---विज्ञापन---

देश

गोवा अग्निकांड के लपेटे में क्यों आए सरकारी अफसर? 50 से ज्यादा बयान दर्ज, पंचायत अधिकारियों पर एक्शन

Goa Night Club Fire Case: गोवा क्लब अग्निकांड मामले में हर दिन नए खुलासे हो रहे हैं. पुलिस की जांच में ये सामने आया है कि सरकारी तंत्र से भी बड़ी चूक हुई है. गोवा पुलिस ने अब तक इस मामले में क्या एक्शन लिए हैं और किसकी लापरवाही से 25 लोगों की मौत हुई है, पढ़िए इस रिपोर्ट में.

Author Written By: Ankush jaiswal Updated: Dec 13, 2025 10:44
Goa Night Club Fire
Credit: Social Media

गोवा नाइट क्लब अग्निकांड मामले में ताबड़तोड़ एक्शन जारी है. अब तक गोवा पुलिस ने इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार किया. पुलिस 50 से ज्यादा लोगों के बयान दर्ज कर चुकी है, जिनमें क्लब के कर्मचारी, चश्मदीद और सरकारी विभागों के अधिकारी शामिल हैं. जांच में साफ नजर आ रहा है कि ये हादसा सिर्फ लापरवाही नहीं, बल्कि सरकारी तंत्र की गंभीर चूक की वजह से भी हुआ है.

विवादित है क्लब की जमीन

बर्च बाय रोमियो लेन क्लब के मालिक सौरभ लूथरा और गौरव लूथरा के बिजनेस पार्टनर अजय गुप्ता की भी गिरफ्तारी हो चुकी है. जांच में पता चला है कि इन लोगों ने 28 नवंबर 2023 को प्रॉपर्टी के मालिक सुरिंदर कुमार खोसला के साथ लीज एग्रीमेंट किया था.क्लब की जमीन भी विवादित है, गोवा के सिविल कोर्ट में उसपर केस जारी है.

---विज्ञापन---

ये भी पढ़ें: लूथरा ब्रदर्स कैसे आएंगे भारत और थाईलैंड से लाने में कितना लगेगा समय? जानें आरोपियों के प्रत्यर्पण की प्रक्रिया

पंचायत की बड़ी चूक

जांच में पता चला है कि बर्च बाय रोमिनो लेन को चलाने के लिए लॉकल अर्पोरा पंचायत और सरकारी डिपार्टमेंट ने करीब 7 मंजूरियां दी थीं. सूत्रों की मानें तो ये लाइसेंस जारी करना पंचायत के हाथ में नहीं होता. पंचायत ने 16 दिसंबर 2023 को बार, रेस्टॉरेंट और क्लब के लिए ट्रेड लाइसेंस जारी किया था, जिसकी वैलिडिटी मार्च 2024 तक थी. पंचायत के सरपंच रोशन वी. रेडकर ने लैंडलॉर्ड को बिजली, पानी कनेक्शन और रेनोवेशन के लिए तीन NOC भी जारी की थीं. मार्च 2024 में ट्रेड लाइसेंस खत्म हो गया, लेकिन इससे क्लब पर कोई असर नहीं पड़ा. गोवा पंचायत राज अधिनियम के एक्ट- 72 A के मुताबिक पंचायत ऐसे बिल्डिंग को सील कर सकती है, लेकिन उन्होंने क्लब के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया. गिरफ्तारी के डर से सरपंच रोशन रेडकर और पंचायत सचिव रघुवीर भागकर ने गोवा सेशन कोर्ट में अर्जी डाली है. उनका कहना है कि क्लब में हुए हादसे में उनका कोई हाथ नहीं है. इस मामले पर 16 दिसंबर को सुनवाई होगी.

---विज्ञापन---

नहीं हुई क्लब की फायर सेफ्टी जांच

जांच के मुताबिक गोवा स्टेट पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने 22 अप्रैल 2024 को क्लब चलाने की इजाजत दी थी, जो 31 जनवरी 2039 तक वैलिड है. क्लब को 150 लोगों के बैठने की परमिशन मिली थी, लेकिन हकीकत में यहां कई गुना लोग मौजूद रहते थे. टेकनिकल जांच रिपोर्ट में ये भी सामने आया है कि क्लब ने फायर डिपार्टमेंट के नियमों का उल्लंघन करते हुए जरूरी फायर सेफ्टी एनओसी नहीं ली थी, जोकि बहुत बड़ी लापरवाही थी. पूरी जांच में अब तक गोवा सरकार ने तीन अधिकारियों को सस्पेंड किया है. जिनमें पंचायत निदेशक सिद्धि तुषार हरलणकर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की तत्कालीन सदस्य सचिव डॉ. शमीला मोंटेइरो और अर्पोरा-नागोआ पंचायत के तत्कालीन सचिव रघुवीर डी.बागकर शामिल हैं

ये भी पढ़ें: Goa Night club Fire Case में मृतक के परिवार का बड़ा आरोप, ‘टुकड़े-टुकड़े में दे रहे थे बॉडी’

First published on: Dec 13, 2025 10:36 AM

संबंधित खबरें

Leave a Reply

You must be logged in to post a comment.