पहलगाम जैसे आतंकी हमलों को रोकने के लिए सेना ने J&K की ऊंची जगहों पर बनाए 43 नए बेस

पहलगाम जैसे आतंकी हमलों को रोकने के लिए सेना और CRPF ने जम्मू-कश्मीर में 6,000 फीट से अधिक ऊंचाई पर 43 टेम्पररी ऑपरेटिंग बेस स्थापित किए हैं. कश्मीर घाटी और जम्मू क्षेत्र के संवेदनशील इलाकों में चौबीसों घंटे निगरानी और आतंकियों की घुसपैठ रोकने के लिए सुरक्षा ग्रिड मजबूत किया गया है. पढ़िए जम्मू-कश्मीर से आसिफ सुहाफ की रिपोर्ट.

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दूर-दराज के इलाकों में कमजोरियों को दूर करने के लिए एक बड़ा कदम उठाते हुए, आर्मी और सेंट्रल रिजर्व पुलिस फोर्स (CRPF) की मिली-जुली सेना ने जम्मू-कश्मीर पुलिस के साथ मिलकर पूरे जम्मू-कश्मीर में 6,000 फीट से ज्यादा ऊंचाई पर 43 टेम्पररी ऑपरेटिंग बेस (TOB) बनाए हैं. ये चौकियां खास तौर पर बनाई गई हैं. कश्मीर घाटी में 26 और जम्मू में 17-इनका मकसद चौबीसों घंटे निगरानी करना और अप्रैल 2025 के जानलेवा पहलगाम हमले के बाद ऊंचे, मुश्किल से पहुंचने वाले इलाकों में भागने वाले आतंकवादियों को रोकना है.

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पहलगाम हत्याकांड, जिसमें 25 टूरिस्ट समेत 26 लोगों की जान चली गई थी, ने ऊंची जगहों की सुरक्षा में कमियों को उजागर किया, क्योंकि आतंकवादियों ने पकड़े जाने से बचने के लिए ऊबड़-खाबड़ जगहों का फायदा उठाया. सिक्योरिटी सूत्रों ने News24 को बताया कि एडवांस्ड सर्विलांस गियर, ड्रोन और क्विक-रिस्पॉन्स टीमों से लैस TOBs एक प्रोएक्टिव बदलाव को दिखाते हैं. एक सीनियर पुलिस ऑफिसर ने नाम न बताने की शर्त पर कहा, “टेरर ग्रुप एंटी-टेरर ऑपरेशन से बचने के लिए ऊपर की ओर बढ़ रहे हैं; ये बेस यह पक्का करते हैं कि हम ऊंचाइयों पर हावी रहें.”

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कुपवाड़ा, बारामूला, अनंतनाग, पुलवामा, शोपियां, कुलगाम, डोडा, उधमपुर, कठुआ और पुंछ, राजौरी जैसे जिलों में खास पहाड़ियों और दर्रों पर मौजूद ये बेस तेजी से तैनाती और रियल-टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग को मुमकिन बनाते हैं. यह घुसपैठ की कोशिशों में बढ़ोतरी के बीच हुआ है, ऑफिशियल डेटा के मुताबिक, पिछले साल से J&K में 160 से ज्यादा टेररिस्ट मारे गए हैं. लोकल चरवाहों और गांववालों ने सुरक्षित चराई के रास्तों का हवाला देते हुए इस मौजूदगी का स्वागत किया है, हालांकि कड़ाके की सर्दियों में लॉजिस्टिक्स को लेकर चिंता बनी हुई है.

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CRPF के डायरेक्टर जनरल अनीश दयाल सिंह ने हाल ही में श्रीनगर में एक ब्रीफिंग के दौरान इस बात पर जोर दिया कि ये TOBs आर्मी और J&K पुलिस के साथ मिलकर एक “लेयर्ड सिक्योरिटी ग्रिड” का हिस्सा हैं. जैसे-जैसे वसंत का मौसम पिघल रहा है, एक्सपर्ट्स का अनुमान है कि आतंकी ठिकानों को खत्म करने के लिए ऑपरेशन तेज किए जाएंगे.

जैसे J&K में शांति कमजोर हो रही है, ये ऊंचे पहरेदार जम्मू-कश्मीर में हिंसा के साये से पहाड़ों को वापस पाने के लिए फोर्स के पक्के इरादे का संकेत देते हैं.

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