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50% ट्रंप टैरिफ से निपटने को कितना तैयार है भारत? आम आदमी से इकोनॉमी तक पड़ेगा असर

Trump Tariffs: भारत ने 50 प्रतिशत ट्रंप टैरिफ से निपटने की तैयारी कर ली है। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से बीते दिन हाई लेवल मीटिंग बुलाई गई थी, जिसमें टैरिफ को लेकर चर्चा हुई। टैरिफ से निपटने के तरीकों पर बात करके एक ड्राफ्ट तैयार किया गया। आइए जानते हैं कि टैरिफ से निपटने से लिए भारत क्या-क्या तरीके अपना सकता है?

Author Written By: News24 हिंदी Updated: Aug 27, 2025 07:37
Trump Tariffs | Donald Trump | PM Modi
भारत ने टैरिफ से निपटने के लिए प्लानिंग कर ली है।

India Planning To Deal Tariffs: अमेरिका द्वारा भारत पर लगाया गया 50 प्रतिश टैरिफ आज से लागू हो गया है। भारतीय समय के अनुसार आज सुबह 9.31 बजे अमेरिका को भारत द्वारा भेजे जाने वाले निर्यात पर 50 प्रतिशत अमेरिकी टैरिफ लगेगा। भारतीय अर्थव्यवस्था और GDP पर राष्ट्रपति ट्रंप के टैरिफ का गहरा असर पड़ेगा, लेकिन भारत इस टैरिफ से निपटने के लिए तैयार है। प्रधानमंत्री मोदी ने आर्थिक दबाव के आगे नहीं झुकने की प्रतिबद्धता जताई है।

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टैरिफ को बताया WTO नियमों का उल्लंघन

प्रधानमंत्री मोदी ने ट्रंप के 50 प्रतिशत टैरिफ को विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों का उल्लंघन बताया है और जवाबी टैरिफ लगाने एवं निर्यात के लिए नए बाजार तलाशने की प्रतिबद्धता जताई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के अहमदाबाद में विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास करने के बाद लोगों से स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने की अपील की, ताकि अमेरिकी टैरिफ को जवाब दिया जा सके। दुकानदार स्वदेशी बोर्ड लगाएं, ताकि घरेलू बाजार को मजबूती मिले।

भारत ने अपनाई है ये रणनीति

बता दें कि अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ से निपटने के लिए भारत ने खास रणनीति अपनाई है। भारत ट्रंप टैरिफ का कूटनीतिक विरोध कर सकता है। अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगा सकता है। निर्यात के लिए वैकल्पिक बाजारों की तलाश कर सकता है। घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करने के तरीकों पर काम कर सकता है, ताकि मेक इन इंडिया का सपना साकार हो।

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रूस के साथ व्यापारिक संबंध बनाए रखेगा और इन्हें और मजबूत करने की दिशा में काम कर सकता है। आत्मनिर्भर भारत पर फोकस करके टैक्स सुधारों पर काम कर सकता है। अलग-अलग देशों के साथ व्यापार साझेदारियां करके टैरिफ के असर को कम कर सकता है। भारत के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था टैरिफ की चुनौती से उबरने में सक्षम है।

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अमेरिका पर लग सकता है जवाबी टैरिफ

बता दें कि भारत ने ट्रंप टैरिफ के मुद्दे को विश्व व्यापार संगठन (WTO) में चुनौती दी है। भारत ने WTO के समक्ष मुद्दा उठाया और कहा कि अमेरिका ने राष्ट्रीय सुरक्षा का हवाला देते हुए विश्व व्यापार संगठन के नियमों का उल्लंघन किया है। इसलिए अब भारत WTO के नियमों के अनुसार अमेरिका पर जवाबी टैरिफ लगा सकता है। अमेरिका से आने वाले सेब, बादाम, शराब आदि पर जवाबी टैरिफ लगाने को लेकर भारत वित्त मंत्रालय और अर्थशास्त्रियों से विचार-विमर्श कर रहा है।

निर्यात के लिए नए बाजारों की तलाश

भारत ने अमेरिका के 50 प्रतिशत टैरिफ के असर को कम करने के लिए नए बाजार तलाशने पर विचार कर रहा है। भारत अब निर्यात के लिए जापान, चीन, ब्रिटेन और यूरोपीय संघ के साथ बातचीत कर सकता है। समुद्री खाद्य पदार्थों को निर्यात के लिए इन बाजारों में भेज सकता है। इन देशों के बाजारों में भारत के समुद्री खाद्य पदार्थों की मांग ज्यादा हो सकती है। इसके लिए भारत और जापान के बीच आगामी शिखर बैठक में बातचीत हो सकती है।

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घरेलू अर्थव्यवस्था को मजबूत करेंगे

भारत सरकार का फोकस ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘मेक इन इंडिया’ को मजबूत करना है। इस दिशा में भारत ने कदम बढाते हुए बीते दिन गुजरात के हंसलपुर में पहली इलेक्ट्रिक कार ‘ई-विटारा’ को लॉन्च किया। यह कार 100 से ज्यादा देशों में निर्यात की जाएगी। यह कदम आत्म निर्भर भारत और वैश्विक बाजारों में भारत की पहुंच का प्रतीक है। GST की दरों में सुधार करके टैक्स सुधार करने की योजना भी केंद्र सरकार बना रही है। इससे कंज्यूमर प्रोड्क्ट्स के दाम 10% घटेंगे, जिससे घरेलू खपत बढ़ेगी और टैरिफ का कम प्रभाव पड़ेगा।

रूस के साथ व्यापार की रणनीति

बता दें कि अमेरिका ने भारत पर 25 प्रतिशत अतिरिक्त टैरिफ इसलिए लगाया है, क्योंकि भारत रूस से तेल और हथियार खरीद रहा है। यूक्रेन के साथ युद्ध खत्म करने के लिए रूस पर दबाव डालने के लिए अमेरिका ने भारत को जरिया बनाया है, लेकिन भारत ने रूस से व्यापार जारी रखने का ऐलान किया है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि भारत रूस से तेल खरीदता रहेगा, क्योंकि यह भारत के एनर्जी सेक्टर के लिए अनिवार्य है। भारत रूस से हथियार खरीदता रहेगा, क्योंकि यह भारत की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी है।

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लॉबिंग और व्यापारिक साझेदारियां

बता दें कि भारत ने 65 लाख रुपये प्रतिमाह पेमेंट पर ‘मरकरी पब्लिक अफेयर्स’ नामक लॉबिंग फर्म को हायर किया है, जिसका काम अमेरिका में भारत के हितों का प्रतिनिधित्व करते हुए ट्रंप सरकार के साथ भारत की ओर से बातचीत करना होगा। इसके अलावा ब्रिटेन, यूरोपीय संघ, रूस और आसियान देशों के साथ व्यापारिक साझेदारियां करके भी ट्रंप टैरिफ के प्रभाव को कम कर सकता है। सस्ते कर्ज देकर ट्रंप टैरिफ से प्रभावित सेक्टरों का नुकसान कम किया जा सकता है।

First published on: Aug 27, 2025 07:00 AM

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