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शौर्य सभागार , डोरंडा में नशे के खिलाफ दो दिवसीय विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन

रांची के शौर्य सभागार में नशे के खिलाफ दो दिवसीय जागरूकता कार्यक्रम शुरू हुआ जहां युवाओं को जागरूक करने के साथ रिनपास में मुफ्त इलाज की जानकारी दी गई

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नशा केवल एक व्यक्ति को ही नहीं, बल्कि पूरे परिवार और समाज को प्रभावित करता है. बढ़ती नशाखोरी के बीच लोगों को जागरूक करने और उन्हें नई जिंदगी देने के उद्देश्य से डोरंडा, रांची के शौर्य सभागार में शुक्रवार को दो दिवसीय विशेष जागरूकता सह मास्टर ट्रेनर का प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया.नारकोटिक्स नियंत्रण ब्यूरो (NCB) के श्री सैफ उमर ने युवाओं से अपील की कि वे नशे से दूर रहें और समाज में इससे होने वाले दुष्प्रभाव से भी लोगों जागरूक करें. उन्होंने नशीली दवाओं के दुष्परिणामों पर प्रकाश डालते हुए लोगों को अवगत कराया . उन्होंने जानकारी दी कि इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य प्रतिबंधित नशीली दवाओं पर रोक लगाने के साथ-साथ  दवाओं के दुष्परिणामों के संबंध में जागरूकता लाना है. मादक पदार्थो का सेवन से सामाजिक और आर्थिक रूप से बड़ा नुकसान होता है . उन्होंने नशे से जुड़ी भ्रांतियां और मिथक पर भी जानकारी दी.

श्री उमर ने बताया कि बेघर, बेरोजगार या जीवन से निराश लोग धीरे-धीरे नशे के आदी हो जाते है. ऐसे में सही समय में उनका काउंसलिंग जरूरी होता है. और ऐसे व्यक्ति के लिए जो लंबे समय से मादक या नशीले पदार्थों का सेवन कर रहा हो उसे भी सही समय पर इलाज मिले तो नशे की लत से मुक्ति मिल सकती है और प्रभावित व्यक्ति फिर से एक सम्मानजनक जीवन जी सकता है.

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केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान (CIP) के डॉ. संजय कुमार मुंडा ने इस अभियान को नशामुक्ति की दिशा में एक प्रभावकारी पहल बताया. उन्होंने बताया कि इस अभियान का मुख्य फोकस स्कूल-कॉलेज के छात्र, युवाओं , शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोग हैं, जो नशे की गिरफ्त में तेजी से आ रहे हैं. कहीं ना कहीं इसका मुख्य कारण तनाव, सामाजिक उपेक्षा, करियर की चिंता और पारिवारिक समस्याएं होती है, जिसके कारण युवा नशे की ओर आकर्षित होते है. कभी-कभी शुरुआत अक्सर शौक या जिज्ञासा से होती है, जो बाद में गंभीर लत का रूप ले लेता है.

वहीं रिनपास के मनोचिकित्सक डॉ. सजल अशीष नाग ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य युवाओं पर विशेष ध्यान केंद्रित करना है, ताकि उन्हें नशे के खतरे से अवगत कराया जा सके. उन्होंने जानकारी दी कि नशा पीड़ितों के लिए रिनपास में 50 बेड की निःशुल्क सुविधा उपलब्ध है, वहीं केंद्रीय मनोचिकित्सा संस्थान में भी 50 बेड की व्यवस्था है.

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कार्यक्रम में झारखंड की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए जानकारी दी कि राज्य में भी धीरे-धीरे नशीले पदार्थों का सेवन बढ़ता जा रहा है, यहाँ तंबाकू, गांजा और ब्राउन शुगर जैसी सामग्री आसानी से उपलब्ध है. इस पर सख्त नियंत्रण की जरूरत बताई गई. 

वहीं जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से कार्यक्रम स्थल पर विभिन्न प्रकार की प्रदर्शनी और प्रचार-प्रसार सामग्री भी लगाई गई, जिससे लोगों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी गई. दो दिवसीय आयोजन का दूसरा दिन 8 जून को आयोजित है. 

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कार्यक्रम में पुलिस , प्रशासन के अधिकारीगण, सीआईपी एवं रिनपास के डॉक्टर्स सहित अन्य लोग उपस्थित थे.

First published on: Jun 06, 2026 02:15 PM

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