भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने पदभार संभालने के कुछ महीनों बाद सोमवार को अपनी नई टीम का ऐलान किया है. टीम में अनुभव और नए चेहरों का संतुलित तालमेल देखने को मिला है. लेकिन एक नियुक्ति ने सियासी गलियारों में हलचल मचा दी है. मोदी सरकार में केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल को पार्टी का राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष बनाया गया है.
पीयूष गोयल की संगठन में अहम पद पर वापसी के बाद से ही कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या आने वाले दिनों में संभावित मोदी कैबिनेट फेरबदल में उन्हें मंत्री पद से हटाया जा सकता है?
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‘एक व्यक्ति, एक पद’
भाजपा का एक अलिखित नियम रहा है ‘एक व्यक्ति, एक पद’. इसके तहत नेता या तो सरकार में मंत्री पद रह सकते हैं या फिर संगठन का काम देख सकते हैं. इसी वजह से गोयल की नियुक्ति के बाद सवाल उठ रहे हैं कि क्या उनका सरकारी रोल समाप्त होकर पूरी तरह संगठनात्मक भूमिका शुरू होने जा रही है?
हालांकि, पार्टी में इस नियम के अपवाद भी रहे हैं. पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा जून 2024 में मोदी कैबिनेट में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री बने थे और जनवरी 2026 में नितिन नवीन के अध्यक्ष बनने तक वे दोनों पदों पर बने रहे. ऐसे में यह साफ नहीं है कि गोयल को तुरंत कैबिनेट से हटाया ही जाएगा.
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बता दें, पीयूष गोयल के पिता, वेद प्रकाश गोयल भी दो दशक से ज्यादा समय तक भाजपा के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष रह चुके हैं.
नितिन नवीन की टीम में बड़े नाम
भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की नई टीम में कई दिग्गज नेताओं की केंद्रीय संगठन में वापसी हुई है. पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया है. राम माधव और वसुंधरा राजे को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाया गया है.
इनके अलावा तीरथ सिंह रावत, डी. पुरंदेश्वरी, वर्षाबेन दोशी, भारती प्रवीण पवार, मनप्रीत सिंह बादल, लाल सिंह आर्य, एम नागराजा और मधुचंद्र कर नए उपाध्यक्ष बने हैं. वहीं वसुंधरा राजे सिंधिया, बैजयंत पांडा, रेखा वर्मा और तारिक मंसूर उपाध्यक्ष पद पर बरकरार हैं. विनोद तावड़े और सुनील बंसल राष्ट्रीय महासचिव बने रहेंगे, जबकि बीएल संतोष राष्ट्रीय संगठन महासचिव की जिम्मेदारी संभालते रहेंगे. अनिल एंटनी राष्ट्रीय सचिव और अनिल बलूनी मुख्य मीडिया प्रभारी बने रहेंगे.
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पीयूष गोयल की नियुक्ति के मायने?
पीयूष गोयल मोदी सरकार के आर्थिक मामलों में केंद्र में रहते हैं. उनके कार्यकाल में कई देशों से ट्रेड डील हुई है. फिलहाल वे अमेरिका के साथ जारी अहम FTA वार्ताओं का नेतृत्व भी कर रहे हैं. गोयल को कोषाध्यक्ष बनाए जाने के पीछे दो वजह हो सकती हैं. पहला पार्टी उनके लंबे वित्तीय और चुनाव प्रबंधन अनुभव का इस्तेमाल संगठन को मजबूत करने में करना चाहती है. वहीं, दूसरा पार्टी उन्हें सरकार से अलग कर संगठन में पूरी तरह सक्रिय करने की जमीन तैयार कर रही है.
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