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‘हमारा संबंध रामायण-महाभारत की विरासत’, PM मोदी ने इंडोनेशिया की संसद को किया संबोधित, जानिए बड़ी बातें

Parliament of Indonesia: भारत और इंडोनेशिया के बीच भौगोलिक संबंधों की व्याख्या करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भले ही दोनों देशों की राजधानियां एक-दूसरे से हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन समुद्री सीमा के लिहाज से हमारे बीच मात्र 150 किलोमीटर की दूरी है.

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को इंडोनेशिया की संसद को संबोधित करते हुए दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और रणनीतिक संबंधों का जिक्र किया. अपनी तीन देशों की राजकीय यात्रा के पहले चरण में जकार्ता पहुंचे पीएम मोदी ने भारत और इंडोनेशिया के रिश्तों को रामायण और महाभारत जैसी साझा विरासत से जुड़ा हुआ बताया. संसद में अपने विशेष संबोधन के दौरान उन्होंने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच की दूरी को भौगोलिक सीमाओं से नहीं, बल्कि दिलों के जुड़ाव से मापा जाना चाहिए.

इंडोनेशिया की संसद में क्या बोले PM मोदी?


संसद को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा, ‘आज भारत और इंडोनेशिया इतिहास के एक अत्यंत महत्वपूर्ण मोड़ पर एक साथ खड़े हैं. इस सदी की पहली तिमाही बीत चुकी है, और आने वाले 25 वर्ष हम दोनों ही देशों के भविष्य के लिए बेहद निर्णायक साबित होने वाले हैं. मैं आज इंडोनेशिया की इस महान धरती पर दोनों राष्ट्रों के साझा विकास के अटूट विश्वास और इस संकल्प के साथ आया हूं कि भारत और इंडोनेशिया मिलकर पूरी मानवता की सेवा करेंगे.’

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कॉपीराइट के दायरे से परे है हमारी दोस्ती


इससे पहले इंडोनेशिया के राष्ट्रपति प्रबोवो सुबियांतो द्वारा द्विपक्षीय बातचीत में ‘कॉपीराइट’ के संदर्भ में की गई टिप्पणी का जवाब देते हुए पीएम मोदी ने संसद में बेहद आत्मीय रुख अपनाया. उन्होंने कहा, ‘आज सुबह राष्ट्रपति प्रबोवो ने कॉपीराइट का जिक्र किया था, लेकिन मैं कहना चाहता हूं कि इस आपसी प्रेम, स्नेह, गहरी मित्रता और सम्मान की भावना पर किसी का कोई कॉपीराइट नहीं हो सकता. राष्ट्रपति प्रबोवो के साथ मेरी व्यक्तिगत मित्रता कॉपीराइट की सभी सीमाओं और दायरों से कहीं ऊपर है.’

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विस्तारवाद नहीं, विकासवाद का समर्थक है भारत


वैश्विक मंच पर भारत की भूमिका और नीतियों को स्पष्ट करते हुए प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में विस्तारवादी ताकतों को कड़ा संदेश दिया. उन्होंने जोर देकर कहा, ‘भारत एक ऐसा राष्ट्र है जो कभी भी विस्तारवाद के रास्ते पर नहीं चलता, बल्कि हमेशा विकासवाद की राह का अनुसरण करता है. हम ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मूल मंत्र में विश्वास रखते हैं, जिसमें सभी की भागीदारी और सबका कल्याण समाहित है. आज मैं 140 करोड़ भारतीयों के प्रतिनिधि और लोकतंत्र की जननी के एक गौरवान्वित नागरिक के रूप में हर भारतीय की ओर से आपके लिए यही भावना और शुभकामनाएं लेकर आया हूं.’

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हमारे बीच सेतु का काम करता है समुद्र


भारत और इंडोनेशिया के बीच भौगोलिक संबंधों की व्याख्या करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि भले ही दोनों देशों की राजधानियां एक-दूसरे से हजारों किलोमीटर दूर हों, लेकिन समुद्री सीमा के लिहाज से हमारे बीच मात्र 150 किलोमीटर की दूरी है. उन्होंने कहा, ‘दुनिया के अन्य देशों के लिए भले ही समंदर एक बाधा या दूरी की वजह रहा हो, लेकिन भारत और इंडोनेशिया के संदर्भ में इसने कभी अलगाव का प्रतीक बनने का काम नहीं किया. इसके विपरीत, यह महासागर हमारे बीच एक मजबूत सेतु (पुल) की तरह है, जो हमारी साझा नियति और भविष्य को आकार देता है.’

First published on: Jul 07, 2026 03:46 PM

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About the Author

Akarsh Shukla

आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला की विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी ज्ञान है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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आकर्ष शुक्ला (Akarsh Shukla) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जो पिछले 12 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं। वर्तमान में वो News 24 Digital टीम को शिफ्ट हेड के तौर पर लीड कर रहे हैं। आकर्ष शुक्ला की विशेषज्ञता प्रिंट, डिजिटल मीडिया (वेबसाइट) और मोबाइल ऐप्स के माध्यम से खबरों को सजीव और प्रभावी रूप में पेश करने में है। देश-दुनिया की महत्वपूर्ण खबरों के साथ-साथ आकर्ष को मनोरंजन, लाइफस्टाइल, ट्रेंडिंग और खेल जगत की खबरों का भी बखूबी ज्ञान है। आकर्ष शुक्ला, पत्रकारिता को सिर्फ एक पेशा नहीं, बल्कि समाज की आवाज और जनसंवाद का एक सशक्त माध्यम मानते हैं।

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