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संसद में पास हुआ SHANTI Bill, एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड को भी मिलेगा कानूनी दर्जा

संसद में गुरुवार को न्यूक्लियर एनर्जी का सस्टेनेबल इस्तेमाल और एडवांसमेंट बिल, 2025 (शांति बिल) पास हो गया. लोकसभा में ये बिल पास होने के एक दिन बाद राज्यसभा में भी इस पर मुहर लग गई है. इस बिल का मकसद भारत के कुल एनर्जी मिक्स में न्यूक्लियर एनर्जी का हिस्सा बढ़ाना, न्यूक्लियर साइंस और टेक्नोलॉजी में इनोवेशन को आसान बनाना और एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड को कानूनी दर्जा देना है.

Author Written By: Versha Singh Updated: Dec 18, 2025 21:52

संसद में गुरुवार को न्यूक्लियर एनर्जी का सस्टेनेबल इस्तेमाल और एडवांसमेंट बिल, 2025 (शांति बिल) पास हो गया. लोकसभा में ये बिल पास होने के एक दिन बाद राज्यसभा में भी इस पर मुहर लग गई है. इस बिल का मकसद भारत के कुल एनर्जी मिक्स में न्यूक्लियर एनर्जी का हिस्सा बढ़ाना, न्यूक्लियर साइंस और टेक्नोलॉजी में इनोवेशन को आसान बनाना और एटॉमिक एनर्जी रेगुलेटरी बोर्ड को कानूनी दर्जा देना है.

चर्चा के दौरान साइंस और टेक्नोलॉजी मिनिस्टर जितेंद्र सिंह ने विपक्षी सदस्यों के सवालों के जवाब दिए और उनकी आशंकाओं को दूर करने की कोशिश की. सिंह ने कहा कि इस बिल में ‘सुरक्षा पहलू को कम नहीं किया गया है.’

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मंत्री जितेंद्र सिंह ने दिया विपक्ष के सवालों का जवाब

जितेंद्र सिंह ने कहा कि नया कानून भारत के कुल एनर्जी मिक्स में न्यूक्लियर एनर्जी का हिस्सा बढ़ाने के मकसद को पूरा करने के लिए बनाया गया है, यह एटॉमिक साइंस और टेक्नोलॉजी में इनोवेशन को आसान बनाएगा. भारत ने 2070 तक इकोनॉमी के डीकार्बनाइजेशन के रोडमैप के साथ एनर्जी इंडिपेंडेंस हासिल करने और 2047 तक 100 गीगा वॉट न्यूक्लियर पावर कैपेसिटी हासिल करने का एक बड़ा टारगेट रखा है.

विपक्ष ने की ये मांग

विपक्ष के सदस्यों ने जोर देकर मांग की कि बिल को स्टैंडिंग या सेलेक्ट कमेटी को भेजा जाए, यह कहते हुए कि इसके बड़े असर होंगे और इसका असर दशकों तक महसूस किया जाएगा. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने लायबिलिटी क्लॉज को कमजोर कर दिया है और पूछा कि क्या वह किसी दबाव में बिल ला रही है. विपक्ष के सदस्यों के अमेंडमेंट को खारिज कर दिया गया.

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यह भी पढे़ं- G RAM G Bill: लोकसभा में शिवराज सिंह का विपक्ष पर जोरदार हमला, अब राज्यसभा में विधेयक पारित करने की तैयारी

बिल को लेकर हुई है लंबी चर्चा

वहीं, जितेंद्र सिंह ने कहा कि बिल बनाने से पहले काफी सलाह-मशविरा किया गया था. उन्होंने आगे कहा, ‘जयराम रमेश जी ने अपनी बात इस सुझाव के साथ शुरू की कि जब नियम बनाए जाएं, तो दूसरों और सभी स्टेकहोल्डर्स की राय पर ध्यान दिया जाना चाहिए. मुझे यह कहने में कोई झिझक नहीं है कि बिल को तैयार होने में लगभग एक साल या उससे ज़्यादा समय लगा है, जिसमें बहुत गंभीर और कई तरह की बातों पर विचार-विमर्श हुआ है.

उन्होंने आगे कहा, मामले में अलग-अलग लेवल पर, इंटर-मिनिस्ट्रियल लेवल पर, सेक्टर लेवल पर, इंडस्ट्री लीडर्स, साइंटिफिक एक्सपर्ट्स, बिजनेस के संभावित पार्टनर्स और यहां तक ​​कि स्टार्टअप्स के साथ भी सलाह-मशविरा किया गया है. इसलिए स्टेकहोल्डर्स के सभी सेक्शन शामिल हुए हैं, और यह प्रोसेस जारी है क्योंकि यह हमारे (सरकार) लिए भी एक नया अनुभव है.’

मंत्री ने कहा कि यह बिल भारत के बड़े न्यूक्लियर एनर्जी इकोसिस्टम का हिस्सा है जिसमें छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर शामिल हैं.

First published on: Dec 18, 2025 09:42 PM

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