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BJP और कांग्रेस ने रचा ‘चक्रव्यहू’, जानें क्या है व्हिप; वक्फ संशोधन बिल पर क्यों करना पड़ा जारी?

वन-लाइन, टू लाइन और थ्री लाइन तीन तरह के व्हिप होते हैं। तीनों को लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदनों में जारी किया जा सकता है। व्हिप का पालन नहीं करने पर राजनीतिक पार्टियां अपने सांसदों पर पार्टी से निष्कासन तक की कार्रवाई कर सकती हैं।

Author Edited By : Amit Kasana Updated: Apr 2, 2025 16:06
Waqf Amendment Bill

भारतीय जनता पार्टी और कांग्रेस दोनों बड़ी पार्टियों ने वक्फ संशोधन बिल 2024 (Waqf amendment bill 2024) पर अपनी-अपनी गोलबंदी कर दी है। दरअसल, कल संसद में बजट सत्र 2024 (Parliament Budget Session 2025) है। बताया जा रहा है कि कल ही वक्फ संशोधन विधेयक पास करने के लिए संसद में रखा जा सकता है। इसी के मद्देनजर बीजेपी के मुख्य सचेतक संजय जायसवाल ने अपने सांसदों को व्हिप जारी कर 2 अप्रैल को संसद में उपस्थित रहने की हिदायत दी है।

इतना ही नहीं बीजेपी ने 3 अप्रैल के लिए अपने राज्यसभा सांसदों को भी व्हिप जारी किया है। दोनों सदन के सदस्यों को साफ निर्देश जारी किए गए हैं कि सदन में कुछ अति महत्वपूर्ण विधायी कार्य पारित किए जाने हैं, ऐसे में आप संसद में मौजूद रहें। उधर, कांग्रेस ने भी लोकसभा में तीन दिन 2, 3 और 4 अप्रैल के लिए व्हिप जारी किया है। इसके अलावा जेडीयू और टीडीपी ने भी अपने सांसदों को व्हिप जारी किया है, पार्टी के सभी सांसदों को तीन दिन सदन में रहने का निर्देश दिया गया है।

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क्या होता है व्हिप? राजनीतिक पार्टियां इसे क्यों करती हैं जारी?

नियमों के अनुसार व्हिप किसी पार्टी द्वारा लोकसभा और राज्यसभा दोनों सदन में अपने सदस्यों को जारी करने का एक अधिकार है। जिसमें विभिन्न राजनीतिक पार्टियां अपने मेंबर्स को किसी स्पेशल विधेयकों, प्रस्तावों या संकल्पों पर चर्चा और निर्णय के दौरान होने वाले मतदान के बारे में जानकारी देती है। इसके अलावा उन्हें चर्चा के दौरान सदन में उपस्थित रहने का आदेश देती है।

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कौन जारी कर सकता है व्हिप? 

व्हिप पार्टी सचेतक जारी करता है, बता दें कि पार्टी का नामित सदस्य ही सचेतक होता है। सचेतक सदन में अपने सदस्यों की उपस्थिति तथा किसी विधेयक के चर्चा के दौरान पार्टी निर्देशों का पालन सुनिश्चित किए जाने के लिए उत्तरदायी होता है। दरअसल, व्हिप का प्राइमरी मकसद अपने पार्टी सदस्यों का सदन में अनुशासन बनाए रखने, किसी बिल पर निर्णय लेने में एकरूपता सुनिश्चित करने और पार्टी में दलबदल या असंतोष को रोकना होता है।

पालन नहीं करने पर सांसदों पर हो सकता है ये एक्शन

  • नियमों के अनुसार पार्टी व्हिप का पालन नहीं करने पर पार्टी अपने सांसद या विधायक को दलबदल विरोधी कानून के तहत पार्टी से निष्कासित कर सकती है।
  • राजनीतिक पार्टियों को भारतीय संविधान के अनुच्छेद 100 में व्हिप का अधिकार दिया गया है।

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तीन तरह के होते हैं व्हिप, सांसदों की ये होती है जिम्मेदारी? 

वन-लाइन व्हिप: जानकारी के अनुसार यह किसी भी सदस्य को वोट के बारे में जानकारी देने के लिए जारी किया जाता है। दरअसल, यह किसी सदस्य को पार्टी लाइन का पालन न करने का निर्णय लेने की स्थिति में दूर रहने में सक्षम बनाता है।

टू-लाइन व्हिप: राजनीतिक पार्टियां इसे अपने सदस्यों को मतदान होने पर सदन में उपस्थित रहने का निर्देश देने के लिए जारी करती हैं। इसमें मतदान के पैटर्न पर कोई विशेष निर्देश नहीं दिए जाते हैं।

थ्री-लाइन व्हिप: ये वन और टू दोनों में से सबसे ताकतवर व्हिप होता है। इसमें सदस्यों को मतदान में उपस्थित रहना होता है तथा अपने मत को पार्टी के निर्देशानुसार ही देना होता है। बताते चलें कि कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने वक्फ संशोधन बिल पर अपने सदस्यों के लिए थ्री लाइन व्हिप जारी किया है।

ये भी पढ़ें: वक्फ संशोधन बिल संसद में कैसे होगा पास? TDP ने दिया समर्थन तो JDU ने जताई अपनी आपत्तियां

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First published on: Apr 01, 2025 06:59 PM

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