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#SheInspiresUs – एक सजग परिवर्तन की निरंतरता, संयोग नहीं

#SheInspiresUs पहल की भावना के अनुरूप तेलंगाना में युवतियों के सशक्तिकरण के लिए जागरूकता, गरिमा और नेतृत्व को जोड़ने वाली पहलें सामने आ रही हैं. 10K रन, मासिक धर्म गरिमा अभियान और iVision Youth Parliament 2025 जैसे मंच युवतियों को लोकतांत्रिक भागीदारी और नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं.

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Edited By : Palak Saxena Updated: Mar 13, 2026 15:43

जब माननीय प्रधानमंत्री ने #SheInspiresUs पहल की शुरुआत की, तो इसका उद्देश्य केवल पदों पर आसीन महिलाओं को सम्मानित करना नहीं था. यह उन महिलाओं को पहचान देने की एक पहल थी जो परिवर्तन की चिंगारी जगाती हैं. ऐसी महिलाएँ जिनका काम विभिन्न क्षेत्रों और समुदायों में केवल प्रतीकात्मक नहीं बल्कि संरचनात्मक बदलाव की दिशा में एक दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है. तेलंगाना में इस विचारधारा का एक सशक्त उदाहरण हरी चंदना के कार्यों में दिखाई देता है.

पहली नजर में उनके सार्वजनिक कार्यों से जुड़े तीन पहल अलग-अलग दिखाई देते हैं . एक 10K रन, जो सार्वजनिक भागीदारी और जागरूकता को बढ़ावा देता है; एक मासिक धर्म गरिमा आंदोलन, जो किशोरियों के स्वास्थ्य और सम्मान पर केंद्रित है; और यूथ पार्लियामेंट, जो विद्यार्थियों में नागरिक भागीदारी और लोकतांत्रिक समझ विकसित करने का मंच प्रदान करता है. लेकिन यदि इन पहलों को गहराई से देखा जाए तो यह स्पष्ट होता है कि ये अलग-अलग कार्यक्रम नहीं हैं. वास्तव में ये एक सुविचारित और जुड़े हुए परिवर्तन की निरंतर प्रक्रिया के हिस्से हैं. यह संयोग नहीं है. यह एक सोच-समझकर बनाई गई संरचना है. यूथ पार्लियामेंट 2025 उपस्थिति से आवाज़ तक

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हैदराबाद में आयोजित iVision Youth Parliament 2025 के ग्रैंड फिनाले का माहौल आत्मविश्वास और स्पष्टता से भरा हुआ था. युवा छात्र मंच पर खड़े होकर नीति, शासन और लोकतंत्र जैसे विषयों पर बहस कर रहे थे. इनमें कई छात्राएं भी थीं, जो राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर पूरे आत्मविश्वास के साथ अपने विचार रख रही थीं.कई पर्यवेक्षकों के लिए यह दृश्य प्रतीकात्मक था.

कुछ दशक पहले तक कई क्षेत्रों में किशोरियों के लिए स्कूल में बने रहना ही एक चुनौती हुआ करता था. सामाजिक और जैविक कारणों के कारण उनकी शिक्षा अक्सर बाधित हो जाती थी. मासिक धर्म स्वास्थ्य से जुड़ी चर्चाएं अक्सर चुप्पी में दबा दी जाती थीं, और सार्वजनिक विमर्श में उनकी भागीदारी सीमित रहती थी.

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आज वही पीढ़ी केवल शिक्षा जारी नहीं रख रही है, बल्कि संविधानिक मूल्यों और सार्वजनिक नीतियों पर खुलकर चर्चा भी कर रही है. यहाँ एक स्वाभाविक प्रश्न उठता है

क्या यह मात्र संयोग है? या फिर यह एक सुव्यवस्थित और पोषित पारिस्थितिकी तंत्र का परिणाम है?

जब लड़कियों को 10K रन जैसे अभियानों के माध्यम से सार्वजनिक रूप से प्रोत्साहित किया जाता है, जिससे उनकी भागीदारी और दृश्यता सामान्य बनती है… जब मासिक धर्म गरिमा जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाता है कि किशोरियों की पढ़ाई बाधित न हो और उनका आत्मसम्मान बना रहे… और जब यूथ पार्लियामेंट जैसे मंच उन्हें विचार व्यक्त करने और लोकतांत्रिक विमर्श में भाग लेने का अवसर देते हैं… तब यह स्पष्ट हो जाता है कि यह अलग-अलग पहल नहीं बल्कि एक दीर्घकालिक दृष्टि का परिणाम हैं. इस संदर्भ में यूथ पार्लियामेंट केवल एक शैक्षणिक प्रतियोगिता नहीं रह जाता. यह एक परिवर्तन बिंदु बन जाता है जहां उपस्थिति आवाज में बदलती है, जहां कक्षा का ज्ञान संवैधानिक समझ में विकसित होता है, और जहां युवा लड़कियाँ स्वयं को केवल योजनाओं की लाभार्थी नहीं बल्कि लोकतांत्रिक संवाद की सक्रिय भागीदार के रूप में देखना शुरू करती हैं. यह क्रमबद्ध प्रक्रिया है. नेतृत्व की अपेक्षा करने से पहले आत्मविश्वास का निर्माण किया जाता है. सशक्तिकरण की एक सुविचारित यात्रा

यदि इस पूरी प्रक्रिया को एक क्रम में देखा जाए तो इसकी संरचना स्पष्ट हो जाती है

जागरूकता (Awareness) — समाज अपनी बेटियों के लिए दौड़ता है, जिससे सार्वजनिक प्रोत्साहन और दृश्यता मजबूत होती है.
पहुंच और गरिमा (Access & Dignity) — संरचनात्मक हस्तक्षेप यह सुनिश्चित करते हैं कि किशोरियाँ बिना किसी बाधा के अपनी शिक्षा जारी रख सकें, जिससे उनकी पढ़ाई और आत्मसम्मान दोनों सुरक्षित रहते हैं.
एजेंसी (Agency) — यूथ पार्लियामेंट जैसे मंच उन्हें विचार रखने, बहस करने और प्रतिनिधित्व करने का अवसर देते हैं, जिससे वे प्रभावशाली भूमिकाओं की ओर बढ़ती हैं.
यह बहुस्तरीय दृष्टिकोण यह दर्शाता है कि सशक्तिकरण कोई एक घटना या घोषणा नहीं है.

यह केवल जागरूकता अभियानों तक सीमित नहीं है और न ही यह केवल नीतिगत घोषणाओं तक सीमित है.
यह एक सतत यात्रा है —
दृश्यता से स्थिरता तक,
स्थिरता से भागीदारी तक,
और भागीदारी से नेतृत्व तक.
इस निरंतरता से यह स्पष्ट होता है कि सशक्तिकरण का अंतिम लक्ष्य प्रतिनिधित्व होना चाहिए.
प्रोत्साहन बिना पहुंच के अधूरा रहता है.
पहुंच बिना एजेंसी के प्रभाव सीमित कर देती है.
और एजेंसी बिना सार्वजनिक मंच के प्रभाव को सीमित कर देती है.
तेलंगाना में इन पहलों का संगम एक व्यापक विश्वास को दर्शाता है
कि एक बालिका में निवेश केवल एक चरण का कार्य नहीं है.
इसके लिए उसके विकास के हर चरण में निरंतर समर्थन आवश्यक है शारीरिक, बौद्धिक और सामाजिक. इस प्रकार जो सामने आता है वह विखंडन नहीं बल्कि एकीकृत दृष्टिकोण है.
संयोग नहीं बल्कि निरंतरता है.

और इसी निरंतरता में #SheInspiresUs की असली भावना निहित है

ऐसा नेतृत्व जो अलग-अलग खांचों में काम नहीं करता, बल्कि ऐसे मार्ग तैयार करता है जहाँ आज की लाभार्थी कल की निर्णय-निर्माता बन सके. जीवन में जीवित रहने से नेतृत्व तक की यात्रा शायद ही कभी संयोग से होती है. यह एक-एक कदम जोड़कर बनाई जाती है.

First published on: Mar 13, 2026 03:30 PM

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