नई दिल्ली के चाणक्यपुरी स्थित पाकिस्तानी हाई कमीशन की जिस जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने के लिए भारत सरकार ने बुलडोजर कार्रवाई की, उस जमीन का स्वामित्व भारत सरकार के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस के पास है. विदेशी मिशनों को यह जमीन एक तय समझौते और लंबे समय के लिए लीज पर दी जाती है, जिस पर उनका मालिकाना हक नहीं बल्कि राजनयिक उपयोग का अधिकार होता है. राजनयिक संबंधों पर 1961 के वियना कन्वेंशन के तहत यह पूरी तरह साफ है कि विदेशी दूतावास अपने परिसर का इस्तेमाल किसी भी तरह की व्यावसायिक या व्यापारिक गतिविधियों के लिए नहीं कर सकते. समझौते के तहत संबंधित देश को जमीन पर मालिकाना हक नहीं, बल्कि केवल राजनयिक उपयोग का अधिकार मिलता है.

भारत सरकार ने पाकिस्तान हाई कमीशन से हटाया सुरक्षा घेरा, अवैध अतिक्रमण पर चला बुलडोजर

---विज्ञापन---

क्या कहता है वियना कन्वेंशन?

  • 1961 के 'वियना कन्वेंशन ऑन डिप्लोमैटिक रिलेशंस' के अनुच्छेद-22 के तहत विदेशी दूतावासों और उच्चायोगों के अंदरूनी परिसर को विशेष संरक्षण प्राप्त है.
  • परिसर की सुरक्षा: दूतावास के भीतर के क्षेत्र को 'अल्लंघनीय' माना जाता है. इसका मतलब है कि मेजबान देश यानी भारत की पुलिस या कोई भी प्रशासनिक एजेंसी बिना मिशन प्रमुख की इजाजत के अंदर दाखिल नहीं हो सकती. भले ही परिसर के भीतर राजनयिक छूट लागू हो, लेकिन उस भू-भाग पर अंतिम संप्रभुता मेजबान देश की ही रहती है.

भारत में जमीन आवंटन को लेकर एंबेसी से जुड़े नियम

भारत में विदेशी दूतावासों के लिए जमीन आवंटन को लेकर कड़े और स्पष्ट नियम तय हैं. विदेश मंत्रालय में राज्य मंत्री प्रीनीत कौर के अनुसार सामान्य नियमों के तहत विदेशी दूतावासों को जमीन केवल कमर्शियल दरों पर ही दी जाती है. हालांकि, ऐसे उदाहरण भी हैं जहां दिल्ली स्थित विदेशी दूतावासों को रियायती दरों पर भूमि दी गई है. यानी दोनों देश आपसी समझौतों और संबंधों को ध्यान में रखकर एक-दूसरे के राजनयिक मिशनों को रियायत देने का फैसला करते हैं.

पाक हाई कमीशन की डिनर पार्टी में शामिल हुई थी ज्योति, वीडियो में दिया अधिकारी के साथ संबंधों का सबूत

---विज्ञापन---

किस काम आ सकती है आवंटित जमीन?

नियमों के मुताबिक, भारत में विदेशी दूतावासों को जो जमीन दी जाती है, उसका उपयोग मुख्य रूप से एंबेसी के निर्माण और वहां काम करने वाले घरेलू कर्मचारियों के रहने के लिए किया जा सकता है. इसके अलावा, तय शर्तों के तहत इस जमीन का उपयोग शैक्षणिक संस्थान चलाने के लिए भी हो सकता है.

सीमा और अतिक्रमण पर कड़े नियम

राजनयिक विशेषाधिकार केवल स्वीकृत सीमा के अंदर ही प्रभावी होते हैं. यदि कोई दूतावास अपनी तय सीमा से बाहर सार्वजनिक मार्ग या फुटपाथ पर कोई अनधिकृत निर्माण या बैरिकेडिंग करता है तो स्थानीय प्रशासन को उसे हटाने का पूरा अधिकार है. हालिया प्रशासनिक कार्रवाइयों में यह साफ कर दिया गया है कि सार्वजनिक जमीन पर किए गए किसी भी अतिक्रमण पर स्थानीय नागरिक कानून लागू होते हैं.

---विज्ञापन---

दूतावास संचालन की शर्तें

भारत में किसी भी विदेशी दूतावास का संचालन गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के दिशा-निर्देशों के तहत होता है. दूतावास के अधिकारियों को वियना कन्वेंशन के तहत सुरक्षा और छूट जरूर मिलती है, लेकिन उनके लिए स्थानीय कानूनों का सम्मान करना अनिवार्य है. इसके अलावा, बिना भारत सरकार की अनुमति के दूतावास परिसर से किसी भी तरह की अनाधिकृत राजनीतिक गतिविधि के संचालन पर पूरी रोक है.

‘जब पहलगाम हमला हुआ तब पाकिस्तानी हाई कमीशन दानिश के संपर्क में थी ज्योति’, हरियाणा पुलिस का बड़ा खुलासा

---विज्ञापन---