Om Pratap
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PM Modi Speech: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में गुरुवार को कहा कि दिन-रात खुद को खपाना पड़ेगा तो खपाएंगे, लेकिन देश की आशाओं को चोट नहीं पहुंचने देंगे। उन्होंने कहा कि विकास की गति क्या है, नीयत क्या है, दिशा क्या है, परिणाम क्या है… यह बहुत मायने रखता है। हम जनता की प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं के आधार पर मेहनत और परिश्रम कर रहे हैं।
बता दें कि अडाणी मुद्दे पर सरकार पर विपक्ष के लगातार हमले का मुकाबला करने के एक दिन बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को राज्यसभा में बोल रहे थे। इस दौरान विपक्ष हंगामा करती रही है और नारे लगाती रही है। बुधवार को लोकसभा में पीएम मोदी ने बिजनेस टाइकून गौतम अडाणी का उल्लेख नहीं किया था।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि जनधन, आधार और मोबाइल… ये वो त्रिशक्ति है, जिससे पिछले कुछ वर्षों में 27 लाख करोड़ रुपये DBT के माध्यम से सीधा हितधारकों के खातों में गए हैं। इससे 2 लाख करोड़ रुपये से अधिक रुपया… जो किसी इको-सिस्टम के हाथों में जा सकता था वो बच गया। अब जिनको ये पैसा नहीं मिल पाया, उनका चिल्लाना स्वाभाविक है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने बैंकों का एकीकरण इस इरादे से किया था कि गरीबों को बैंकों का अधिकार मिले, लेकिन इस देश के आधे से अधिक लोग बैंक के दरवाजे तक नहीं पहुंच पाए थे। हमने स्थायी हल निकालते हुए जन-धन बैंक खाते खोले। इसके जरिए देश के गांव तक प्रगति को ले जाने का काम हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हर योजना के जो लाभार्थी हैं उन तक इसका शत-प्रतिशत लाभ कैसे पहुंचे हम इसे सुनिश्चित कर रहे हैं। अगर सच्ची पंथ निरपेक्षता है तो यही है और हमारी सरकार इस राह पर निरंतर आगे बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण के लिए Infrastructure, Scale और Speed का महत्व हम समझते हैं। जब देश के नागरिकों का विश्वास बनता है तो वो लाखों-करोड़ों लोगों के सामर्थ्य में बदल जाता है। हमने लोगों को उनके भाग्य पर नहीं छोड़ा… हमने देश का आने वाला कल उज्ज्वल बनाने का रास्ता अपनाया।
पीएम ने कहा कि 60 साल कांग्रेस के परिवार ने गड्ढे ही गड्ढे कर दिए थे… हो सकता है उनका इरादा न हो, लेकिन उन्होंने किए। जब वो गड्ढे खोद रहे थे, 6 दशक बर्बाद कर चुके थे… तब दुनिया के छोटे-छोटे देश भी सफलता के शिखरों को छू रहे थे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बीते दशकों में अनेक बुद्धिजीवियों ने इस सदन से देश को दिशा दी है, देश का मार्गदर्शन किया है। इस देश में जो भी बात होती है उसे देश बहुत गंभीरता से सुनता है। यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कुछ लोगों का व्यवहार और वाणी न केवल सदन, बल्कि देश को निराश करने वाली है।
उन्होंने कहा कि इस प्रकार की वृति वालों को मैं यही कहूंगा- कीचड़ उसके पास था, मेरे पास गुलाल, जो भी जिसके पास था उसने दिया उछाल… जितना कीचड़ उछालोगे, कमल उतना ही खिलेगा।
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