इस देश ने बनाया दुनिया का पहला न्यूक्लियर डस्टबिन, एक लाख साल तक नहीं होगा लीक; जानें क्या है प्रोजेक्ट?

डस्टबिन, जो हर घर में मौजूद होतें हैं. जिनमें आप अपने घर का किचन का कूड़ा डालते हैं. अब आप सोच रहे होंगे कि हम यहां डस्बिन की बात क्यों कर रहे हैं तो आपको बता दें कि वैज्ञानिक दुनिया का पहला ऐसा डस्टबिन बनाने के बेहद करीब पहुंच गए हैं, जहां परमाणु कचरा डाला जाएगा.

nuclear dustbin waste
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एक लाख वर्षों के लिए किया जाएगा सील

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इतना ही नहीं, फिर इस कचरे को लभगभ एक लाख वर्षों के लिए सील कर दिया जाएगा. इस अवधि में क्षरण (Erosion) होकर रेडियोएक्टिव पदार्थ लगभग उसी स्थिति में पहुंच जाएगा, जिस स्थिति में जमीन के अंदर मौजूद प्राकृतिक यूरेनियम अयस्क (uranium ore) होता है.

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कहां बनाया गया है यह परमाणु डस्टबिन?

कहां बनाया गया है यह परमाणु डस्टबिन?3 / 7

यह परमाणु डस्टबिन दक्षिण-पश्चिम फिनलैंड के यूराजोकी स्थित जंगलों में जमीन से 433 मीटर की गहराई में बनाया गया है. यहां अरबों वर्ष पुरानी चट्टानों में सुरंगे बनाकर रास्ता बनाया गया है. इस डस्टबिन में दशकों से परमाणु बिजली बनाने के बाद बचे हुए रेडियोएक्टिव कचरे को दफनाने की तैयारी की जा रही है.

कहां से आता है परमाणु कचरा?

कहां से आता है परमाणु कचरा? 4 / 7

हर परमाणु संयंत्र से ऐसा कचरा निकलता है जो हजारों वर्षों तक रेडियोएक्टिव बनाता रहता है. पिछली सदी के छठे दशक में जब परमाणु संयंत्र शुरू हुए थे, तब से अलग-अलग देश परमाणु कचरे को ठिकाने लगाने की समस्या से जूझ रहे हैं. अब तक इस कचरे का अधिकतर हिस्सा अस्थायी तौर पर बने पानी के कुंडों में ठंडा होने के लिए रखा जाता रहा है, लेकिन यह समस्या का अस्थायी हल है.

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फिनलैंड ने खोजा स्थायी समाधान

फिनलैंड ने खोजा स्थायी समाधान5 / 7

1.9 अरब साल पुरानी चट्टानों में सुरंगे बनाकर तैयार किया गया ओनकॉलो दुनिया का पहला ऐसा स्थायी डस्टबिन बनने जा रहा है, जहां परमाणु कचरे को हमेशा के लिए सुरक्षित रखा जाएगा. फिनलैंड की परमाणु सुरक्षा एजेंसी इस महीने इसे अंतिम मंजूरी देने वाली है, जिसके बाद इसके संचालन का लाइसेंस जारी किया जा सकेगा.

इस साल के आखिर या अगले साल की शुरुआत में शुरू होगा काम

इस साल के आखिर या अगले साल की शुरुआत में शुरू होगा काम6 / 7

परमाणु संयंत्र संचालित करने वाली कंपनी टीवीओ के मुख्य कार्यकारी अधिकारी फिलिप बोर्डारियर ने 'साइंस अलर्ट न्यूज' को बताया, 'उम्मीद है हम इस वर्ष के आखिर तक या अगले वर्ष की शुरुआत में यहां काम शुरू कर देंगे.'

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कैसे रखेंगे परमाणु कचरे को सुरक्षित?

कैसे रखेंगे परमाणु कचरे को सुरक्षित?7 / 7

जमीन के ऊपर परमाणु कचरे की छड़ों को तांबे के बने मोटे और जंगरोधी डिब्बों में बंद किया जाएगा. इसके बाद इन डिब्बों को 433 मीटर की गहराई तक उतारकर सुरंग के फर्श में खोदे गए छेदों के अंदर डाला जाएगा. इन छेदों को 'बेंटोनाइट' नामक चिकनी मिट्टी से भर दिया जाएगा. यह एक प्राकृतिक खनिज है जो गीला होने पर फूल जाता है और एक मजबूत सील का काम करता है. इस डस्टबिन में 6500 टन यूरेनियम कचरा रखने की क्षमता है.

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लेखक के बारे में

Versha Singh

Versha Singh

वर्षा स‍िंह News 24 ड‍िजिटल में बतौर सीन‍ियर सब एड‍िटर के पद पर कार्यरत हैं. वर्षा को ड‍िजिटल मीड‍िया में 6 साल से अधि‍क का अनुभव है. राष्‍ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और समसमाय‍िक व‍िषयों पर वर्षा की अच्‍छी पकड़ है. इसके अलावा राजनीत‍िक, क्राइम और ट्रेंडिंग खबरें भी ल‍िखती हैं. वर्षा ने मास्टर इन न्यू मीडिया टेक्नोलॉजी की पढ़ाई माखन लाल चतुर्वेदी यूनिवर्सिटी, भोपाल से की है और जर्नलिज्म एवं मास कम्युनिकेशन में स्नातक की डिग्री लखनऊ विश्वविद्यालय से प्राप्त की है. वर्षा अपने करियर में Jagran New Media, Asia News International (ANI) और ETV Bharat जैसे प्रमुख मीडिया संस्थानों के साथ काम कर चुकी हैं. उन्हें हिंदी और अंग्रेजी दोनों भाषाओं में लेखन और समसामयिक घटनाओं, राजनीति, हाइपरलोकल खबरों और मानवीय रुचि से जुड़ी कहानियों को डिजिटल दर्शकों तक प्रभावी ढंग से पहुंचाने का अनुभव है.
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