'राइट टू रिकॉल' क्या है, किन-किन देशों में लागू, संसद में अब किसने उठाया मुद्दा?

Right To Recall: संसद में AAP सांसद राघव चड्ढा ने ‘राइट टू रिकॉल’ की मांग उठाई. जानिए क्या है ये अधिकार, कैसे करेगा काम और भारत में क्यों है जरूरी.

Raghav Chadha on Right to Recall

Credit: Social Media

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आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने संसद में ‘राइट टू रिकॉल’ (Right to Recall) को लेकर बड़ा मुद्दा उठाया है. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में जनता को सिर्फ नेता चुनने का ही नहीं, बल्कि जरूरत पड़ने पर उन्हें हटाने का भी अधिकार मिलना चाहिए. इस प्रस्ताव के बाद राजनीतिक गलियारों में बहस तेज हो गई है. आइए जानते हैं कि आखिर राइट टू रिकॉल क्या है और ये कैसे काम करती है

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राइट टू रिकॉल क्या है?

राइट टू रिकॉल का मतलब है कि अगर कोई सांसद या विधायक जनता की उम्मीदों पर खरा नहीं उतरता, काम नहीं करता या जनता से जुड़ा नहीं रहता, तो मतदाता उसे 5 साल का कार्यकाल पूरा होने से पहले हटा सकते हैं. अभी भारत में ऐसा कोई कानून नहीं है, जिससे जनता बीच कार्यकाल में अपने प्रतिनिधि को हटा सके. AAP सांसद राघव चड्ढा ने कहा कि कई नेता चुनाव जीतने के बाद जनता से संपर्क तोड़ लेते हैं. जनता के पास उन्हें जवाबदेह बनाने का कोई सीधा तरीका नहीं होता. राइट टू रिकॉल लागू होने से नेता लगातार जनता के संपर्क में रहेंगे और जिम्मेदारी से काम करेंगे.

राइट टू रिकॉल कैसे काम करेगा?

अगर ये कानून बनता है तो प्रक्रिया कुछ इस तरह हो सकती है-
-जनता की ओर से रिकॉल याचिका दाखिल की जाएगी
-तय संख्या में मतदाताओं के हस्ताक्षर जरूरी होंगे
-इसके बाद रिकॉल वोटिंग होगी
-अगर बहुमत नेता के खिलाफ गया, तो उसका पद खत्म हो सकता है

दुनिया के कई देशों में लागू

अमेरिका, कनाडा, स्विट्जरलैंड जैसे देशों में राइट टू रिकॉल पहले से लागू है. भारत में ये अधिकार कुछ राज्यों में पंचायत स्तर पर मौजूद है, लेकिन सांसद और विधायक स्तर पर अब तक लागू नहीं हुआ है. समर्थकों का मानना है कि भारत में राइट टू रिकॉल के लागू होने से भ्रष्टाचार पर रोक लगेगी और नेता जनता के प्रति ज्यादा जवाबदेह होंगे. हालांकि आलोचकों को डर है कि इसका राजनीतिक दुरुपयोग भी हो सकता है. फिलहाल ये प्रस्ताव चर्चा में है, लेकिन आगे चलकर ये भारतीय राजनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है.

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Varsha Sikri

Varsha Sikri

वर्षा सिकरी News24 हिंदी डिजिटल में सीनियर सब एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. जर्नलिज्म में 9 साल का अनुभव रखने वाली वर्षा सिकरी राष्ट्रीय, अंतरराष्ट्रीय और राज्यस्तरीय न्यूज और चुनावी कवरेज करती हैं. वर्षा सिकरी ने सितंबर 2017 में इंडिया टीवी से अपने करियर की शुरुआत की थी, जिसके बाद से उन्होंने रिपब्लिक टीवी, जी न्यूज, आज तक जैसे चैनलों में काम किया. फिलहाल वो News24 के डिजिटल में सेवाएं दे रही हैं. 9 साल के करियर में वर्षा सिकरी ने नेशनल, इंटरनेशनल, पॉलिटिकल, क्राइम टॉपिक कवर करने में विशेषज्ञता हासिल की. वर्षा सिकरी का पत्रकारिता में अनुभव: 9 साल योग्यता: NRAI स्कूल ऑफ मास कम्यूनिकेशन से ग्रेजुएशन करने के बाद वर्षा सिकरी ने मीडिया में अपने करियर की शुरुआत की. उन्होंने बतौर एंकर और रिपोर्टर भी काम किया है.
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