इस साल आजादी दिवस पर प्रधानमंत्री मोदी के साथ लाल किले की प्राचीर पर एक ऐसी शख्सियत मौजूद थी, जो काफी सुर्खियां बटोर रही हैं. इस बार पीएम मोदी के साथ मौजूद थी इंडियन आर्मी की कैप्टन रितिका खरेता, जिनपर सभी की नज़र अटक गई. वो ध्वजारोहण की प्रक्रिया के दौरान पीएम मोदी की मदद कर रही थी, जो उनके लिए सिर्फ एक ड्यूटी नहीं थी. इससे ये संदेश साफ होता है कि भारत की महिलाएं बॉर्डर पर देश की रक्षा करने के साथ-साथ देश के बड़े राष्ट्रीय कार्यक्रमों की ज़िम्मेदारी भी बखूबी निभा सकती हैं. इन सबके बीच, लोगों के मन में ये जिज्ञासा उठ रही है कि आखिर रितिका खरेता कौन हैं.
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कौन हैं रितिका खरेता?
रितिका खरेता इंडियन आर्मी में कैप्टन हैं, जिन्होंने 2025 में रिपब्लिक डे की परेड के दौरान अपनी पहचान बनाई. उन्होंने कर्तव्य पथ पर 146 पुरुष जवानों वाली कोर ऑफ सिग्नल्स की मार्चिंग टुकड़ी को अकेले लीड किया. रितिका खरेता के पिता दिल्ली पुलिस में सब-इंस्पेक्टर हैं और उनकी मां एक टीचर हैं. उन्होंने दिल्ली के पुष्प विहार के एमिटी इंटरनेशनल स्कूल से पढ़ाई की. 76वें गणतंत्र दिवस की मॉर्निंग टुकड़ी का नेतृत्व करने के लिए उन्हें जबलपुर में मौजूद सिग्नल ट्रेनिंग सेंटर के 12 अधिकारियों में से चुना गया.
लाल किले पर ध्वजारोहण का प्रोटोकॉल
लाल किले पर तिरंगा फहराना इतना आसान नहीं होता, बल्कि इसके पीछे सशस्त्र बलों की कड़ी मेहनत और प्रोटोकॉल होता है. पूरी प्रक्रिया में 1-1 सेकेंड मायने रखता है. झंडा फहराना, राष्ट्रगान और 21 तोपों की सलामी हर चीज को बड़े ही तरीके से किया जाता है. तीनों सेनाएं मिलकर इस समारोह की ज़िम्मेदारियों को बखूबी निभाती हैं. लेकिन पीएम मोदी के साथ वही अधिकारी ध्वजारोहण के दौरान खड़े होते हैं, जिन्हें रक्षा मंत्रालय चुनता है. वही अधिकारी फ्लैग की रस्सियों, सलामी और औपचारिकताओं को संभालता है. इस साल ध्वजारोहण की प्रक्रिया के लिए कैप्टन रितिका खेरात को चुना गया, जिसके बाद से महिलाओं में अलग जोश देखने को मिल रहा है.
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