MR Shah: सुप्रीम कोर्ट के रिटायर्ड जज एमआर शाह का कहना है कि उन्हें
पीएम मोदी की तारीफ करने पर कोई पछतावा नहीं है। जस्टिस एमआर शाह सोमवार को रिटायर हुए हैं। उन्होंने 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रशंसा की थी जिसके बाद उन्हें केंद्र सरकार का समर्थक बताते हुए उन पर निशाना साधा गया था। उन्होंने कहा है कि वे प्रधानमंत्री के लिए की गई अपनी प्रशंसा के साथ खड़े हैं और वे कुछ लोगों अपनी आलोचना के बारे में चिंतित नहीं हैं।
न्यायमूर्ति एमआर शाह ने 2018 में गुजरात उच्च न्यायालय की हीरक जयंती मनाने के एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को हमारे सबसे लोकप्रिय, प्रिय, जीवंत और दूरदर्शी नेता कहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाह ने कहा कि उनका विवेक स्पष्ट था और उनके निर्णय उनके व्यक्तिगत विचारों से कभी प्रभावित नहीं हुए।
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एमआर शाह ने कहा, "कोई भी एक भी ऐसा उदाहरण नहीं दे सकता है, जिसने न्यायिक पक्ष पर मेरे निर्णय लेने को प्रभावित किया हो। उन्होंने कहा कि जिनके पास कुछ करने को नहीं होता है वो न्यायाधीशों की आलोचना करते हैं। इस बारे में बात करते हुए कि क्या उन्हें अपने बयान पर पछतावा है, उन्होंने कहा कि पछतावे की बात कहां है, मैंने क्या गलत कहा है?
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बोले- न्यायिक पक्ष में एक साथ काम करने का कोई सवाल ही नहीं
क्या गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनके कामकाजी संबंध थे, उन्होंने कहा कि न्यायिक पक्ष में एक साथ काम करने का कोई सवाल ही नहीं है।
शाह ने कहा कि एक न्यायाधीश के रूप में अपने पूरे करियर में मेरे किसी भी राजनेता के साथ घनिष्ठ संबंध नहीं थे और एक न्यायाधीश के रूप में मैंने अपने कर्तव्य को बिना किसी भय, पक्षपात या दुर्भावना के निभाया है।
शाह ने कहा कि मैंने सरकार के खिलाफ कई फैसले पारित किए हैं। जब हम निर्णय देते हैं तो हम इस बात पर विचार नहीं करते हैं कि सत्ता में कौन है?
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न्यायमूर्ति एमआर शाह ने 2018 में गुजरात उच्च न्यायालय की हीरक जयंती मनाने के एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को हमारे सबसे लोकप्रिय, प्रिय, जीवंत और दूरदर्शी नेता कहा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, शाह ने कहा कि उनका विवेक स्पष्ट था और उनके निर्णय उनके व्यक्तिगत विचारों से कभी प्रभावित नहीं हुए।
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एमआर शाह ने कहा, “कोई भी एक भी ऐसा उदाहरण नहीं दे सकता है, जिसने न्यायिक पक्ष पर मेरे निर्णय लेने को प्रभावित किया हो। उन्होंने कहा कि जिनके पास कुछ करने को नहीं होता है वो न्यायाधीशों की आलोचना करते हैं। इस बारे में बात करते हुए कि क्या उन्हें अपने बयान पर पछतावा है, उन्होंने कहा कि पछतावे की बात कहां है, मैंने क्या गलत कहा है?
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बोले- न्यायिक पक्ष में एक साथ काम करने का कोई सवाल ही नहीं
क्या गुजरात उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में उनके कार्यकाल के दौरान पीएम नरेंद्र मोदी के साथ उनके कामकाजी संबंध थे, उन्होंने कहा कि न्यायिक पक्ष में एक साथ काम करने का कोई सवाल ही नहीं है।
शाह ने कहा कि एक न्यायाधीश के रूप में अपने पूरे करियर में मेरे किसी भी राजनेता के साथ घनिष्ठ संबंध नहीं थे और एक न्यायाधीश के रूप में मैंने अपने कर्तव्य को बिना किसी भय, पक्षपात या दुर्भावना के निभाया है।
शाह ने कहा कि मैंने सरकार के खिलाफ कई फैसले पारित किए हैं। जब हम निर्णय देते हैं तो हम इस बात पर विचार नहीं करते हैं कि सत्ता में कौन है?
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