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कोर्ट का डिजिटल फैसला, कनाडा में रह रहे भारतीय दंपति का तलाक ठाणे कोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से किया मंजूर

महाराष्ट्र के ठाणे की जिला अदालत ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कनाडा में रह रहे एक भारतीय दंपती को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आपसी सहमति से तलाक की मंजूरी दे दी। पढ़िए पूरी रिपोर्ट।

Author Edited By : Raghav Tiwari
Updated: Feb 10, 2026 14:46

आधुनिकता हमारे जीवन का अहम हिस्सा बनती जा रही है। एक कॉल से हजारों किमी दूर अपनी बात अपनी बात कुछ ही सेकंडों में पहुंचा सकते हैं। इसके साथ ही कई बार कानूनी मामलों में भी वीडियो कॉल के जरिए हमारी गवाही पूरी हो जाती है। इससे लोगों को समय और पैसा दोनों बचता है। ऐसा ही मामला महाराष्ट्र में देखने को मिला है।

तकनीक के बढ़ते उपयोग के बीच महाराष्ट्र के ठाणे की जिला अदालत ने एक अहम फैसला सुनाते हुए कनाडा में रह रहे एक भारतीय दंपती को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आपसी सहमति से तलाक की मंजूरी दे दी। अदालत ने विशेष विवाह अधिनियम के तहत दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए विवाह विच्छेद की अंतिम डिक्री जारी की।

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इस फैसले को विदेश में रह रहे भारतीयों के लिए राहत भरा कदम माना जा रहा है, क्योंकि अक्सर कानूनी प्रक्रियाओं के लिए भारत आना उनके लिए मुश्किल हो जाता है।

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कोर्ट के आदेश के बाद दोनों की साथ रहने की संभावना खत्म हो गई है। जिला जज आर एस भाकरे ने आदेश में कहा कि दोनों पक्षों ने स्वेच्छा से तलाक का अनुरोध किया। आपसी विवादों का समाधान भी कर लिया है। अदालत के अनुसार अब दोनों के साथ रहने की कोई संभावना नहीं बची है, इसलिए विवाह को समाप्त करना न्यायसंगत है। करीब सात महीने से लंबित इस मामले में सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद तलाक की डिक्री जारी की गई।

मीरा रोड में हुई शादी, कनाडा में टूटा रिश्ता पति

बता दें कि पति (31) और पत्नी (24) की शादी 9 मार्च 2022 को ठाणे जिले के मीरा रोड इलाके में हुई थी। बाद में दोनों कनाडा के ओंटारियो प्रांत में बस गए, लेकिन आपसी मतभेद बढ़ने के कारण 10 दिसंबर 2023 से अलग-अलग रहने लगे। पावर ऑफ अटॉर्नी के जरिए आगे बढ़ी प्रक्रिया दोनों ने 18 जून 2025 को आपसी सहमति से तलाक के लिए आवेदन किया। चूंकि वे विदेश में रह रहे थे, इसलिए पूरी कानूनी प्रक्रिया पावर ऑफ अटॉर्नी के माध्यम से संचालित की गई। छह महीने की अनिवार्य अवधि पूरी होने के बाद भी दोनों अपने फैसले पर कायम रहे।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए पेशी अंतिम सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष वीडियो कॉल के माध्यम से अदालत के सामने पेश हुए और स्पष्ट किया कि वे अब साथ नहीं रहना चाहते। अदालत ने उनके शपथपत्र और बयानों की समीक्षा के बाद तलाक को मंजूरी दी।

सभी मुद्दों पर आपसी सहमति अदालत के अनुसार भरण-पोषण, गुजारा भत्ता और भविष्य से जुड़े सभी मामलों पर दोनों पक्षों में पहले ही सहमति बन चुकी थी, जिसके आधार पर अंतिम आदेश पारित किया गया। यह फैसला दिखाता है कि भारतीय न्यायपालिका बदलते समय के साथ तकनीक को अपनाकर न्याय प्रक्रिया को अधिक सुलभ और व्यावहारिक बना रही है, खासकर विदेश में बसे भारतीय नागरिकों के लिए।

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First published on: Feb 10, 2026 02:46 PM

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