राजधानी लखनऊ के सुशांत गोल्फ सिटी इलाके से शनिवार को संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए 'महाराणा प्रताप चैरिटेबल ट्रस्ट' के संचालक धीरेंद्र प्रताप सिंह (43) की हत्या कर दी गई. रविवार शाम उनका शव दुबग्गा क्षेत्र के अमेठिया सलेमपुर गांव की एक नहर में झाड़ियों के बीच पड़ा मिला. सूचना मिलते ही पुलिस और फॉरेंसिक टीम मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा.
जमीन विवाद और ड्राइवर पर शक
पुलिस को शुरुआती तफ्तीश में शक है कि इस हत्या के पीछे कोई पुराना जमीनी विवाद हो सकता है. इसके अलावा, मामले में धीरेंद्र प्रताप सिंह का ड्राइवर भी जांच के घेरे में है. पुलिस को आशंका है कि ड्राइवर विरोधियों या हमलावरों के साथ मिला हुआ हो सकता है, जिसकी मदद से इस साजिश को अंजाम दिया गया.
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मॉल जाने निकले थे, फिर नहीं लौटे
एसीपी गोसाईगंज ऋषभ यादव के अनुसार, मूल रूप से उन्नाव के फतेहपुर चौरासी निवासी धीरेंद्र कई सालों से सुशांत गोल्फ सिटी में रह रहे थे. शनिवार शाम वह अपनी कार से फीनिक्स पलासियो मॉल जाने के लिए निकले थे. देर रात तक जब वह घर नहीं लौटे और उनका मोबाइल भी स्विच ऑफ आया, तो परिजनों ने अपहरण की आशंका जताते हुए थाने में मामला दर्ज कराया.
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ड्राइवर हिरासत में, लेन-देन पर भी नजर
पुलिस की चार टीमें धीरेंद्र की तलाश में जुटी थीं. इसी दौरान रविवार को उनका शव मिलने की सूचना आई. पुलिस ने संदेह के आधार पर उनके ड्राइवर रवि को हिरासत में ले लिया है और उससे सख्ती से पूछताछ की जा रही है. शुरुआती जांच में प्रॉपर्टी और रुपयों के लेन-देन से जुड़े विवाद की बात सामने आ रही है.
गनर साथ नहीं ले गए थे
धीरेंद्र लखनऊ और उन्नाव में प्रॉपर्टी का काम भी संभालते थे और खुद को भाजपा नेता बताते थे. हालांकि, उन्नाव भाजपा जिलाध्यक्ष अनुराग अवस्थी ने स्पष्ट किया कि संगठन में उनके पास कोई पद नहीं था. धीरेंद्र को दो सुरक्षा गार्ड (गनर) मिले हुए थे, लेकिन शनिवार को वह गनरों को घर पर ही छोड़कर अकेले कार से निकले थे. फिलहाल पुलिस मामले के सभी पहलुओं की गहराई से तफ्तीश कर रही है.
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