगर इन्हें कम पहना जाता है तो अधिकतम 18 से 24 महीने तक उपयोग किया जा सकता है, लेकिन यह कपड़े की गुणवत्ता, धुलाई के तरीके और उपयोग की आवृत्ति पर निर्भर करता है. छेद या फटने का इंतजार नहीं करना चाहिए.

माइल्ड डिटर्जेंट से धोना भी जरूरी है

पुरानी बनियान या इनरवियर को लंबे समय तक पहनना सेहत और हाइजीन दोनों के लिए नुकसानदायक साबित हो सकता है. बेहतर हाइजीन के लिए 100 प्रतिशत कॉटन की बनियान पहनना उचित माना जाता है. यह त्वचा को सांस लेने देती है और पसीना अच्छी तरह सोखती है. रोजाना साफ इनरवियर पहनना और माइल्ड डिटर्जेंट से धोना भी जरूरी है.

विज्ञापन

न्यूज 24 पर पढ़ें देश,राष्ट्रीय समाचार (National News),खेल,मनोरंजन,धर्म,लाइफ़स्टाइल,हेल्थ,शिक्षा से जुड़ी हर खबर। ब्रेकिंग न्यूज और लेटेस्ट अपडेट के लिए News 24 App डाउनलोड कर अपना अनुभव शानदार बनाएं।

First published on:

और पढ़ें: हमारे संपादकीय दिशानिर्देश और मानक यहाँ देखें।

लेख समाप्त

लेखक के बारे में

Vijay Jain

Vijay Jain

विजय कुमार न्यूज 24 में बतौर सीनियर न्यूज एडिटर कार्यरत हैं. विजय कुमार ने अपने पत्रकारिता के सफर की शुरुआत प्रिंट मीडिया के साथ की. अपने 23 साल के करियर में वह दैनिक जागरण, अमर उजाला और दैनिक भास्कर जैसे संस्थानों के साथ जुड़े रहे हैं. विजय कुमार राजनीति, चुनाव, क्राइम और करंट अफेयर्स जैसे विषयों पर तथ्यपरक पत्रकारिता के लिए जाने जाते हैं. विजय कुमार ने दैनिक भास्कर में रिपोर्टिंग के दौरान स्टिंग ऑपरेशन भी किए. 23 साल के अनुभव के दौरान विजय कुमार ने करियर के शुरुआती दौर में डेस्क जर्नलिस्ट रहते हुए की. विजय कुमार को 2019 और 2024 के लोकसभा चुनाव के अलावा बिहार, यूपी, बंगाल, राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के विधानसभा चुनाव की ग्राउंड कवरेज का अनुभव है. ग्रामीण उद्योगीकरण में स्नातक की डिग्री होने के कारण विजय कुमार को ग्रामीण इलाकों की समस्याओं और उनसे जुड़ी कवरेज का खासा अनुभव है. अपने लेख के माध्यम से उन्होंने ग्रामीण इलाकों की समस्याओं को प्रमुखता से उठाया है. पत्रकारिता में अनुभव: 23 साल योग्यता, डिग्री / अन्य उपलब्धियां: शैक्षणिक योग्यता की बात करें तो उन्होंने कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से ग्रामीण उद्योगीकरण विषय में बीए की डिग्री प्राप्त की है. विजय कुमार को पत्रकारिता के क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान के लिए 2017 में 'श्रीफल जर्नलिज्म नेशनल अवॉर्ड' से सम्मानित किया गया.
... और पढ़ें
विज्ञापन
होम पेज पर वापस जाएँ